कांशीराम ने क्‍यों कहा, ‘हमें चमचों से नहीं डरना’… यह प्रेरक बात जाननी बहुत जरूरी है

नई दिल्‍ली : मान्‍यवर कांशीराम (Kanshi Ram) का मानना रहा कि औजार, दलाल, पिट्ठू और चमचा लगभग एक सा अर्थ देते हैं, लेकिन भाव में थोड़ी भिन्‍नता है. आम आदमी की भाषा में एक औजदार, एक दलाल अथवा एक पिट्ठू को चमचा कहा जाता है. मान्‍यवर कांशीराम (Kanshi Ram) मानते थे कि चमचा (Chamcha) सबसे खतरनाक प्रवृति होती है और हमें इससे निकलने और ऐसों से निपटने की सख्‍त जरूरत है. इसलिए दलित आंदोलन (Dalit Andolan) को आगे बढ़ाते हुए उन्‍होंने जोर देते हुए आशा जाहिर की थी कि लगभग 10 साल की छोटी अवधि में चमचा युग को समाप्‍त कर पाएंगे.

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24 सितंबर 1982 को करोल बाग स्थित डीएस4 कार्यालय पर बैठकर उन्‍होंने लिखा, यदि आप किसी को चमचा कहेंगे तो उसे अच्‍छा नहीं लगेगा और संभवत: वह आपका विरोधी हो जाएगा. लेकिन जब आप एक युग को ही चमचा कह रहे होते हैं तो आप अनेक लोगों को दंश देते हैं और वे पलटकर आप पर वार कर सकते हैं.

वह आगे कहते हैं, लेकिन चमचा अपने बूते कुछ नहीं कर सकता, इसलिए करने वाला आप पर चमचे से वार कर सकता है. इसलिए हमें चमचा प्रहार के लिए तैयार रहना होगा.

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मान्‍यवर ने कहा, बहरहाल चमचा प्रहार से हमें डरना नहीं चाहिए, क्‍योंकि चमचा कोई शक्तिशाली अथवा घातक हथियार नहीं है. इसके अलावा हमें उस हाथ पर निशाना साधना होगा जो चमचे का इस्‍तेमाल करता है. अगर हम जोर से मारेंगे तो चमचा गिर जाएगा. गिरा हुआ चमचा निरापद होता है.

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