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Uttar Pradesh assembly election 2022 Chandrashekhar Azad big promise for UP Police in Jaunpur

चुनाव जीतते ही यूपी पुलिसकर्मियों की ड्यूटी 8 घंटे करेंगे, हर हफ्ते एक छुट्टी देंगे, सैलरी बढ़ाएंगे : चंद्रशेखर आजाद का बड़ा वादा

नई दिल्‍ली/जौनपुर : आगामी उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) से पहले भीम आर्मी चीफ (Bhim Army) और आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने उत्‍तर प्रदेश पुलिस (UP Police) के कर्मियों को लेकर एक बड़ा वादा किया. उन्‍होंने वादा करते हुए कहा कि अगर चुनाव जीतकर हम सरकार में आते हैं तो हमने तय किया कि पुलिस की ड्यूटी आठ घंटे करेंगे. हर हफ्ते में उन्‍हें एक छुट्टी देंगे. उनकी तनख्‍वाह बढ़ाएंगे कि उन्‍हें अपना घर चलाने के लिए किसी तरह के करप्‍शन की जरूरत ना पड़े. चंद्रशेखर आजाद ने यह ऐलान समाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए जौनपुर (Jaunpur) में आयोजित बहुजन समाज भाईचारा बनाओ महासम्मेलन में किया.

पढ़ें, चंद्रशेखर आजाद के भाषण के मुख्‍य अंश:

-भारतीय संविधान अंतिम व्‍यक्ति को भी रोटी, कपड़ा, मकान, चिकित्‍सा, शिक्षा, रोजगार और न्‍याय की गारंटी देता है.

-जब बहुजन समाज के पढ़े लिखे लोग सदन में जाएंगे, वहां बहुजनों के लिए आवाज़ उठाएंगे, तभी यह आंदोलन सफल होगा.

-आज लोकतंत्र नहीं, बल्कि धनतंत्र है.

-हम आजाद समाज पार्टी के माध्‍यम से मेहनत करने वाले ईमानदार नौजवानों को हम लोग विधानसभा भेजने का काम करेंगे.

-क्‍योंकि अगर पैसेवाले गरीबों के बारे में सोचते तो मैं पूरे विश्‍वास से कहता हूं कि कोई भी आदमी इस देश में गरीब नहीं रहता.

-चार महीने बाकी हैं. जितनी मेहनत आपने आज की है, अगर अगले चार महीने में की, आपने गांव गांव जाकर बहुजन समाज में भाईचारा बनाने का काम किया, लोगों को जोड़ने का काम किया, आजाद समाज पार्टी की नीति, नियत, उद्देश्‍य बताने का काम किया, माता बहनों को सचेत करने का काम किया तो मैं विश्‍वास से कहता हूं कि आपके सामने कोई टिक नहीं पाएगा.

-प्रदेश परिवर्तन मांग रहा है और उस प्रदेश की कुर्सी पर आपका भाई, आपका लाल बैठेगा.

-सिंघु बॉर्डर पर भाई लखबीर सिंह की हत्‍या हुई. सारे नेता चुप. वो इसलिए क्‍योंकि उनका वोट बैंक ना बिगड़ जाए. कोई बोलने को राजी नहीं है. लेकिन आपका भाई वहां गया और उस परिवार को न्‍याय दिलाने का विश्‍वास दिलाया.

-बहनों की सुरक्षा के लिए भीम आर्मी से ज्‍यादा कोई नहीं, जो बहनों के सम्‍मान के लिए लड़ता हो.

-जो बहुजन समाज के लोग पुलिस सेवा में हैं, वो हमेशा ये प्रयास करते हैं जो गरीब, परेशान पीडि़त उनके पास आ गया, उसे न्‍याय दिला दें, लेकिन सरकार मैं बैठे हुए लोग उनके हाथ बांध देते हैं. वो उनको कुछ करने नहीं देते.

-हम सरकार में आएंगे तो सबसे पहले अलग विकलांग आयोग बनाएंगे. हर विकलांग को पंचायत में आरक्षण की व्‍यवस्‍था कराकर देंगे. उनको भी मुख्‍य धारा में जोड़ेंगे.

(Uttar Pradesh Assembly Election 2022)

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Dalit Lakhbir Singh Murder case CBI inquiry demands by Chandrashekhar Azad from Punjab CM

चंद्रशेखर आजाद की पंजाब CM से मांग, दलित लखबीर की हत्‍या की CBI जांच हो, परिवार को 1 करोड़ की मदद दी जाए

नई दिल्‍ली : सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन (Kisan Andolan) के बीच दलित मजदूर लखबीर सिंह (Dalit Lakhbir Singh) की निहंगों द्वारा की गई निर्मम हत्‍या के मामले में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने सीबीआई जांच (CBI Inquiry) की मांग उठाई है. भीम आर्मी (Bhim Army) के मुखिया और आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने इस बाबत पंजाब के मुख्‍यमंत्री चरणजीत सिंह चन्‍नी (Charanjit Singh Channi) को पत्र लिखा है और कहा है कि मामले में निष्‍पक्ष न्‍याय के लिए इसकी सीबीआई से जांच कराई जाए. इसके साथ ही पीडि़त परिवार को एक करोड़ का मुआवजा देने तथा उन्‍हें पुलिस प्रोटेक्‍शन दिए जाने की मांग की गई है.

सोमवार को पंजाब के तरणतारण जिला स्थित मृतक दलित लखबीर सिंह (Dalit Lakhbir Singh) के गांव पहुंचे चंद्रशेखर आजाद ने यहां लखबीर सिंह के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की. यहां काफी देर रहकर उन्‍होंने परिवार का दुख-दर्द सुना. साथ ही उनकी हरसंभव मदद करने का आश्‍वासन भी दिया. चंद्रशेखर आजाद ने गांववालों से भी बातचीत की, जिसके बाद उन्‍होंने पंजाब के सीएम चरणजीत चन्‍नी को पत्र लिखकर पीडि़त परिवार के लिए न्‍याय की मांग उठाई.

मिशन आंबेडकर सिंघु बॉर्डर पर दलित लखबीर की हत्‍या केस को लेकर UN मानवाधिकार उच्‍चायुक्‍त ऑफिस तक पहुंचा

उन्‍होंने पत्र में लिखा, बीते 14-15 अक्‍टूबर को सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर किसान आंदोलन (Kisan Andolan) के मंच के पास आपके राज्‍य के दलित मजदूर लखबीर सिंह की हत्‍या कर दी गई थी. उस पर आरोप लगाया जा रहा है कि उसने धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की थी. लखबीर के गांववालों और परिवारवालों से मुलाकात के बाद जो तथ्‍य सामने आए हैं, उससे इस मामले में संदेह पैदा हो रहा है. परिवार का साफ कहना है कि लखबीर ऐसा नहीं कर सकता. उन्‍होंने पत्र में आगे लिखा, मेरा तो ये भी मानना है कि अगर ये आरोप सही भी मान लिए जाएं तो किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है. ऐसे मामलों से निपटने के लिए देश में कानून है, कोर्ट है. अब स्थिति ये है कि परिवार लगातार अपमान झेल रहा है और साथ ही वे लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

 

उन्‍होंने पत्र में पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्‍नी (Punjab CM Charanjit Singh Channi) से आगे कहा कि लिहाजा, इस मामले की निष्‍पक्ष जांच के लिए केंद्र सरकार को लिखें. पीडि़त परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. इसके साथ ही परिवार की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी आपकी पुलिस ले और जरूरी हो तो परिवार को चंडीगढ़ में फ्लैट देकर शिफ्ट किया जाए.

वहीं, इस मामले को लेकर आजाद समाज पार्टी के प्रवक्‍ता सूरज कुमार बौद्ध (Suraj Kumar Bauddh) का कहना है कि अब हम इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पत्र लिखेंगे. इस घटना का लेकर ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार को एक्‍शन लेना चाहिए, क्‍योंकि राज्‍य सरकार इस मामले में फेल साबित हो रही है. निहंगों ने इसे एक धार्मिक मसला बना दिया है, इसलिए कोई भी परिवार के साथ खड़ा नहीं हो रहा है. बीजेपी और कांग्रेस आगामी चुनाव के चलते कुछ करना नहीं चाह रही है और धार्मिक रंग होने के चलते शिअद इसमें कुछ करेगी नहीं. हम यह भी देख रहे हैं कि परिवार की आर्थिक मदद भी कैसे की जाए.

Lakhimpur Kheri Violence My hair was pulled slapped and abused Savitri Bai Phule alleged

Lakhimpur Kheri Violence: ‘मेरे बाल खींचे, थप्‍पड़ मारे गए, दरोगा गाली देकर कहता रहा- बहुत संविधान-संविधान करती हो’: सावित्री बाई फुले ने बताई आपबीती

नई दिल्‍ली : लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा (Lakhimpur Kheri Violence) को लेकर उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं और योगी सरकार की जमकर आलोचना हो रही है. साथ घटनास्‍थल पर पहुंचने की कोशिश कर रहे नेताओं के साथ पुलिस-प्रशासन का बर्ताव भी सरकार को घेरे में डाल रहा है. न केवल विपक्षी दल, बल्कि आम लोग भी इसे सरकार का गलत नजरिया बता रहे हैं. कांग्रेस (Congress) महासचिव प्र‍ियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) को सीतापुर में नजरबंद रखे जाने, भीम आर्मी (Bhim Army Chief) चीफ चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) को रास्‍ते में रोके जाने और गलत पुलिस‍िया बर्ताव सरीखे मामलों के बीच पूर्व बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले (Savitri Bai Phule) को हिरासत में लेते वक्‍त उनके उनके साथ अभद्रता का वीडियो सामने आ रहा है. लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) जा रहीं दलित महिला नेता (Dalit Woman Leader) को पुलिसकर्मियों ने बालों से खींचकर, धक्‍का देकर गाड़ी में बिठाया.

सावित्री बाई फुले के साथ पुलिस की इस अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह यूपी पुलिस (UP Police) की महिला पुलिसकर्मी पूर्व बीजेपी सांसद सावित्री बाई फुले को घसीटते हुए ला रही हैं और उनके विरोध जताने पर उनके साथ बेहद बुरा व्‍यवहार किया गया. उनके बाल पकड़कर खीचें गए. उन्‍हें जबरन धक्‍का मारते हुए पुलिस की गाड़ी में बिठाया गया. यूपी पुलिस ने उन्‍हें कई घंटों तक हिरासत में रखा, फि‍र बाद में छोड़ा गया.

Lakhimpur Kheri हिंसा के बीच किसकी आजादी का जश्‍न मना रहे हैं? पीएम नरेंद्र मोदी से चंद्रशेखर आजाद का सवाल

बता दें कि भाजपा के टिकट से जीतकर बहराइच की सांसद बनीं सावित्री बाई फुले (Savitri Bai Phule) ने पार्टी में रहते हुए ही बगावत कर दी थी. 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा (BJP) पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी. हालांकि बाद में वह कांग्रेस से जुड़ीं, लेकिन पूर्व सांसद ने कांग्रेस का हाथ यह कहकर झटक दिया कि यह पार्टी भी भाजपा की तरह अनुसूचित जाति की विरोधी विचारधारा वाली है.

सावित्री बाई फुले ने एक वेबसाइट को बातचीत में बताया कि लखीमपुर खीरी में जिन किसानों की मौत हुई है, उनमें से एक उनका परिचित था, जिसे मिट्टी देने के लिए वो उनके घर जा रही थीं. उन्होंने कहा कि,”मेरे साथ बहुत बदतमीजी की गई. हम केवल 3 लोग ही गाड़ी में थे. पुलिस ने हमसे कहा कि आप वहां नहीं जा सकते. इसके बाद हमारे चाचा जी को डंडा मार दिया गया और जब मैंने इसका विरोध किया तो महिला पुलिस को बुलाया गया और मेरे साथ अभद्रता की गई. मुझे थप्पड़ मारे गए, मेरे बाल खींचे गए और गाड़ी में भी बहुत कुछ बदतमीजी की. उन्‍होंने कहा कि सिर्फ पुलिस का कानून चलेगा, संविधान-संविधान चिल्लाती रहती हो. अनुभव प्रताप सिंह, जो दरोगा था उसने मुझे गालियां दीं. मुझे पीठ और जांघ में चोट लगी है.”

फुले का आरोप है कि दरोगा अनुभव प्रताप सिंह ने उन्‍हें लगातार गालियां दी और कई राउंड घुमाता रहा. उन्‍होंने कहा कि ‘कई घंटे बाद एक थाने में मुझे नजरबंद कर दिया गया. शाम 6 बजे मेरी कोरोना जांच कराई गई और इसके बाद मैं जमानत लेकर बाहर आ सकी. मैं विधायक और सांसद रह चुकी हूं. मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है.

बीजेपी की ही पूर्व नेता और एक दलित महिला नेता के साथ इस तरह का व्‍यवहार होने पर यूपी पुलिस और योगी सरकार सरकार की खूब आलोचना हो रही है. खुद कांग्रेस (Congress) नेता प्रियंका गांधी ने भी सावित्री बाई फुले का वीडियो ट्वीट किया और उनके साथ हुए इस व्यवहार की निंदा करते हुए लिखा, सावित्री बाई फुले तुम्हारे साथ इस तरह का व्यवहार देखकर दुख हुआ. लड़ती रहो, डटी रहो.

 

उधर, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने भी Savitri Bai Phule के साथ हुई इस अमानवीयता की जमकर आलोचना करते हुए लिखा, ‘ये योगी के रामराज्य की एक झांकी है. संविधान राज खत्म करके मनुस्मृति राज लाने की संघी रणनीति पर काम चालू है. एक पूर्व महिला सांसद के साथ ऐसा बर्ताब क्रूर शासक के जंगलराज में ही संभव है. योगी जी, क्या वास्तव में UP में लोकतंत्र बचा है?’

 

Lakhimpur Kheri Violence Chandrashekhar Azad question to Narendra Modi Whose Freedom Are You Celebrating

Lakhimpur Kheri हिंसा के बीच किसकी आजादी का जश्‍न मना रहे हैं? पीएम नरेंद्र मोदी से चंद्रशेखर आजाद का सवाल

नई दिल्‍ली : उत्‍तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri Violence) में किसानों के साथ हुई बर्बरता के बीच लखनऊ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के आजादी का अमृत महोत्‍सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) मनाने को लेकर भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने गंभीर सवाल उठाए. चंद्रशेखर आजाद ने प्रधानमंत्री से कई सवाल पूछते हुए कहा कि ‘क्‍या देश के प्रधानमंत्री शहीद किसान परिवारों के सामने बैठकर, आंख में आंख मिलाकर, कोई जवाब दे पाएंगे कि उनको न्‍याय कब मिल पाएगा. आरोपियों की गिरफ्तारी कब होगी?’ साथ ही उन्‍होंने पीएम से किसान विरोधी तीनों कानूनों को समाप्‍त करने की मांग भी की.

चंद्रशेखर आजाद ने मंगलवार को ट्विटर पर वीडियो जारी किया, जिसमें उन्‍होंने कहा कि ‘जय भीम, हम आज दिल्‍ली में हैं, क्‍योंकि उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में देश के प्रधानमंत्री को आजादी का अमृत महोत्‍सव मनाना है.’

उन्‍होंने कहा कि ‘लेकिन मैं देश के प्रधानमंत्री से पूछना चाहता हूं कि उत्‍तर प्रदेश में तो किसानों की चिताएं जल रही हैं. किसानों के घरों में मातम है. शहीद किसानों के परिवार चीख रहे हैं. उत्‍तर प्रदेश में ना तो किसान, ना महिलाएं, ना नौजवान, ना व्‍यापारी और ना ही विपक्ष आजाद है. तो आप किसकी आजादी का जश्‍न मना रहे हैं?’

उन्‍होंने पीएम नरेंद्र मोदी से सवाल पूछते हुए कहा कि लखनऊ से कुछ ही दूर पर लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) है. क्‍या देश के प्रधानमंत्री शहीद किसान परिवारों के सामने बैठकर, आंख में आंख मिलाकर, कोई जवाब दे पाएंगे कि उनको न्‍याय कब मिल पाएगा. आरोपियों की गिरफ्तारी कब होगी?

आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे लगता है कि ‘ये जश्‍न देश की आजादी का नहीं, भारतीय जनता पार्टी की आजादी का है कि उनके नेता, मंत्री किसानों की हत्‍या करेंगे और आरोपी आजाद रहेंगे. किसानों और विपक्ष को बंधक बनाया जाएगा. प्रधानमंत्री जी, जनता आपको माफ नहीं करेगी. आप किसान विरोधी तीनों कानूनों को समाप्‍त कीजिए’.

इससे पहले चंद्रशेखर लखीमपुर में घटनास्‍थल पर पहुंचे थे, जहां मृत किसानों के पार्थिव शरीर रखे हुए थे. उन्‍होंने वहां किसानों के परिवारों से मिलकर उन्‍हें सांत्‍वना दी. साथ ही उन्‍होंने कहा कि देश के अन्नदाताओं की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी. शहीद किसानों को नम आंखों से नमन. इतिहास गवाह है कि शहादतें क्रांति को जन्म देती हैं. तानाशाही भाजपा सरकार का अंहकार भी जल्द ही टूटेगा. किसान मजदूर एकता जिंदाबाद.

चंद्रशेखर आजाद ने लखीमपुर घटना को लेकर कहा था पूरा देश देख रहा है कि जिसने जलियावाला बाग नहीं देखा है वो आज देख रहा है. उत्तर प्रदेश में जो गुंडाराज है उसका जीता जागता उदाहरण लखीमपुर खीरी कांड है. यह सरकार किसानों के आंदोलन को नहीं कुचल पाई तो किसानों को कुचलने लगी है. जो हुआ वह बहुत डरावना है. देश की जनता किसानों के साथ है. मैं किसानों से मिले बगैर, जो आज हमारे बीच में नहीं है उनकी तकलीफ को सुने बिना और जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती हैं तब तक मैं नहीं जाऊंगा यहां से. पुलिस हमें चाहे जहां ले जाए, जब तक हम किसानों से नहीं मिल लेते और जो लोग दोषी हैं उनके खिलाफ कार्यवाई नहीं होती तब तक नहीं जाएंगे.उत्तर प्रदेश पुलिस जो जांच कर रही है वह कौन सी पुलिस है? गोरखपुर वाली पुलिस है या हाथरस वाली, जो आरोपी को बचा देती है और पीड़ितों को दोषी बना देती है.