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UP Assembly election 2022 Dalit IPS officer Asim Arun took VRS Can contest BJP ticket from Kannauj Sadar Seat

इस दलित IPS कमिश्‍नर ने यूपी चुनाव से पहले छोड़ी नौकरी, BJP के टिकट पर लड़ सकते हैं चुनाव

नई दिल्‍ली : चुनाव आयोग (Election Commission of India) के उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों (UP Assembly Election 2022 Dates, Schedule) के ऐलान के साथ ही नेताओं के साथ नौकरशाह का भी चुनावी रण में उतरने को तैयार हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) के तेजतर्रार अधिकारियों में शुमार दलित समाज (Dalit Community) से आने वाले 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी असीम अरुण (IPS officer Asim Arun)) ने वीआरएस ले लिया है. उनका वीआरएस स्‍वीकार भी हो गया है. जानकारी के मुताबिक दलित आईपीएस ऑफ‍िसर असीम अरुण (Dalit IPS officer Asim Arun) कन्नौज सदर सीट (Kannauj Sadar Seat) से चुनाव लड़ सकते हैं.

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दरअसल, यूपी एटीएस और यूपी 112 के भी प्रमुख रह चुके दलित आईपीएस अधिकारी असीम अरुण (Dalit IPS officer Asim Arun) के VRS लेने की खबर आने से पहले उन्‍होंने बीते शनिवार दोपहर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से मुलाकात की थी. असीम अरुण के पिता श्रीराम अरुण (Shri Ram Arun) उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) के मुखिया रह चुके हैं.

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कानपुर पुलिस के कमिश्नर असीम अरुण (Kanpur Police Commissioner Asim Arun) ने यूपी विधानसभा का चुनाव (UP Assembly Election 2022) लड़ने के लिए वीआरएस लिया है. इसकी जानकारी उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी दी.

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असीम अरुण ने फेसबुक पर लिखा, ”मैंने एच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किया है, क्योंकि अब राष्ट्र और समाज की सेवा एक नए रूप में करना चाहता हूं. मैं बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे बीजेपी की सदस्यता के योग्य समझा. मैं पूरी कोशिश करूंगा कि पुलिस बलों के संगठन के अनुभव और सिस्टम विकसित करने के कौशल से पार्टी को अपनी सेवाएं दूं और पार्टी में विविध अनुभव के व्यक्तियों को शामिल करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की पहल को सार्थक बनाऊं.”

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उन्होंने आगे लिखा कि ”मैं कोशिश करूंगा कि महात्मा गांधी द्वारा दिए गए ‘तिलस्म’ कि सबसे कमजोर और गरीब व्यक्ति के हितार्थ हमेशा कार्य करूं. आईपीएस की नौकरी (IPS Job) और अब यह सम्मान, सब बाबा साहेब आंबेडकर (Baba Sahab Dr. BR Ambedkar) द्वारा अवसर की समानता (Equality of Opportunity) के लिए रचित व्यवस्था के कारण ही संभव है. मैं उनके उच्च आदर्शों का अनुसरण करते हुए अनुसूचित जाति और जनजाति (Scheduled Castes and Scheduled Tribes) एवं सभी वर्गों के भाइयों और बहनों के सम्मान, सुरक्षा और उत्थान के लिए कार्य करूंगा. मैं समझता हूं कि यह सम्मान मुझे मेरे पिता स्वर्गीय श्रीराम अरुण (Former UP Police DGP Shri Ram Arun) एवं माता स्वर्गीय शशि अरुण के पुण्य कर्मों के प्रताप के कारण ही मिल रहा है.”

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UP Assembly election 2022 Dalit IPS officer Asim Arun took VRS Can contest BJP ticket from Kannauj Sadar Seat
फेसबुक पर आईपीएस अधिकारी असीम अरुण द्वारा लिखा गया पोस्‍ट

उन्होंने लिखा है, ”मुझे केवल एक ही कष्ट है कि अपनी अलमारी के सबसे सुंदर वस्त्र, अपनी वर्दी को अब नहीं पहन सकूंगा. मैं साथियों से विदा लेते हुए वचन देता हूं कि वर्दी के सम्मान के लिए हमेशा सबसे आगे मैं खड़ा रहूंगा. आपको मेरी ओर से एक जोरदार सैल्यूट.”

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Parliament Winter Session BJP MP KJ Alphons introduced private bill to change word socialism in constitution

संविधान में समाजवाद शब्‍द इस BJP सांसद को है नामंजूर, हटवाने को पेश किया प्राइवेट बिल, हुआ विरोध

नई दिल्‍ली : IAS की नौकरी छोड़कर बीजेपी सांसद बने केरल निवासी के जे अल्फोंस (K J Alphons) ने संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session 2021) के दौरान बीते शुक्रवार को एक प्राइवेट मेंबर बिल को पेश किया. इस बिल के जरिये उन्‍होंने प्रस्‍तावित किया कि संविधान की प्रस्तावना (Preamble to the Constitution) में वर्णित ‘समाजवाद’ (Samajvad) शब्द को हटाकर उसकी जगह ‘न्यायसंगत’ शब्द किया जाए. उनका यह बिल सदन में मुंह के बल आ गिरा, जब इसके विरोध में विपक्षी सांसदों ने आवाज़ बुलंद कर दी. नतीजा, उप सभापति द्वारा बिल को रिजर्व रख दिया गया.

दरअसल, पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजस्थान से बीजेपी (BJP) के सांसद के जे अल्फोंस (Alphons Kannanthanam) ने बीते 3 दिसंबर को उच्‍च सदन राज्‍यसभा (Rajya Sabha) में प्राइवेट मेंबर बिल के रूप में यह संविधान संशोधन बिल (Constitution Amendment Bill) पेश किया था. उनके इस बिल पर उप सभापति ने सदन का ध्वनिमत जानना चाहा. इसके विरोध में विपक्षी दलों के सांसदों ने नो यानि नहीं के पक्ष में ज्यादा आवाज लगाई.

राष्‍ट्रीय जनता दल नेता मनोज झा (RJD MP Manoj Jha) ने इस बिल पर कहा कि यह भारतीय संविधान (Indian Constitution) की आत्मा पर चोट है और सदन इसे पेश करने की अनुमति देकर संसदीय परंपरा को कलंकित ना किया जाए. साथ ही उन्‍होंने उल्‍लेखित किया किया कि सदन संचालन प्रक्रिया के नियम संख्या 62 में ऐसे प्राइवेट बिल राष्ट्रपति की सहमति के बिना पेश नहीं किए जा सकते. उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया कि “नियम 62 के अनुसार, ऐसा कोई बिल जो संविधान संशोधन से जुड़ा है तो उसे राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी या सिफारिश के बिना पेश नहीं किया जा सकता है एवं सदस्य द्वारा उपरोक्‍त मंजूरी या सिफारिश को नोटिस के साथ संलग्न किया जाएगा. यह एक मंत्री के माध्यम से सूचित किया जाएगा और नोटिस तब तक वैध नहीं होगा जब तक कि इस आवश्यकता का अनुपालन नहीं किया जाता.”

इस पर उप सभापति ने सदन में स्पष्ट किया कि इस बिल के साथ राष्ट्रपति की मंजूरी या सिफारिश नहीं है. इसके साथ ही उप सभापति ने बीजेपी सांसद के ले अल्‍फोंस बोलने को इजाजत नहीं दी और कहा कि सदन को इस बिल पर आपत्ति है, लिहाजा इस मामले में चेयर कोई फैसला नहीं लेगा बल्कि सदन तय करेगा. इस प्राइवेट बिल पर सदन में जमकर हंगामा भी हुआ तो उपसभापति से बिल को रिजर्व रखने की सलाह दी गई, जिसे सभी ने मान लिया और उस बिल को रिजर्व रख लिया गया.

वहीं, नेता विपक्ष और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने के जे अल्फोंस (K J Alphons) के इस बिल पर कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा संविधान बदलने की एक चोरी कल संसद में पकड़ी गयी, जब इन्होंने संविधान की प्रस्तावना जिसे इसकी आत्मा कहा जाता है उसमें से “समाजवादी” शब्द को हटाने का संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, लेकिन हमारे सजग और सतर्क सदस्यों ने कड़ा विरोध कर इस विधेयक को वापस कराया.

 

उधर, आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद (ChandraShekhar Azad) ने K J Alphons द्वारा पेश बिल के संज्ञान में आने के बाद इसकी निंदा की. उन्‍होंने कहा, यह शर्म की बात है कि भाजपा सांसद के. जे. अल्फोंस बाबासाहेब के संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी शब्द को संसद में बिल लाकर हटाना चाहते हैं. जबकि हमारे संविधान की नैतिकता और हृदय ही समाजवाद है. यह यूपी में डूबती हुई भाजपा सरकार से ध्यान हटाने का एक प्रयास है. संविधान विरोधी भाजपा.

 

Dalit-murder-UP-POlice

UP में भाजपा के दलित नेता की लाठियों से पीट-पीटकर हत्‍या

उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बदायूं (Badaun) जिले के उसावां थाना क्षेत्र में हुई एक घटना में एक दलित (Dalit) नेता की लाठी-डंडों से पीट पीटकर हत्‍या कर दी गई. बताया जा रहा है कि दलित नेता की लाठियों से पीटकर हत्‍या करने के बाद हमलावर वहां से फरार हो गए. मृतक भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा (BJP) के मंडल अध्‍यक्ष थे.

जागरण की खबर के अनुसार, बमनपुरा और बुधुआनगला गांव के लोगों में जमकर मारपीट, पथराव और लाठी-डंडे चले थे, जिसमें भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के मंडल अध्यक्ष की लाठियों से पीटकर हत्या करने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए थे.

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रिपोर्ट के अनुसार, बुधुआ नगला गांव के रहने कल्याण सिंह रविवार को अपने बेटों के साथ बमनपुरा गांव निवासी अनुसूचित जाति के अनिल के घर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने वाली मशीन मांगने गए थे. यहां किसी बात को लेकर अनिल के घरवालों और उनके बीच विवाद हो गया.

इस विवाद में कल्याण और उनके बेटों को पीटकर घायल कर दिया गया था. मंगलवार सुबह अनिल ने पुलिस को इस बारे में शिकायत दी.

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इसके बाद बहुत से लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली और बाइक से अनिल को लेकर थाने पहुंचे. बाद में वह सभी लोग गांव लौट रहे थे. इस दौरान ट्रैक्टर को तो दूसरे गांव के रास्ते से निकाल दिया गया, लेकिन बाइक सवार रुखाड़ा की ओर से जाने लगे.

यहां रुखाड़ा मोड़ के पास ही अनुसूचित जाति के कृष्णपाल व संजय की बाइक को डंडा मारकर गिरा दिया. संजय तो भाग निकला लेकिन हमलावरों ने कृष्णपाल को भागने का मौका नहीं दिया और उसके साथ मारपीट करते रहे. उसे अधमरा समझ हमलावर फरार हो गए. पुलिस कृष्णपाल को लेकर जिला अस्पताल जा रही थी, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया.

इस मामले की सूचना मिलते ही एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी, एसपी सिटी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे. इनके कुछ देर बाद ही क्षेत्रीय विधायक राजीव कुमार सिंह घटनास्थल पर पहुंचे. फिलहाल दोनों गांव के लोगों के बीच तनाव की स्थिति को देखते भारी संख्‍या में पुलिस फोर्स तैनात की गई है.

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