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After cricketer Yuvraj Singh now actress Yuvika Chaudhary arrested released on interim bail

SC समाज पर अपमानजनक टिप्‍पणी करने वाली अभिनेत्री युविका चौधरी भी गिरफ्तार

नई दिल्‍ली : अनुसूचित जाति समाज के प्रति अपमानजनक टिप्‍पणी करने को लेकर क्रिकेटर युवराज सिंह (Cricketer Yuvraj Singh) के बाद आज बॉलीवुड अभिनेत्री तथा बिग बॉस में काम कर चुकी युविका चौधरी (Yuvika Chaudhary) को भी हांसी पुलिस ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया. करीब 3 घंटे की पूछताछ के बाद हुई औपचारिक गिरफ्तारी के बाद युविका को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया. इस दौरान युविका चौधरी के साथ करीबन 10 बाउंसर और उसके पति प्रिंस नरूला (Prince Narula) तथा उसके अधिवक्ता भी मौजूद थे.

दरअसल, युविका चौधरी ने बीते 25 मई को अपने ब्लॉग पर एक वीडियो में अनुसूचित जाति समाज के लिए अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद दलित अधिकार कार्यकर्ता एवं वकील रजत कलसन ने थाना शहर हांसी में उक्त अभिनेत्री के खिलाफ अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया था. इस केस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिेनेत्री को जांच में शामिल होने के आदेश दिए थे.

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इसके बाद आज युविका चौधरी (Yuvika Chaudhary) ने हांसी पुलिस (Hansi Police) के समक्ष समर्पण कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उनसे डीएसपी कार्यालय हांसी में बिठाकर करीब 3 घंटे पूछताछ की. जिसके बाद पुलिस ने उन्‍हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर बाद में अंतरिम जमानत के आधार पर छोड़ दिया.

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रजत कलसन ने बताया कि अब वह इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. उनकी ओर से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की जाएगी, क्‍योंकि एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) में अंतरिम जमानत का प्रावधान नहीं है. यह आदेश गलत है और इससे समाज में एक्‍ट को लेकर गलत संदेश जाएगा. उन्‍होंने कहा कि हम युवराज के साथ उनकी भी अंतरिम जमानत कैंसिल कवारकर उन्‍हें जेल भिजवाएंगे.

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बता दें कि शिकायतकर्ता रजत कलसन की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद उक्त अभिनेत्री ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को खारिज कराने के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया था. इसके बाद उक्त अभिनेत्री ने हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे 11 अक्टूबर को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया था. इसके बाद हाईकोर्ट ने उक्त अभिनेत्री को राहत देते हुए उसे अंतरिम जमानत दे दी थी तथा जांच में शामिल होने के आदेश दिए थे.

अब पुलिस युविका चौधरी के खिलाफ हिसार की विशेष अदालत में चालान पेश करेगी, जहां पर उन्‍हें नियमित जमानत करानी पड़ेगी. अगर उक्त अदालत में युविका चौधरी के खिलाफ आरोप साबित हुए और उसे 5 साल तक की सजा भी हो सकती है.

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शिकायतकर्ता रजत कलसन ने युवराज सिंह के खिलाफ भी एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था, जिसमें युवराज सिंह ने 16 अक्टूबर को पुलिस के सामने समर्पण किया था तथा पुलिस ने उन्‍हें औपचारिक गिरफ्तार कर पूछताछ करने के बाद अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया था. इसी तरह की अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में तारक मेहता का उल्टा चश्मा की अभिनेत्री मुनमुन दत्ता के खिलाफ हांसी थाना शहर में मुकदमा दर्ज है तथा उन पर भी पुलिसिया कार्रवाई बाकी है.

गौरतलब है कि अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज मामले में हरियाणा की हांसी पुलिस (Hansi Police) द्वारा शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह (Cricketer Yuvraj Singh) को औपचारिक गिरफ्तार करने के तुरंत बाद अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया था. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर युवराज सिंह कल हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां दो से तीन घंटे की पूछताछ एवं औपचारिक गिरफ्तारी के बाद उन्‍हें अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया था. शिकायतकर्ता वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता रजत कलसन ने पुलिस की कार्रवाई पर अंसुष्टि जताते हुए कहा कि Hansi Police ने नियमों के अनुसार इस एक्‍शन से उन्‍हें अवगत नहीं कराया. साथ ही उन्‍होंने पुलिस पर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) को वीआईपी ट्रिटमेंट दिए जाने का आरोप भी लगाया. साथ ही जल्‍द सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अंतरिम जमानत के आदेश को चुनौती दी जाएगी.

युवराज सिंह के खिलाफ करीब 8 महीने बाद हरियाणा पुलिस ने SC/ST Act में दर्ज की एफआईआर

इस मामले में युवराज सिंह की तरफ से अपने बचाव में दी गई दलीलों से असंतुष्‍ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रिकेट युवराज सिंह को पुलिस के समक्ष सरेंडर करने और जांच में सहयोग देने के आदेश दिए थे. इसके बाद बीते शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां से हांसी पुलिस उन्‍हें हिसार के गजेडिट ऑफि‍सर्स जियो मैस ले गई. यहां युवरात से करीब दो से तीन घंटे से पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्‍हें औपचारिक रूप से अरेस्‍ट कर लिया गया और अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया.

रजत कलसन ने आरोप लगाया कि इस पूरी कार्रवाई के सख्‍त होने की बजाय पुलिस ने युवराज को वीआईपी ट्रिटमेंट दिया. यहां तक की पुलिसवालों ने उनके साथ फोटो तक खिंचवाए. उन्‍होंने कहा कि नियमानुसार पुलिस ने उन्‍हें कार्रवाई से अवगत तक नहीं कराया.

जातिगत टिप्‍पणी मामला: युवराज सिंह नहीं कर रहे जांच में सहयोग, सरकारी वकील ने हाईकोर्ट को बताया

उन्‍होंने बताया कि अब वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. उनकी ओर से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की जाएगी, क्‍योंकि एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) में अंतरिम जमानत का प्रावधान नहीं है. यह आदेश गलत है और इससे समाज में एक्‍ट को लेकर गलत संदेश जाएगा. उन्‍होंने कहा कि हम इस उनकी अंतरिम जमानत को कैंसिल कवारकर जेल भिजवाएंगे.

बता दें कि युवराज पर आरोप है कि उन्होंने बीते साल रोहित शर्मा से लाइव चैट के दौरान युजवेंद्र चहल पर अनुसूचित जाति के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ दलित अधिकार कार्यकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में SC-ST एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए युवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर हाईकोर्ट ने युवराज के खिलाफ पुलिस की उत्पीड़न कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. अभी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है.

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युवराज सिंह को गिरफ्तारी के तुरंत बाद मिली अंतरिम जमानत, अब सुप्रीम कोर्ट जाएगा मामला

नई दिल्‍ली : अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज मामले में हरियाणा की हांसी पुलिस (Hansi Police) द्वारा शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह (Cricketer Yuvraj Singh) को औपचारिक गिरफ्तार करने के तुरंत बाद अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर युवराज सिंह कल हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां दो से तीन घंटे की पूछताछ एवं औपचारिक गिरफ्तारी के बाद उन्‍हें अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया. शिकायतकर्ता वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता रजत कलसन ने पुलिस की कार्रवाई पर अंसुष्टि जताते हुए कहा कि Hansi Police ने नियमों के अनुसार इस एक्‍शन से उन्‍हें अवगत नहीं कराया. साथ ही उन्‍होंने पुलिस पर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) को वीआईपी ट्रिटमेंट दिए जाने का आरोप भी लगाया. साथ ही जल्‍द सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अंतरिम जमानत के आदेश को चुनौती दी जाएगी.

युवराज सिंह के खिलाफ करीब 8 महीने बाद हरियाणा पुलिस ने SC/ST Act में दर्ज की एफआईआर

रजत कलसन ने न्‍यूज़18 हिंदी (डिजिटल) को बताया कि इस मामले में युवराज सिंह की तरफ से अपने बचाव में दी गई दलीलों से असंतुष्‍ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रिकेट युवराज सिंह को पुलिस के समक्ष सरेंडर करने और जांच में सहयोग देने के आदेश दिए थे. इसके बाद बीते शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां से हांसी पुलिस उन्‍हें हिसार के गजेडिट ऑफि‍सर्स जियो मैस ले गई. यहां युवरात से करीब दो से तीन घंटे से पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्‍हें औपचारिक रूप से अरेस्‍ट कर लिया गया और अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया.

रजत कलसन ने आरोप लगाया कि इस पूरी कार्रवाई के सख्‍त होने की बजाय पुलिस ने युवराज को वीआईपी ट्रिटमेंट दिया. यहां तक की पुलिसवालों ने उनके साथ फोटो तक खिंचवाए. उन्‍होंने कहा कि नियमानुसार पुलिस ने उन्‍हें कार्रवाई से अवगत तक नहीं कराया.

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बता दें कि युवराज पर आरोप है कि उन्होंने बीते साल रोहित शर्मा से लाइव चैट के दौरान युजवेंद्र चहल पर अनुसूचित जाति के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ दलित अधिकार कार्यकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में SC-ST एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए युवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर हाईकोर्ट ने युवराज के खिलाफ पुलिस की उत्पीड़न कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. अभी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है.

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13 year old Dalit girl from West Delhi rape murderd in Gurugram landlord kin arrested

दिल्‍ली कैंट के बाद एक और दलित बच्‍ची से रेप व हत्‍या, घरवालों पर अंतिम संस्‍कार का दबाव डाला

नई दिल्ली. पहले हाथरस (Hathras Gang Rape-Murders Case), फ‍िर दिल्‍ली कैंट (Delhi Cantt Dalit Girl Gang Rape and Murder Case) और अब पश्चिमी दिल्‍ली/गुड़गांव. दलित बेटियों (Dalit Daughters) के साथ नाइंसाफी नहीं रूक रही हैं. दिल्‍ली कैंट का मामला अभी शांत भी नहीं पड़ा था कि पश्चिमी दिल्ली (West Delhi) में रहने वाली एक 13 वर्षीय दलित लड़की (Dalit Girl) के साथ उसके मकान मालिक के एक रिश्तेदार द्वारा गुड़गांव (Gurugram) में कथित रेप एवं हत्‍या करने का मामला सामने आया है. केवल यही नहीं, यहां भी दलित बच्‍ची के गरीब पिता पर लड़की के अंतिम संस्कार का दबाव डाला गया था. यह जानकारी पीड़िता के माता-पिता और पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी से प्राप्त हुई है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी के विरुद्ध गुड़गांव (Gurugram) में आईपीसी की विभिन्‍न धाराओं, POCSO Act और एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार, पीड़िता के दिहाड़ी मजदूर पिता ने कहा कि उसने पिछले महीने मकान मालिक के कहने पर अपनी बेटी को आरोपी प्रवीण के गुड़गांव (Gurugram) स्थित घर पर काम करने को भेजा था. मृतका दलित बच्‍ची के पिता के अनुसार, आरोपी ने दावा किया कि लड़की की बीमारी के कारण मृत्यु हुई और उनपर लड़की के अंतिम संस्कार का दबाव भी डाला गया था. पड़ोसियों के हस्तक्षेप करने के बाद उनकी सलाह पर बच्‍ची के पिता ने पुलिस को कॉल की. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी बच्ची के चेहरे और प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें होने की बात सामने आई. रिपोर्ट में रेप की भी पुष्टि हुई. पुलिस मामले में मकान मालिक एवं उसकी पत्नी की कथित संलिप्तता की जांच कर रही है.

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अखबार से बात करते हुए पीड़ित के पिता, जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं, ने कहा कि पिछले महीने मकान मालिक के कहने पर जो “परिवार की तरह था”, उसने अपनी बेटी को गिरफ्तार आरोपी प्रवीण के साथ गुड़गांव स्थित उसके घर में काम करने की इजाजत दी थी.

पिता की ओर से दर्ज एफआईआर के अनुसार, उसकी मकान मालकिन ने उससे कहा था कि उसके भाई की एक छोटी बेटी है और अगर वह अपनी बेटी को उसके घर भेज देता है तो इस बच्‍ची के साथ खेल सकती है और कुछ समय के लिए परिवार के साथ रह सकती है. इसके बाद मकान मालिकन उसे 17 जुलाई को ले गई थी.

उन्होंने कहा कि 23 अगस्त की दोपहर करीब 3 बजे उन्हें मकान मालिक का फोन आया और उन्‍हें बताया गया कि कि उनकी बेटी की मौत फूड प्वाइजनिंग से हुई है. करीब 4 घंटे के बाद आरोपी प्रवीण, मकान मालिकन और दो अन्य लोग लड़की के शव को एक निजी एम्बुलेंस के जरिये दिल्ली लेकर आ गए.

त्रिलोकपुरी में दलित बच्‍ची से रेप मामले की सभी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…

प्राथमिकी में कहा गया है कि लड़की के पिता को अपनी बेटी का अंतिम संस्कार करने के लिए कहा गया था. बच्‍ची के पिता ने अखबार से कहा कि ‘उनके पास लकड़ी और पूजा का सामान था और वे उसका दाह संस्कार करने के लिए तैयार थे. हम अनजान थे… हमारे पड़ोसियों ने दाह संस्कार रोक दिया. उन्होंने हमें मेरी बेटी के शरीर की जांच करने के लिए कहा. जब हमने बच्‍ची के शव को देखा तो दंग रह गए. उसके चेहरे और पीठ पर चोट के निशान थे. हमें कतई नहीं पता था कि वे उसे मार डालेंगे. हम डर गए और पुलिस को फोन किया’.

बाबू जगजीवन राम अस्पताल के डॉक्टरों ने भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा है कि लड़की की मौत मैनुअली दम घोंटने के कारण हुई है. रिपोर्ट में योनि और गुदा यौन उत्पीड़न के सकारात्मक सबूत होने की बात भी कही गई है और सभी जख्म मरने से पहले के हैं.

बच्‍ची (Dalit Girl) की मां जो घरों में साफ-सफाई का काम करती हैं, ने कहा कि, “मकान मालिक और उसकी पत्नी ने हमसे झूठ बोला. हमने उनका सम्मान किया और उन्होंने मेरी बेटी को मार डाला. मैं चाहती हूं कि उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए. रक्षा बंधन पर मैंने उन्हें फोन किया और मुझे पता देने के लिए विनती की ताकि मैं अपनी बेटी को देख सकूं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. काश, मुझे पता होता कि वे मेरी बेटी के साथ क्या कर रहे हैं”.

मूलरूप से बिहार के रहने वाली मृतक Dalit Girl अपने तीन छोटे भाई-बहनों और माता-पिता के साथ यहां किराए के मकान में रहती थी.

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, हमने परिवार द्वारा की गई पीसीआर कॉल और पोस्टमॉर्टम के सभी विवरण गुड़गांव पुलिस को भेज दिए. यह पाया गया कि गुड़गांव (Gurugram) में लड़की का यौन उत्पीड़न किया गया और उसके शव को दिल्ली लाया गया.

गुड़गांव के एसीपी (वेस्ट) राजिंदर ने कहा कि, “माता-पिता की शिकायत पर हमने प्रवीण और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है. बच्ची के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए दिल्ली के एक अस्पताल भेज दिया गया. हमें उनसे एक रिपोर्ट मिली, जिसमें कहा गया था कि लड़की का यौन उत्पीड़न किया गया था. हमने अब बलात्कार की धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है. प्रवीण को गिरफ्तार कर लिया गया है.”

शुरुआत में 25 अगस्त को गुड़गांव (Gurugram) में इस बाबत हत्या और आपराधिक साजिश की धाराओं, एससी/एसटी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

Delhi Cantt Dalit Girl rape Murder case Delhi Police files 400 page chargesheet IPC SC ST Act POCSO

Delhi Cantt दलित बच्‍ची से गैंगरेप, हत्‍या केस: क्या कहती है दिल्‍ली पुलिस की चार्जशीट? पढ़ें पूरी जानकारी

नई दिल्‍ली : दिल्ली कैंट (Delhi Cantt) के पुरानी नांगल गांव (Old Nangal Viilage) में 9 साल की दलित बच्‍ची के साथ हुए कथित गैंगरेप, हत्‍या (9 year Old Dalit Girl Gang Rape and Murder Case) और बिना रजामंदी शव को जलाने के मामले में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने शनिवार को चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी. 400 पन्नों की इस चार्जशीट में दिल्‍ली पुलिस ने इन चारों आरोपियों पर IPC की विभिन्न धाराएं, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) और अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत आरोप लगाए हैं.

31 अगस्‍त को कोर्ट लेगी चार्जशीट पर संज्ञान
यह आरोप पत्र ड्यूटी मजिस्‍ट्रेट मनु श्री के समक्ष दायर की गई, जिस पर संबंधित अदालत में विचार के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की गई है. मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा की जाएगी.

आरोप पत्र में SIT की रिपोर्ट भी शामिल
इस अंतिम रिपोर्ट में विशेष जांच दल की एक रिपोर्ट भी शामिल की गई है, जिसे अपराध शाखा द्वारा त्वरित और पेशेवर जांच के लिए गठित किया गया था.

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) को मामला दर्ज कर 30 दिनों के भीतर त्वरित जांच करने और चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया था. दिल्ली छावनी क्षेत्र के पुरानी नांगल गांव में नौ वर्षीय दलित पीड़िता (9 year Old Dalit Girl Rape) के साथ कथित रूप से सामूहिक बलात्कार, हत्या और जबरन अंतिम संस्कार करने के एक दिन बाद 2 अगस्त को मामला दर्ज किया गया था.

क्या कहती है दिल्‍ली पुसिल की चार्जशीट?
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (Delhi Police Crime Branch) द्वारा दायर 400 पन्नों की रिपोर्ट में श्मशान घाट के पुजारी 55 वर्षीय राधेश्याम और अन्य कर्मचारियों -कुलदीप सिंह, सलीम अहमद और लक्ष्मी नारायण को आरोपी बनाया गया है. चार्जशीट में दावा किया गया है कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं.

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चार्जशीट में इन धाराओं के तहत लगाए गए आरोप
आरोपियों पर IPC की धारा 302 (हत्या), 304 (गैर इरादतन हत्या), 376 डी (सामूहिक बलात्कार), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 506 (आपराधिक धमकी), 201 (सबूत नष्ट करना) और 34 (एक इरादे से किया गया अपराध) के तहत आरोप लगाए गए हैं.

चारों के खिलाफ पोक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 6 (एग्रेटेड पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट) और एससी/एसटी एक्ट (SC/ST ACT) की धारा 3 (अत्याचार के अपराध) के तहत भी चार्जशीट दाखिल की गई है.

दिल्ली पुलिस की जांच
दिल्ली पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करने से पहले गवाहों की गवाही दर्ज करने के अलावा वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए.

रोहिणी की फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के साथ-साथ जीव विज्ञान और ओडोन्टोलॉजी पर दिल्ली पुलिस के फोरेंसिक विशेषज्ञों से सहायता ली गई. दिल्ली पुलिस ने कहा कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान फोरेंसिक मनोवैज्ञानिक भी साथ रहे. कथित जबरन दाह संस्कार के परिणामस्वरूप पोस्टमार्टम करने में बाधाओं के कारण साक्ष्य एकत्र करने के इन वैकल्पिक तरीकों को नियोजित करना पड़ा. चारों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

त्रिलोकपुरी में दलित बच्‍ची से रेप मामले की सभी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…