कार्यकर्ता को चमचा समझने की भूल तो नहीं ही करनी चाहिए : मान्‍यवर कांशीराम

Kanshi Ram Says Never misunderstand party worker as Chamcha : मान्‍यवर कांशीराम (Manyavar Kanshi Ram) के विचार कार्यकर्ताओं के लिए बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट थे. उनके अनुसार, पार्टी कार्यकर्ता को कभी भी चमचा (Chamcha) समझने की भूल नहीं करनी चाहिए. इसके पीछे उन्‍होंने दमदार तर्क भी दिया है. अपनी सुप्रसिद्ध रचना चमचा युग (Chamcha Yug) में कांशीराम (Manyavar Kanshi Ram) ने इस बारे में अपने महत्‍वपूर्ण विचार रखे…

‘कार्यकर्ता को चमचा समझने की भूल तो नहीं ही करनी चाहिए. कुछ लोग कार्यकर्ताओं को चमचे समझने की भूल कर सकते हैं. यह भयंकर भूल होगी. कार्यकर्ता और चमचा धुर विरोधी होते हैं. कार्यकर्ता अत्यंत लाभकारी होता है, जबकि चमचा गुलाम होता है जो लोग आज्ञाकारी था और गुलाम में भेद नहीं कर सकते. वे कार्यकर्ता को भी चमचा समझने की भूल कर सकते हैं. चमचे का इस्तेमाल उसकी अपनी ही जाति के खिलाफ किया जाता है जबकि कार्यकर्ता का इस्तेमाल उसकी जाति की भलाई के लिए होता है और चमचे का इस्तेमाल उसकी अपनी ही जाति के सच्चे और खाली नेता को कमजोर करने के लिए होता है. जब कार्यकर्ता का इस्तेमाल उसकी जाति और की सच्ची और खरे नेता की मदद के लिए उसके हाथ मजबूत करने के लिए होता है और कार्यकर्ता में अंतर करने के लिए और भी कई तथ्य दिए जा सकते हैं. किंतु यहां हमारी दिलचस्पी केवल इस बात पर जोर देने में है कि एक कार्यकर्ता को समझ चमचा समझने की भूल तो नहीं है. नहीं चाहिए’.

पढ़ें, मान्‍यवर कांशीराम के विचार, उन्‍होंने बताया ‘चमचा’ क्या होता है?

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जब पहली बार मान्‍यवर कांशीराम ने संसद में प्रवेश किया, हर कोई सीट से खड़ा हो गया था…

कांशीराम ने क्‍यों कहा, ‘हमें चमचों से नहीं डरना’… यह प्रेरक बात जाननी बहुत जरूरी है

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