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Lakhimpur Kheri Violence My hair was pulled slapped and abused Savitri Bai Phule alleged

Lakhimpur Kheri Violence: ‘मेरे बाल खींचे, थप्‍पड़ मारे गए, दरोगा गाली देकर कहता रहा- बहुत संविधान-संविधान करती हो’: सावित्री बाई फुले ने बताई आपबीती

नई दिल्‍ली : लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा (Lakhimpur Kheri Violence) को लेकर उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं और योगी सरकार की जमकर आलोचना हो रही है. साथ घटनास्‍थल पर पहुंचने की कोशिश कर रहे नेताओं के साथ पुलिस-प्रशासन का बर्ताव भी सरकार को घेरे में डाल रहा है. न केवल विपक्षी दल, बल्कि आम लोग भी इसे सरकार का गलत नजरिया बता रहे हैं. कांग्रेस (Congress) महासचिव प्र‍ियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) को सीतापुर में नजरबंद रखे जाने, भीम आर्मी (Bhim Army Chief) चीफ चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) को रास्‍ते में रोके जाने और गलत पुलिस‍िया बर्ताव सरीखे मामलों के बीच पूर्व बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले (Savitri Bai Phule) को हिरासत में लेते वक्‍त उनके उनके साथ अभद्रता का वीडियो सामने आ रहा है. लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) जा रहीं दलित महिला नेता (Dalit Woman Leader) को पुलिसकर्मियों ने बालों से खींचकर, धक्‍का देकर गाड़ी में बिठाया.

सावित्री बाई फुले के साथ पुलिस की इस अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह यूपी पुलिस (UP Police) की महिला पुलिसकर्मी पूर्व बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले को घसीटते हुए ला रही हैं और उनके विरोध जताने पर उनके साथ बेहद बुरा व्‍यवहार किया गया. उनके बाल पकड़कर खीचें गए. उन्‍हें जबरन धक्‍का मारते हुए पुलिस की गाड़ी में बिठाया गया. यूपी पुलिस ने उन्‍हें कई घंटों तक हिरासत में रखा, फि‍र बाद में छोड़ा गया.

Lakhimpur Kheri हिंसा के बीच किसकी आजादी का जश्‍न मना रहे हैं? पीएम नरेंद्र मोदी से चंद्रशेखर आजाद का सवाल

बता दें कि भाजपा के टिकट से जीतकर बहराइच की सांसद बनीं सावित्री बाई फुले (Savitri Bai Phule) ने पार्टी में रहते हुए ही बगावत कर दी थी. 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा (BJP) पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी. हालांकि बाद में वह कांग्रेस से जुड़ीं, लेकिन पूर्व सांसद ने कांग्रेस का हाथ यह कहकर झटक दिया कि यह पार्टी भी भाजपा की तरह अनुसूचित जाति की विरोधी विचारधारा वाली है.

सावित्री बाई फुले ने एक वेबसाइट को बातचीत में बताया कि लखीमपुर खीरी में जिन किसानों की मौत हुई है, उनमें से एक उनका परिचित था, जिसे मिट्टी देने के लिए वो उनके घर जा रही थीं. उन्होंने कहा कि,”मेरे साथ बहुत बदतमीजी की गई. हम केवल 3 लोग ही गाड़ी में थे. पुलिस ने हमसे कहा कि आप वहां नहीं जा सकते. इसके बाद हमारे चाचा जी को डंडा मार दिया गया और जब मैंने इसका विरोध किया तो महिला पुलिस को बुलाया गया और मेरे साथ अभद्रता की गई. मुझे थप्पड़ मारे गए, मेरे बाल खींचे गए और गाड़ी में भी बहुत कुछ बदतमीजी की. उन्‍होंने कहा कि सिर्फ पुलिस का कानून चलेगा, संविधान-संविधान चिल्लाती रहती हो. अनुभव प्रताप सिंह, जो दरोगा था उसने मुझे गालियां दीं. मुझे पीठ और जांघ में चोट लगी है.”

फुले का आरोप है कि दरोगा अनुभव प्रताप सिंह ने उन्‍हें लगातार गालियां दी और कई राउंड घुमाता रहा. उन्‍होंने कहा कि ‘कई घंटे बाद एक थाने में मुझे नजरबंद कर दिया गया. शाम 6 बजे मेरी कोरोना जांच कराई गई और इसके बाद मैं जमानत लेकर बाहर आ सकी. मैं विधायक और सांसद रह चुकी हूं. मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है.

बीजेपी की ही पूर्व नेता और एक दलित महिला नेता के साथ इस तरह का व्‍यवहार होने पर यूपी पुलिस और योगी सरकार सरकार की खूब आलोचना हो रही है. खुद कांग्रेस (Congress) नेता प्रियंका गांधी ने भी सावित्री बाई फुले का वीडियो ट्वीट किया और उनके साथ हुए इस व्यवहार की निंदा करते हुए लिखा, सावित्री बाई फुले तुम्हारे साथ इस तरह का व्यवहार देखकर दुख हुआ. लड़ती रहो, डटी रहो.

 

उधर, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने भी Savitri Bai Phule के साथ हुई इस अमानवीयता की जमकर आलोचना करते हुए लिखा, ‘ये योगी के रामराज्य की एक झांकी है. संविधान राज खत्म करके मनुस्मृति राज लाने की संघी रणनीति पर काम चालू है. एक पूर्व महिला सांसद के साथ ऐसा बर्ताब क्रूर शासक के जंगलराज में ही संभव है. योगी जी, क्या वास्तव में UP में लोकतंत्र बचा है?’

 

Lakhimpur Kheri Violence Chandrashekhar Azad question to Narendra Modi Whose Freedom Are You Celebrating

Lakhimpur Kheri हिंसा के बीच किसकी आजादी का जश्‍न मना रहे हैं? पीएम नरेंद्र मोदी से चंद्रशेखर आजाद का सवाल

नई दिल्‍ली : उत्‍तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri Violence) में किसानों के साथ हुई बर्बरता के बीच लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के आजादी का अमृत महोत्‍सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) मनाने को लेकर भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने गंभीर सवाल उठाए. चंद्रशेखर आजाद ने प्रधानमंत्री से कई सवाल पूछते हुए कहा कि ‘क्‍या देश के प्रधानमंत्री शहीद किसान परिवारों के सामने बैठकर, आंख में आंख मिलाकर, कोई जवाब दे पाएंगे कि उनको न्‍याय कब मिल पाएगा. आरोपियों की गिरफ्तारी कब होगी?’ साथ ही उन्‍होंने पीएम से किसान विरोधी तीनों कानूनों को समाप्‍त करने की मांग भी की.

चंद्रशेखर आजाद ने मंगलवार को ट्विटर पर वीडियो जारी किया, जिसमें उन्‍होंने कहा कि ‘जय भीम, हम आज दिल्‍ली में हैं, क्‍योंकि उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में देश के प्रधानमंत्री को आजादी का अमृत महोत्‍सव मनाना है.’

उन्‍होंने कहा कि ‘लेकिन मैं देश के प्रधानमंत्री से पूछना चाहता हूं कि उत्‍तर प्रदेश में तो किसानों की चिताएं जल रही हैं. किसानों के घरों में मातम है. शहीद किसानों के परिवार चीख रहे हैं. उत्‍तर प्रदेश में ना तो किसान, ना महिलाएं, ना नौजवान, ना व्‍यापारी और ना ही विपक्ष आजाद है. तो आप किसकी आजादी का जश्‍न मना रहे हैं?’

उन्‍होंने पीएम नरेंद्र मोदी से सवाल पूछते हुए कहा कि लखनऊ से कुछ ही दूर पर लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) है. क्‍या देश के प्रधानमंत्री शहीद किसान परिवारों के सामने बैठकर, आंख में आंख मिलाकर, कोई जवाब दे पाएंगे कि उनको न्‍याय कब मिल पाएगा. आरोपियों की गिरफ्तारी कब होगी?

आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे लगता है कि ‘ये जश्‍न देश की आजादी का नहीं, भारतीय जनता पार्टी की आजादी का है कि उनके नेता, मंत्री किसानों की हत्‍या करेंगे और आरोपी आजाद रहेंगे. किसानों और विपक्ष को बंधक बनाया जाएगा. प्रधानमंत्री जी, जनता आपको माफ नहीं करेगी. आप किसान विरोधी तीनों कानूनों को समाप्‍त कीजिए’.

इससे पहले चंद्रशेखर लखीमपुर में घटनास्‍थल पर पहुंचे थे, जहां मृत किसानों के पार्थिव शरीर रखे हुए थे. उन्‍होंने वहां किसानों के परिवारों से मिलकर उन्‍हें सांत्‍वना दी. साथ ही उन्‍होंने कहा कि देश के अन्नदाताओं की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी. शहीद किसानों को नम आंखों से नमन. इतिहास गवाह है कि शहादतें क्रांति को जन्म देती हैं. तानाशाही भाजपा सरकार का अंहकार भी जल्द ही टूटेगा. किसान मजदूर एकता जिंदाबाद.

चंद्रशेखर आजाद ने लखीमपुर घटना को लेकर कहा था पूरा देश देख रहा है कि जिसने जलियावाला बाग नहीं देखा है वो आज देख रहा है. उत्तर प्रदेश में जो गुंडाराज है उसका जीता जागता उदाहरण लखीमपुर खीरी कांड है. यह सरकार किसानों के आंदोलन को नहीं कुचल पाई तो किसानों को कुचलने लगी है. जो हुआ वह बहुत डरावना है. देश की जनता किसानों के साथ है. मैं किसानों से मिले बगैर, जो आज हमारे बीच में नहीं है उनकी तकलीफ को सुने बिना और जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती हैं तब तक मैं नहीं जाऊंगा यहां से. पुलिस हमें चाहे जहां ले जाए, जब तक हम किसानों से नहीं मिल लेते और जो लोग दोषी हैं उनके खिलाफ कार्यवाई नहीं होती तब तक नहीं जाएंगे.उत्तर प्रदेश पुलिस जो जांच कर रही है वह कौन सी पुलिस है? गोरखपुर वाली पुलिस है या हाथरस वाली, जो आरोपी को बचा देती है और पीड़ितों को दोषी बना देती है.

Uttar Pradesh Jhansi Dalit Valmiki youth tied up with hand pump and beaten up

झांसी : काम करने से किया मना तो वाल्‍मीकि युवक को हैंडपंप से बांधकर मारा

नई दिल्‍ली/लखनऊ : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के झांसी (Jhansi) में एक दलित (Dalit) युवक को महज काम करने से इनकार करने पर हैंडपंप से बांधकर बुरी तरह मारा गया. पीडि़त युवक का नाम सुनील वाल्‍मीकि (Sunil Valmiki) है, जोकि बबीना के ग्राम पृथ्वीपुर नयाखेड़ा का रहने वाला है. सुनील की बेरहमी से पिटाई का वीडियो वायरल हो रहा है. पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा लिखते हुए दो को गिरफ्तार भी कर लिया है. तीसरे की तलाश की जा रही है.

रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना बीते बुधवार की बताई जा रही है. पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि सुनील वाल्मीकि पर उसकी पड़ोस में रहने वाली महिला और उसके परिवार के लोग उनके यहां जबरन काम करने का दवाब बना रहे थे, लेकिन सुनील ने उनके यहां काम करने से मना कर दिया. इस पर गुस्‍साई महिला ने अपने परिवार के लोगों के साथ मिलकर उसकी पिटाई कर दी और उसे हैंडपंप से बांध दिया.

घटना की सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और उसे छुड़वाया. पुलिस ने सुनील वाल्मीकि (Sunil Valmiki) की शिकायत के आधार पर तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर आरोपी शकुंतला राजपूत और उधम राजपूत को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस इस मामले की पड़ताल कर रही है.

सीओ सदर अरुण कुमार चौरसिया का कहना है कि युवक का आरोप है कि उसके पड़ोसी उससे जबरन काम कराते हैं. लेकिन जब उसने मना कर दिया तो उसे बांध लिया गया और उसकी पिटाई की गई.

Dalit girl raped of in Amethi bleeding continued for three days police accused of not taking proper action

अमेठी में दलित बच्‍ची से कथित रेप, 3 दिन तक होती रही ब्‍लीडिंग, पुलिस पर ठीक कार्रवाई न करने का आरोप

नई दिल्‍ली/अमेठी: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कौशांबी में दलित महिला से कथित गैंगरेप (Kaushambi Dalit Woman Gang Rape) के बाद अब अमेठी (Amethi) में दलित बच्‍ची से विभत्‍स रेप (Dalit Girl Raped) का मामला सामने आया है. मामला अमेठी के मोहनगंज थाना इलाके (Mohanganj Police Station area) का है. आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में पहले ठीक से कार्रवाई नहीं की. बता दें कि अमेठी बीजेपी सांसद स्मृति ईरानी का संसदीय क्षेत्र है.

न्‍यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, रेप की शिकार दलित लड़की की उम्र 10 साल है. जबकि आरोपी 17 साल का बताया जा रहा है. परिजनों द्वारा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक, बच्‍ची बीते 30 अगस्त की दोपहर गांव में ही खेल रही थी, तभी गांव का ही 17 साल का युवक उसे उठाकर ले गया और खेत में उसके साथ कथित दुष्कर्म किया.

तहरीर के मुताबिक, बच्‍ची को लगातार तीन दिन से रक्तस्राव हो रहा था. उसे परिजन डॉक्‍टर के पास ले गए, जहां लड़की ने अपने साथ हुई घटना के बारे में इस बात की जानकारी दी.

आरोप है कि मामले में पुलिस ने पहले ठीक से कार्रवाई नहीं की. रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की भूमिका से नाराज तिलोई से भाजपा विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह एवं प्रखंड प्रमुख मुन्ना सिंह ने मोहनगंज थाने पहुंचकर इस बाबत मुकदमा दर्ज कराया और पुलिस को उसकी कार्य प्रणाली के लिए फटकार लगाई.

इस संबंध में पुलिस उपाधीक्षक तिलोई अजय कुमार सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर विधिक कार्यवाही की जा रही है.

(Dalit Girl Raped)

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