SC/ST ACT

Dalit Atrocities Odhisha Kendrapara Dalit rubbed in spit donation was not given for templeDalit Atrocities Odhisha Kendrapara Dalit rubbed in spit donation was not given for temple

Dalit Atrocities : दलित को थूक में रगड़वाई नाक, मंदिर के लिए नहीं दिया था चंदा…

नई दिल्‍ली/केंद्रपाड़ा : (Dalit Atrocities) ओडिशा (Odhisha) के केंद्रपाड़ा जिले (Kendrapara District) में एक 32 वर्षीय दलित (Dalit) व्यक्ति को अपने ही थूक पर नाक नगड़ने के लिए इसलिए मजबूर किया गया कि उसने गांव में बन रहे मंदिर के लिए चंदा देने से मना कर दिया था. इस घटना को लेकर दलित (Dalit) शख्स की पत्नी ने गांव के सरपंच के खिलाफ केस दर्ज कराया है. पुलिस का कहना है कि सरपंच और कुछ ग्रामीणों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3 (SC/ST Act Section 3) के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने कहा कि जांच की जा रही है और उसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी.

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यह घटना शनिवार शाम को घटी. मार्शघई थाना क्षेत्र के तिखीरी गांव में रहने वाला सरपंच चमेली ओझा मंदिर के लिए चंदा मांगने के लिए गुरुचरण मलिक के घर पर आया था. पुलिस का कहना है कि मलिक ने सरपंच को बताया क‍ि वह मंदिर के लिए पहले ही चंदा दे चुका है. इससे सरपंच नाराज हो गया और उसने उसे खरीखोटी सुनाई. सरपंच ने दलित और उसकी पत्नी रेखा को अपशब्द कहे.

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रेखा ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा कि इस घटना के बाद रविवार को गांव में पंचायत बुलाई गई, जिसमें सरपंच ने तुगलकी फरमान सुनाया कि दलित मलिक के परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा. वह इतने पर ही नहीं माना और उसने गुरुचरण को थूककर अपनी नाक उसी में रगड़ने को कहा.

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रेखा का आरोप है कि उसके पति को ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया. उसकी मजबूरी भी थी क्योंकि यह ग्राम समिति का आदेश था. वहीं सरपंच ने रेखा के आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि रेखा और उसका पति झूठ बोल रहा है, गांव में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है.

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SC ST Act Challan may be submit against Yuvraj Singh Munmun Dutta Yuvika Chaudhary by Hansi police in court soon

SC/ST Act : युवराज सिंह, एक्‍ट्रेस मुनमुन दत्‍ता और युविका चौधरी के खिलाफ हांसी पुलिस में जल्‍द पेश कर सकती है चालान

नई दिल्‍ली/हांसी : अनुसूचित जाति समुदाय के लिए अपमानजनक टिप्पणी (Derogatory remarks for Scheduled Caste Community) करने के मामले में फंसे पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) के अलावा तारक मेहता का उल्टा चश्मा की अभिनेत्री मुनमुन दत्ता (Munmun Dutta) उर्फ बबीता जी और अभिनेत्री युविका चौधरी (Actress Yuvika Chaudhary) की मुसीबत बढ़ सकती है. कहा जा रहा है कि हिसार की हांसी पुलिस (Hansi Police) तीनों के खिलाफ विशेष अदालत (एससी/एसटी एक्‍ट) में जल्‍द ही चालान पेश कर सकती है.

हांसी पुलिस के सूत्रों के अनुसार, इस मामले में हांसी पुलिस (Hansi Police) की तरफ से तीनों आरोपी सेलिब्रिटीज के खिलाफ जांच लगभग पूरी कर ली गई है. सूत्रों बताते हैं कि मामले में जांच अधिकारी की तरफ से एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) के मामले में तीनों आरोपी सेलिब्रिटीज के खिलाफ अगले दो से तीन दिन के भीतर हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत में अंतिम रिपोर्ट चालान प्रस्‍तुत की जा सकती है.

कानून के मुताबिक, जिस दिन हांसी पुलिस इनके खिलाफ हिसार की विशेष अदालत के जज के सामने चालान या फाइनल रिपोर्ट पेश करेगी, तब इन सेलेब्रिटीज को भी अदालत में पेश होकर रेगुलर बेल हासिल करनी पड़ेगी. इसके बाद इन तीनों के खिलाफ हिसार की विशेष अदालत में अलग-अलग ट्रायल शुरू हो जाएंगे.

बता दें कि पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को खारिज कराने के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की तथा मुनमुन दत्ता ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी, लेकिन हाईकोर्ट ने युवराज सिंह को एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर में राहत देने से इनकार कर दिया था. इसी तरह मुनमुन दत्ता को भी सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली थी. एफआईआर खारिज करने की उनकी याचिका भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने खारिज कर दी थी.

गौरतलब है कि पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने जून 2020 में तथा मुनमुन दत्ता व युविका चौधरी ने मई 2021 में अनुसूचित जाति के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद नेशनल अलायन्स फ़ॉर दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक रजत कल्सन (Advocate Rajat Kalsan) ने इनके खिलाफ हांसी के थाना शहर में अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए थे.

dalit woman raped man sentenced to life imprisonment for raping dalit woman

दलित महिला के साथ बलात्कार करने वाले को उम्रकैद की सजा

मुजफ्फरनगर : दिल्ली की एक दलित महिला के साथ 2014 में खतोली इलाके में बलात्कार (Dalit Woman Raped) करने और उसे ब्लैकमेल करने के मामले में एक व्यक्ति को अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अदालत (SC/ST Act Special Court) ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

विशेष अदालत के न्यायाधीश जमशेद अली ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत मंगलवार शाम रजत को मामले में दोषी ठहराया और उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

अभियोजन पक्ष के वकील यशपाल सिंह के अनुसार, रजत ने 22 दिसंबर 2014 को महिला को पेय पदार्थ में कुछ नशीली चीज़ मिलाकर देने के बाद उसके साथ बलात्कार किया था और घटना को रिकॉर्ड भी कर लिया था. रजत ने दलित महिला (Dalit Woman Raped) के पति को नौकरी देने के बहाने उसे दिल्ली से बुलाया था.

वकील ने बताया कि रजत और महिला का पति दिल्ली के शाहदरा इलाके की एक फैक्टरी में एक साथ काम करते थे. महिला के पति को नौकरी से निकाल दिया गया था.

महिला के पिता ने खतोली थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें इनकार कर दिया गया था. बाद में अदालत के निर्देश पर मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

Aurangabad refusing to sell house to Dalit person Owners staffers of housing project booked

हाउसिंग प्रोजेक्‍ट में दलित को घर बेचने से मना किया, Aurangabad पुलिस ने संगीन धाराओं में दर्ज की FIR

नई दिल्‍ली/मुंबई : महाराष्‍ट्र (Maharashtra) के औरंगाबाद (Aurangabad) में चिकलथाना पुलिस (CHIKALTHANA police) ने एक निर्माणाधीन प्राइवेट हाउसिंग प्रोजेक्‍ट साइट के मालिकों और कर्मचारियों के खिलाफ एक दलित परिवार (Dalit Family) को एक बंगला बेचने से कथित रूप से इनकार करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की है.

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प्राथमिकी के अनुसार, मामले में शिकायतकर्ता 39 वर्षीय महेंद्र गंडले (Mahendra Gandle) एक घर खरीदना चाहता था और उसके दोस्त ने इस आवास परियोजना का सुझाव दिया था. तदनुसार, गंडले 7 जनवरी को औरंगाबाद (Aurangabad) में उस स्थान पर गए, जहां उन्हें साइट पर कर्मचारी द्वारा एक नमूना घर दिखाया गया था. गंडले ने कहा कि जब उन्होंने घर खरीदने में रुचि दिखाई, तो कर्मचारी ने उनकी जाति (Caste) के बारे में पूछा और जब उन्होंने इसका खुलासा किया, तो कर्मचारी ने कहा कि परियोजना के मालिकों ने उन्हें किसी भी दलित व्यक्ति (Dalit Person) को संपत्ति नहीं बेचने के लिए कहा था. इसके बाद शिकायतकर्ता थाने पहुंचा जहां उसने शिकायत दर्ज कराई.

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इस संबंध में छह लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act, 1989) और धारा 4 (अस्पृश्यता के उपदेश और अभ्यास के लिए सजा) Section 4 (Punishment for the preaching and practice of Untouchability), धारा 6 (जो कोई भी “अस्पृश्यता” के आधार पर किसी भी सेवा को बेचने से इनकार करता है) Section 6 (whoever on the ground of “untouchability” refuses to sell any services) और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 के तहत 7(1-ए) (प्रतिशोध के रूप में अस्पृश्यता का अपराध) 7(1-A) (offence of untouchability as a revenge) under Protection of Civil Rights Act 1955 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

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