सिर्फ संविधान के निर्माता नहीं महिलाओं के मसीहा भी हैं आंबेडकर, दिए ये कानूनी अधिकार

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नई दिल्ली. भारतीय संविधान के शिल्पकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की आज जयंती (BR Ambedkar Jayanti) है. संविधान के निर्माण के साथ डॉ. आंबेडकर ने समाज सुधार के लिए कई कार्य किए हैं.

पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को एक सामान अधिकार (Rights of Women) दिलाने के लिए बाबा साहब आंबेडकर ने वर्षों तक मशक्कत की, जो उन्हें सशक्त बनाने में मददगार साबित हुई. भारतीय संविधान में महिलाओं को जो अधिकार दिए गए हैं, वो बाबा साहब आंबेडकर के कारण ही है.

महिलाओं का विकास और डॉ. आंबेडकर

– दलितों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले डॉ. आंबेडकर ने महिलाओं को एक समान दर्जा दिलाने के लिए मनुस्मृति को जला दिया था. इस घटना का विरोध आज भी होता है.

– डॉ. आंबेडकर ने कहा था कि मनुस्मृति ने सिर्फ जाति प्रथा, ऊंच-नीच  को ही बढ़ावा नहीं दिया था बल्कि इस पुरूष प्रधान समाज को आगे बढ़ाने में मदद की है.

–  डॉ. आंबेडकर का मानना था कि धर्म हमेशा ही महिलाओं के विकास में बाधा उत्पन्न करती आई है. धर्म के नाम ही पुरुष प्रधार समाज उस पर अत्याचार और उसका शोषण कर रहा है.

– भारत में महिलाओं की स्थिति को देखते हुए डॉ बाबा साहेब आंबेडकर ने महिलाओं के विकास और उनके पूरे अधिकारों को दिलाने के साथ उन्हें सशक्त बनाने के लिए सन् 1951 में ‘हिंदू कोड बिल’ संसद में पेश किया.

जानें हिंदू कोड बिल की खासियत

1. स्त्रियों के लिए तलाक का अधिकार.

2. हिंदू कानून के अनुसार विवाहित व्यक्ति के लिए एकाधिक पत्नी अर्थात बहुविवाह प्रतिबंध.

3. अविवाहित कन्याओं और विधवाओं को बिना कोई शर्त के पिता या पति के सम्पति पर उत्तराधिकारी बनने का हक. अंतरजातीय विवाह को मान्यता दी जाए.

4. इस बिल में अंतनिर्हित ये न्यूनतम सिद्धांत धार्मिक रीति से विवाहित स्त्रियों को इन अधिकारों का इस्तेमाल करने और लाभ उठाने का अवसर प्रदान करता है.

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