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युवराज सिंह को गिरफ्तारी के तुरंत बाद मिली अंतरिम जमानत, अब सुप्रीम कोर्ट जाएगा मामला

नई दिल्‍ली : अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज मामले में हरियाणा की हांसी पुलिस (Hansi Police) द्वारा शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह (Cricketer Yuvraj Singh) को औपचारिक गिरफ्तार करने के तुरंत बाद अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर युवराज सिंह कल हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां दो से तीन घंटे की पूछताछ एवं औपचारिक गिरफ्तारी के बाद उन्‍हें अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया. शिकायतकर्ता वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता रजत कलसन ने पुलिस की कार्रवाई पर अंसुष्टि जताते हुए कहा कि Hansi Police ने नियमों के अनुसार इस एक्‍शन से उन्‍हें अवगत नहीं कराया. साथ ही उन्‍होंने पुलिस पर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) को वीआईपी ट्रिटमेंट दिए जाने का आरोप भी लगाया. साथ ही जल्‍द सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अंतरिम जमानत के आदेश को चुनौती दी जाएगी.

युवराज सिंह के खिलाफ करीब 8 महीने बाद हरियाणा पुलिस ने SC/ST Act में दर्ज की एफआईआर

रजत कलसन ने न्‍यूज़18 हिंदी (डिजिटल) को बताया कि इस मामले में युवराज सिंह की तरफ से अपने बचाव में दी गई दलीलों से असंतुष्‍ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रिकेट युवराज सिंह को पुलिस के समक्ष सरेंडर करने और जांच में सहयोग देने के आदेश दिए थे. इसके बाद बीते शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां से हांसी पुलिस उन्‍हें हिसार के गजेडिट ऑफि‍सर्स जियो मैस ले गई. यहां युवरात से करीब दो से तीन घंटे से पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्‍हें औपचारिक रूप से अरेस्‍ट कर लिया गया और अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया.

रजत कलसन ने आरोप लगाया कि इस पूरी कार्रवाई के सख्‍त होने की बजाय पुलिस ने युवराज को वीआईपी ट्रिटमेंट दिया. यहां तक की पुलिसवालों ने उनके साथ फोटो तक खिंचवाए. उन्‍होंने कहा कि नियमानुसार पुलिस ने उन्‍हें कार्रवाई से अवगत तक नहीं कराया.

जातिगत टिप्‍पणी मामला: युवराज सिंह नहीं कर रहे जांच में सहयोग, सरकारी वकील ने हाईकोर्ट को बताया

उन्‍होंने बताया कि अब वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. उनकी ओर से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की जाएगी, क्‍योंकि एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) में अंतरिम जमानत का प्रावधान नहीं है. यह आदेश गलत है और इससे समाज में एक्‍ट को लेकर गलत संदेश जाएगा. उन्‍होंने कहा कि हम इस उनकी अंतरिम जमानत को कैंसिल कवारकर जेल भिजवाएंगे.

बता दें कि युवराज पर आरोप है कि उन्होंने बीते साल रोहित शर्मा से लाइव चैट के दौरान युजवेंद्र चहल पर अनुसूचित जाति के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ दलित अधिकार कार्यकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में SC-ST एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए युवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर हाईकोर्ट ने युवराज के खिलाफ पुलिस की उत्पीड़न कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. अभी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है.

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Caste comment case Yuvraj Singh not cooperating in investigation PP told Punjab and Haryana High Court

जातिगत टिप्‍पणी मामला: युवराज सिंह नहीं कर रहे जांच में सहयोग, सरकारी वकील ने हाईकोर्ट को बताया

नई दिल्‍ली: अनुसूचित जाति समाज (Scheduled Caste Community) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में दर्ज केस को खारिज करने के लिए क्रिकेटर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) द्वारा दायर अर्जी पर शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) में सुनवाई हुई. युवराज पर हरियाणा (Haryana) के हांसी थाना (Hansi Police Station) शहर में अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम (SC/ST Act) व भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत मामला दर्ज है.

सुनवाई के दौरान युवराज सिंह (Yuvraj Singh) की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली ने हाईकोर्ट की बेंच के समक्ष कहा कि वे इस मामले में एक रिजॉइंडर फाइल करना चाहते हैं इसलिए उन्हें समय दिया जाए, जिस पर शिकायतकर्ता वकील रजत कलसन (Advocate Rajat Kalsan) के अधिवक्ता अर्जुन श्योराण ने कहा कि इस मामले में पहले ही बहुत समय दिया जा चुका है तथा आज की पेशी अंतिम बहस के लिए मुकर्रर थी और वे इस मामले में बहस करना चाहते हैं, इसलिए इस मामले में बहस सुनी जाए.

इस दौरान बेंच ने सरकारी वकील से जांच का स्टेटस पूछते हुए कहा कि क्या युवराज सिंह को और जांच में शामिल किया गया है? इस पर सरकारी वकील ने आरोप लगाया कि युवराज सिंह एक बार जांच में शामिल हुए हैं. उनकी तरफ से जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा है और तथा ना ही उनकी तरफ से अपना मोबाइल फोन पुलिस को सौंपा गया है.

इस पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने युवराज सिंह के वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर आप जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो अदालत इस मामले में युवराज सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बारे में लगाई गई रोक को हटाने से गुरेज नहीं करेगी. इस पर युवराज सिंह के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता युवराज सिंह दुबई गए हैं और आते ही वह जांच में शामिल होकर पूरा सहयोग करेंगे.

शिकायतकर्ता के अधिवक्ता अर्जुन श्योराण ने अदालत से कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई की जल्‍द ही कोई तारीख दी जाए, जिस पर कोर्ट ने अगली तारीख 6 सितंबर मुकर्रर की.

गौरतलब है कि युवराज ने अनुसूचित जाति समाज के खिलाफ अपमानजनक व आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसके चलते उसके खिलाफ दलित अधिकार कार्यकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में एससी एसटी एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए युवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने युवराज के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी.

Mirchpur Kand victims Water entered into Valmiki community tents

दुखद: मिर्चपुर पीड़ितों की बस्ती के तंबुओं में पानी घुसा, खाना-कपड़े बर्बाद, बिजली-पानी भी बंद

नई दिल्‍ली/हिसार : हरियाणा (Haryana) के मिर्चपुर कांड (Mirchpur Kand) के बाद गांव से अपना घर-परिवार छोड़ने को मजबूर हुए दलित (Dalit) समाज के लोगों को आज भी क्‍या-क्‍या नहीं झेलना पड़ रहा. जातिवादी उत्‍पीड़न (Caste Oppression) की इस निर्मम घटना को झेलने वाले 250 से अधिक परिवार आज सरकारी उदासीनता के चलते नरक से बदतर जीवन जीने को मजबूर हो चले हैं. उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं. ना सरकार, ना प्रशासन. मॉनसून ने तो जैसे उनके लिए जीवनयापन की तमाम मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, ऊपर से सरकारी उदासीनता ने इस जख्‍म पर नमक डालने जैसा काम किया है.

दरअसल, ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (Human Rights Law Network) की एक टीम ने गांव ढंडूर में बनी मिर्चपुर पीड़ितों (Mirchpur Victims) की बस्ती में दौरा किया. यहां मिर्चपुर पीड़ितों ने अपने रहने के लिए अस्थाई टेंट बना रखे हैं. वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की इस पांच सदस्यीय टीम ने जो देखा वह बेहद दुखद था. यहां तेज बारिश व हवा के चलते लगभग सभी टैंट तबाह हो चुके हैं.

पीड़ित वाल्मीकि समुदाय के लोगों के तंबुओं के अंदर पानी घुस गया है, जिसके चलते वहां पीड़ितों का जीना दुभर हो चला है. पीड़ितों का खाना, जरूरी सामान, बिस्तर, कपड़े सबकुछ पानी में खराब हो चुके हैं. तंबू में बनी रसोईयां में भी पानी भर गया है, जिसके चलते वह अपना खाना भी नहीं बना पा रहे हैं .

अधिवक्ता रजत कलसन (Advocate Rajat Kalsan) के नेतृत्व में यहां का जायजा लेने पहुंची इस टीम को पीड़ितों ने बताया कि पिछले 5 दिनों से बिजली की सप्लाई बंद है तथा पानी के टैंकर भी आने बंद हो गए हैं, जिस बारे में प्रशासन के अधिकारियों से गुहार और चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है. उनकी जिंदगी नरक से भी बदतर हो गई है.

इस मामले में अधिवक्ता रजत कलसन ने तुरंत हिसार के उपमंडल अधिकारी नागरिक से संपर्क कर उन्हें मिर्चपुर पीड़ितों की बस्ती में बिजली व पानी की सप्लाई शुरू कराने के लिए कहा. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया तथा बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता ने टीम को इतला कर बताया कि शाम तक बिजली की सप्लाई बहाल कर दी जाएगी व उपमंडल अधिकारी नागरिक ने बताया कि पानी के टैंकरों से बस्ती में पानी सप्लाई भी शुरू कर दी जाएगी.

Advocate Rajat Kalasn Mirchpur Kand victims Water entered into Valmiki community tents
अधिवक्ता रजत कलसन के नेतृत्व में ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क की एक टीम ने गांव ढंडूर में बनी मिर्चपुर पीड़ितों के बस्ती में दौरा किया.

दरअसल, मिर्चपुर कांड (Mirchpur Kand) के बाद पीड़ित वाल्मीकि परिवारों (Valmiki Families) ने जनवरी 2011 में गांव से पलायन कर दिया था. उसके बाद यह पीड़ित 10 साल तक वेदपाल तंवर के तंवर फार्म हाउस पर रहे. जून 2011 में एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई और 2014 में उक्त याचिका को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) में ट्रांसफर कर दिया, जो अभी विचाराधीन है.

वकील रजत कलसन (Advocate Rajat Kalsan) ने बताया कि उस याचिका में हमने मिर्चपुर के पीड़ितों के पुनर्वास की मांग की थी, परंतु जब यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार और अब भाजपा सरकार दोनों ने मिर्चपुर पीड़ितों (Mirchpur Victims) के अलग जगह पर पुनर्वास का विरोध किया, लेकिन हम लोगों ने लगातार अपने धरना-प्रदर्शन जारी रखें और अदालतों में भी लगातार पुनर्वास के लिए पैरवी की, जिसके चलते हरियाणा सरकार (Haryana Govt) को मिर्चपुर के पीड़ित वाल्मीकि समाज (Victims of Mirchpur Valmiki Samaj) के लोगों को रहने के लिए जगह देनी पड़ी और हिसार (Hisar) के ढंडूर गांव (Dhandoor Village) के पास करीबन 258 परिवारों को रहने के लिए प्लॉट दिए गए हैं. इन प्लॉटों की एवज में हरियाणा सरकार मिर्चपुर पीड़ितों के गांव के घरों को सरकारी कब्जे में ले लिया है तथा इन प्लॉटों की एवज में उन्हें किस्तें भी देनी पड़ रही हैं.

कलसन ने कहा कि प्लॉट तो मिर्चपुर (Mirchpur Kand) के पीड़ितों को मिल गए हैं, लेकिन वहां पर रहने के लिए जरूरी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली, बच्चों के लिए स्कूल, सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी का अभी तक कोई इंतजाम नहीं है.

इसके साथ ही बुनियादी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र ,रिहायशी प्रमाण ,फैमिली आईडी, राशन कार्ड जैसी जरूरी दस्तावेज भी इन लोगों के आज तक नहीं बने हैं, जिसके चलते ना तो इनके बच्चे स्कूलों में एडमिशन ले पा रहे हैं, ना ही इनके बिजली व पानी के कनेक्शन वगैरह लग सके हैं.

कलसन ने कहा कि जल्द ही इस बारे में वे पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर हाईकोर्ट के समक्ष मांग रखेंगे कि हरियाणा सरकार को आदेश दिए जाए कि मिर्चपुर (Mirchpur Kand) पीड़ितों के लिए बस्ती में बिजली, पानी की सुविधा उनके लिए कम्युनिटी सेंटर, पुलिस चौकी स्कूल, डिस्पेंसरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाए. साथ ही जिला प्रशासन को निर्देश दिए जाएं कि पीड़ितों के राशन कार्ड, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, रिहायशी प्रमाण, पत्र व फैमिली आईडी बनवाई जाए.

इस मौके पर अधिवक्ता दीपक सैनी ,अधिवक्ता मलकीत सिंह, अधिवक्ता प्रवेश महिपाल, एक्टिविस्ट अजय भाटला, रामकुमार, रमेश व पीड़ितों में रमेश, दिलबाग, गुलाब सिंह ,तिलकराज व अन्य पीड़ित महिलाएं व पुरुष मौजूद थे.

Human Rights Law Network village Ramayana legally aware

अब Human Rights Law Network ने गांव रामायण के लोगों को किया कानूनी जागरूक

नई दिल्‍ली/हांसी: हरियाणा (Haryana) के गांव रामायण के गुरु रविदास धर्मशाला में ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (Human Rights Law Network) की तरफ से कानूनी जागरूकता व सहायता शिविर का आयोजन किया. इस जागरूकता शिविर का मकसद गांव के गरीब व वंचित समाज के लोगों को कानून के प्रति जागरूक करना व उनकी कानूनी सहायता करना था. इस कानूनी जागरूकता शिविर में 70 से अधिक महिला व पुरुष ग्रामीणों ने हिस्सा लिया.

इस शिविर में आए वकीलों ने ग्रामीणों को, प्रशासनिक समस्याओं, बिजली बिल व मीटर से संबंधित समस्याओं, मजदूरी व मजदूरों से संबंधित कानून, घरेलू हिंसा अधिनियम, भारतीय दंड संहिता, जूनाइल जस्टिस एक्ट, भारतीय संविधान, अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम, पंचायती राज अधिनियम जैसे कानूनों की जानकारी दी . कानूनी जानकारी देने के बाद लोगों ने अपनी अपनी-अपनी समस्याओं के बारे में बताया व लिखित में मौके पर आए हुए अधिवक्ताओं को शिकायत दी, जिस बारे में उनको आश्वासन दिया गया कि उनकी पूरी कानूनी मदद की जाएगी.

संगठन के प्रदेश संयोजक वकील रजत कलसन (Advocate Rajat Kalsan) ने बताया की सरकार का दायित्व है कि लोगों तक पूरी कानूनी जानकारी पहुंचे परंतु सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं है. आम जनता भी कानूनी समस्याओं को लेकर घरों से निकलने में हिचकते हैं तथा उन्हें कानूनी कार्रवाई में होने वाले भारी-भरकम खर्चे का भी डर रहता है. इसलिए अब ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (Human Rights Law Network) हर गांव में जाकर लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगा तथा उन्होंने कानूनी तौर पर जागरूक भी करेगा. उन्होंने अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम (SC/ST Act) की जानकारी दी.

Advocate Rajat Kalsan ने शिविर में लोगों को बताया कि सरकार का दायित्व है कि लोगों तक पूरी कानूनी जानकारी पहुंचे परंतु सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं है.

गांव रामायण में इस कानूनी जागरूकता शिविर में अधिवक्ता रोहित कलसन ने प्रशासनिक सामान्य कानून, घरेलू हिंसा अधिनियम तथा अधिवक्ता दीपक सैनी ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन ऑफ सेक्सल ऑफन्स एक्ट तथा अधिवक्ता प्रवेश महिपाल ने महिला हिंसा के विरुद्ध कानूनों पर अधिवक्ता मलकीत सिंह ने किशोर न्याय अधिनियम व आरटीआई एक्ट संविधान के बारे में लोगों को जानकारी दी.

इस कानूनी जागरूकता शिविर में मानवाधिकार कार्यकर्ता अजय भाटला डॉ सुशील, संजय बौद्ध, बलजीत, राजेश,शिव कुमार, विकास, प्रमोद, सतीश, हरीश, प्रेम बौद्ध,अमन, टोनी, रोबिन, अंकुश, विक्रम नरड़, सुरेशपाल, संजीव बामनिया, अशोक धानिया, कुलदीप व दर्जनों लोग मौजूद रहे.