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Kanshiram ke Vichar: कांशीराम के अनमोल विचार-कथन, पार्ट-3

Kanshiram ke Anmol Vichar Kathan Part 3

Kanshiram ke Anmol Vichar : यह कहना गलत नहीं होगा कि मान्‍यवर कांशीराम (Manyavar Kanshiram) के कारण ही दलितों की राजनीतिक आवाज देश के कोने-कोने में गूंजी. उन्‍हीं के असीम प्रयासों की वजह से सदियों से सत्ता से दूर रहने वाला दलित समाज सत्ता पर आसीन हुआ. उनकी सामाजिक और राजनैतिक क्षमता विलक्षण थी. उनके नैतिक बल का कोई सानी नहीं था. एक वक्‍त ऐसा भी था, जब बड़ी-बड़ी राजनीतिक हस्तियां कांशीराम से मिलने जाया करती थी, बल्कि उन्‍हें कांशीराम जी (Kanshiram) से मिलने के लिए समय लेना पड़ता था.

कांशीराम के अनमोल विचार-कथन हमें जानने की बेहद जरूरत है.. आइये पढ़ते हैं इन्‍हें…

1. बहुजन समाज पार्टी का यह लक्ष्य होगा कि इस गैर-बराबरी को जल्द से जल्द दूर करने की कोशिश करें.

2. आंबेडकर की दलितों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग को गांधीजी ने दबाव की राजनीति से पूरा नहीं होने नहीं दिया और पूना पैक्ट के फलस्वरूप आगे चलकर संयुक्त निर्वाचक मंडलों में उनके ‘चमचे’ खड़े हो गए.

3. जब-जब कोई दलित संघर्ष मनुवाद को अभूतपूर्व चुनौती देते हुए सामने आता है, तब-तब ब्राह्मण वर्चस्व वाले राजनीतिक दल, जिनमें कांग्रेस भी शामिल है, उनके दलित नेताओं को सामने लाकर आंदोलन को कमज़ोर करने का काम करते हैं.

4. औज़ार, दलाल, पिट्ठू अथवा चमचा बनाया जाता है सच्चे, खरे योद्धा का विरोध करने के लिए. जब खरे और सच्चे योद्धा होते हैं चमचों की मांग तभी होती है.

5. जब कोई लड़ाई, कोई संघर्ष और किसी योद्धा की तरफ से कोई ख़तरा नहीं होता तो चमचों की ज़रूरत नहीं होती, उनकी मांग नहीं होती.

6. जब दलित वर्गों का सच्चा नेतृत्व सशक्त और प्रबल हो गया तो उनकी उपेक्षा नहीं की जा सकी. इस मुक़ाम पर आकर, ऊंची जाति के हिंदुओं को यह ज़रूरत महसूस हुई कि वे दलित वर्गों के सच्चे नेताओं के ख़िलाफ़ चमचे खड़े करें.

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