हरियाणा में एससी समाज की स्कूली छात्राओं के साथ यौन हिंसा केसों का ग्राफ बढ़ा: रजत कल्सन

हरियाणा में अनुसूचित जाति समाज की स्कूली छात्राओं (Scheduled Caste School Girls) के साथ लगातार हो रही यौन हिंसा के चलते उनके परिजनों द्वारा स्कूल जाने वाली बच्चियों को स्कूल से निकालकर घर बैठाने की घटनाओं पर नेशनल एलाइंस फॉर दलित ह्यूमन राइट्स (National Alliance for Dalit Human Rights) के संयोजक एडवोकेट रजत कल्सन (Advocate Rajat Kalsan) ने गहरी चिंता जताई है. कल्सन ने कहा कि एससी समाज की बच्चियां लंबे समय से गुंडों के राडार पर हैं. एससी समाज के परिजनों की गरीबी, बेबसी, अशिक्षा व जातिवाद के चलते उनकी नाबालिग बच्चियों को सॉफ्ट टारगेट समझकर शिकार बनाया जाता है. उन्होंने कहा कि हरियाणा (Haryana) गांव की स्कूलों में खासकर ऐसी समाज की बच्चियों के लिए बेहद असुरक्षित माहौल है. उन्‍होंने आरोप लगाया कि यहां तक की स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक तथा स्टाफ के सदस्य ही बच्चियों का यौन उत्पीड़न (Sexual violence) करने का काम करते हैं. उन्होंने कहा की स्कूल के अंदर तथा बाहर दोनों जगह बच्चियां असुरक्षित हैं.

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हालांकि केंद्र सरकार ने इन मामलों की रोकथाम के लिए प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (Protection of Children from Sexual Offenses Act) बनाया है, लेकिन खुद पुलिस विभाग द्वारा इस कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया जाता है तथा ना ही समय पर बच्चियों की शिकायत लिखी जाती है, ना ही समय पर मुकदमे दर्ज किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि स्कूलों में भी इस तरह के मामले सामने आने पर स्कूल प्रशासन द्वारा उन्हें दबाया जाता है तथा आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करने दी जाती है.

एडवोकेट रजत कल्सन (Advocate Rajat Kalsan) का कहना है कि यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) की शिकार बच्चियों के साथ स्कूल में भेदभाव किया जाता है व उन्हें अलग बिठाया जाता है यही नही उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता है तथा उन बच्चियों पर स्कूल का माहौल खराब करने जैसे गंभीर आरोप लगाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे समाज में रेप करने वाले का महिमामंडन तथा रेप पीड़िता को बदनाम किया जाता है जिससे इस तरह की यौन पीड़िताओं के आत्महत्या के मामले बढ़े हैं व माता-पिता द्वारा बच्चियों को स्कूल से निकालने के मामले बढ़ रहे है जो एक गम्भीर चिंतन का विषय है.

उन्होंने कहा कि यही नहीं किसी गांव के स्कूल में अगर किसी बालिका का यौन उत्पीड़न (Sexual violence) या उस पर यौन हमला होता है तो उक्त बच्ची के मां-बाप तो उसे स्कूल से निकाल ही लेते हैं साथ ही गांव में यौन उत्पीड़न की इस घटना से दहशत में आए अन्य माता-पिता भी अपनी बच्चियों को स्कूल से निकालकर घर बैठा लेते हैं कि कहीं उनकी बच्ची के साथ भी इस तरह की घटना ना हो जाए.

रजत कल्सन ने कहा कि इस मामले में सरकार को गंभीर होकर यौन हिंसा की पीड़ितों का डाटा तैयार करना चाहिए तथा जिला स्तर पर एक कमेटी बनाकर इन पीड़ितों के माता-पिता से संपर्क कर बच्चियों की स्कूल की शिक्षा ना छूटे, यह सुनिश्चित करना चाहिए तथा बच्चों को सुरक्षित माहौल देने की सरकार की जिम्मेदारी है.

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