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Haryana

Dalit Lakhbir Singh killed at Singhu border booked for sacrilege

सिंघु बॉर्डर पर कत्‍ल किए गए Dalit Lakhbir Singh के हत्‍यारों ने उन पर बेअदबी का केस दर्ज कराया

नई दिल्‍ली : पंजाब के दलित मजदूर लखबीर सिंह (Dalit Lakhbir Singh), जिनकी बीते 15 अक्टूबर को दिल्ली के पास सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) स्थित किसान विरोध स्‍थल पर हत्या कर दी गई थी, पर हरियाणा पुलिस (Haryana Police) ने सर्वलोह ग्रंथ (Sarvloh Granth) का अनादर करने के लिए मामला दर्ज किया है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सोनीपत पुलिस (Sonipat Police) ने 17 अक्टूबर को हत्या के दो आरोपियों भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया.

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पंजाब के तरनतारन ( Tarn Taran) के एक गांव के रहने वाले लखबीर सिंह (Dalit Lakhbir Singh) दलित समुदाय (Dalit Community) से ताल्लुक रखते थे. 15 अक्टूबर को सुबह करीब 5 बजे निहंग सिखों ने उनकी हत्या कर दी थी. उनका क्षत-विक्षत शव हरियाणा के सोनीपत जिले के कुंडली में किसान विरोध स्थल के पास मिला था.

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निहंग सिखों (Nihang Sikhs) के एक समूह ने हमले की जिम्मेदारी ली और कहा कि उस व्यक्ति को कथित तौर पर ‘अपवित्रीकरण’ करने के लिए मारा था.

इंडिया टुडे से बात करते हुए, निर्वैर खालसा-उड़ना दल (Nirvair Khalsa-Udna Dal) के बलविंदर सिंह ने कहा कि वह आदमी कुछ दिन पहले उनके पास आया था. बलविंदर सिंह ने कहा, “उन्होंने हमारे शिविर में सेवा की और हमारा विश्वास जीता. प्रकाश प्रार्थना [लगभग 3 बजे] से पहले, उन्होंने पवित्र ग्रंथ को कवर करने के लिए कपड़ा हटा दिया और पोथी साहिब का अपमान किया.”

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हालांकि, लखबीर सिंह के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि उसकी हत्या के पीछे एक “साजिश” थी. उन्होंने कहा कि लखबीर सिंह कभी भी पवित्र ग्रंथों का अपमान नहीं कर सकते.

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After cricketer Yuvraj Singh now actress Yuvika Chaudhary arrested released on interim bail

SC समाज पर अपमानजनक टिप्‍पणी करने वाली अभिनेत्री युविका चौधरी भी गिरफ्तार

नई दिल्‍ली : अनुसूचित जाति समाज के प्रति अपमानजनक टिप्‍पणी करने को लेकर क्रिकेटर युवराज सिंह (Cricketer Yuvraj Singh) के बाद आज बॉलीवुड अभिनेत्री तथा बिग बॉस में काम कर चुकी युविका चौधरी (Yuvika Chaudhary) को भी हांसी पुलिस ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया. करीब 3 घंटे की पूछताछ के बाद हुई औपचारिक गिरफ्तारी के बाद युविका को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया. इस दौरान युविका चौधरी के साथ करीबन 10 बाउंसर और उसके पति प्रिंस नरूला (Prince Narula) तथा उसके अधिवक्ता भी मौजूद थे.

दरअसल, युविका चौधरी ने बीते 25 मई को अपने ब्लॉग पर एक वीडियो में अनुसूचित जाति समाज के लिए अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद दलित अधिकार कार्यकर्ता एवं वकील रजत कलसन ने थाना शहर हांसी में उक्त अभिनेत्री के खिलाफ अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया था. इस केस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिेनेत्री को जांच में शामिल होने के आदेश दिए थे.

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इसके बाद आज युविका चौधरी (Yuvika Chaudhary) ने हांसी पुलिस (Hansi Police) के समक्ष समर्पण कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उनसे डीएसपी कार्यालय हांसी में बिठाकर करीब 3 घंटे पूछताछ की. जिसके बाद पुलिस ने उन्‍हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर बाद में अंतरिम जमानत के आधार पर छोड़ दिया.

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रजत कलसन ने बताया कि अब वह इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. उनकी ओर से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की जाएगी, क्‍योंकि एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) में अंतरिम जमानत का प्रावधान नहीं है. यह आदेश गलत है और इससे समाज में एक्‍ट को लेकर गलत संदेश जाएगा. उन्‍होंने कहा कि हम युवराज के साथ उनकी भी अंतरिम जमानत कैंसिल कवारकर उन्‍हें जेल भिजवाएंगे.

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बता दें कि शिकायतकर्ता रजत कलसन की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद उक्त अभिनेत्री ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को खारिज कराने के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया था. इसके बाद उक्त अभिनेत्री ने हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे 11 अक्टूबर को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया था. इसके बाद हाईकोर्ट ने उक्त अभिनेत्री को राहत देते हुए उसे अंतरिम जमानत दे दी थी तथा जांच में शामिल होने के आदेश दिए थे.

अब पुलिस युविका चौधरी के खिलाफ हिसार की विशेष अदालत में चालान पेश करेगी, जहां पर उन्‍हें नियमित जमानत करानी पड़ेगी. अगर उक्त अदालत में युविका चौधरी के खिलाफ आरोप साबित हुए और उसे 5 साल तक की सजा भी हो सकती है.

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शिकायतकर्ता रजत कलसन ने युवराज सिंह के खिलाफ भी एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था, जिसमें युवराज सिंह ने 16 अक्टूबर को पुलिस के सामने समर्पण किया था तथा पुलिस ने उन्‍हें औपचारिक गिरफ्तार कर पूछताछ करने के बाद अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया था. इसी तरह की अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में तारक मेहता का उल्टा चश्मा की अभिनेत्री मुनमुन दत्ता के खिलाफ हांसी थाना शहर में मुकदमा दर्ज है तथा उन पर भी पुलिसिया कार्रवाई बाकी है.

गौरतलब है कि अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज मामले में हरियाणा की हांसी पुलिस (Hansi Police) द्वारा शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह (Cricketer Yuvraj Singh) को औपचारिक गिरफ्तार करने के तुरंत बाद अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया था. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर युवराज सिंह कल हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां दो से तीन घंटे की पूछताछ एवं औपचारिक गिरफ्तारी के बाद उन्‍हें अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया था. शिकायतकर्ता वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता रजत कलसन ने पुलिस की कार्रवाई पर अंसुष्टि जताते हुए कहा कि Hansi Police ने नियमों के अनुसार इस एक्‍शन से उन्‍हें अवगत नहीं कराया. साथ ही उन्‍होंने पुलिस पर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) को वीआईपी ट्रिटमेंट दिए जाने का आरोप भी लगाया. साथ ही जल्‍द सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अंतरिम जमानत के आदेश को चुनौती दी जाएगी.

युवराज सिंह के खिलाफ करीब 8 महीने बाद हरियाणा पुलिस ने SC/ST Act में दर्ज की एफआईआर

इस मामले में युवराज सिंह की तरफ से अपने बचाव में दी गई दलीलों से असंतुष्‍ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रिकेट युवराज सिंह को पुलिस के समक्ष सरेंडर करने और जांच में सहयोग देने के आदेश दिए थे. इसके बाद बीते शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां से हांसी पुलिस उन्‍हें हिसार के गजेडिट ऑफि‍सर्स जियो मैस ले गई. यहां युवरात से करीब दो से तीन घंटे से पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्‍हें औपचारिक रूप से अरेस्‍ट कर लिया गया और अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया.

रजत कलसन ने आरोप लगाया कि इस पूरी कार्रवाई के सख्‍त होने की बजाय पुलिस ने युवराज को वीआईपी ट्रिटमेंट दिया. यहां तक की पुलिसवालों ने उनके साथ फोटो तक खिंचवाए. उन्‍होंने कहा कि नियमानुसार पुलिस ने उन्‍हें कार्रवाई से अवगत तक नहीं कराया.

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उन्‍होंने बताया कि अब वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. उनकी ओर से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की जाएगी, क्‍योंकि एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) में अंतरिम जमानत का प्रावधान नहीं है. यह आदेश गलत है और इससे समाज में एक्‍ट को लेकर गलत संदेश जाएगा. उन्‍होंने कहा कि हम इस उनकी अंतरिम जमानत को कैंसिल कवारकर जेल भिजवाएंगे.

बता दें कि युवराज पर आरोप है कि उन्होंने बीते साल रोहित शर्मा से लाइव चैट के दौरान युजवेंद्र चहल पर अनुसूचित जाति के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ दलित अधिकार कार्यकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में SC-ST एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए युवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर हाईकोर्ट ने युवराज के खिलाफ पुलिस की उत्पीड़न कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. अभी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है.

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Bhatla social boycott case Arrest warrant issued against 6 including sarpanch representative

भाटला सामाजिक बहिष्कार मामला: सरपंच प्रतिनिधि सहित 6 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

हांसी : भाटला सामाजिक बहिष्कार मामले (Bhatla Social Boycott Case) में हिसार (Hisar) की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम (Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act) के तहत स्थापित विशेष अदालत के जज अजय तेवतिया ने सामाजिक बहिष्कार के आरोपी सरपंच प्रतिनिधि पुनीत कुमार, रामचंद्र, राम सिंह, जयकिशन, लीला व सुमेर के गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं.

सामाजिक बहिष्कार के पीड़ित दलितों (Dalits) के अधिवक्ता रजत कलसन (Advocate Rajat Kaslan) ने बताया कि 10 जुलाई 2017 को सरपंच समेत 7 लोगों के खिलाफ भाटला के दलितों का सामाजिक बहिष्कार (Bhatla Social Boycott Case) करने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था, जिस बारे में आईपीएस राजेश कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित हुई थी, जिसने केवल एक आरोपी चंद्र फौजी को आरोपी बनाकर अदालत में चालान दे दिया था तथा सरपंच प्रतिनिधि पुनीत कुमार समेत बाकी सभी छह आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी.

उन्‍होंने कहा कि पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ खिलाफ पीड़ित पक्ष ने तत्कालीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया की अदालत में भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत याचिका दायर कर उन्हें आरोपी बनाकर अदालत में तलब करने की मांग की थी, जिस पर अदालत ने सरपंच प्रतिनिधि समय छह लोगों को आरोपी मानते हुए उन्हें समन जारी किए थे.

उन्‍होंने बताया कि इस पर सरपंच प्रतिनिधि समेत छह आरोपियों ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) में खुद को तलब किए जाने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ एक रिवीजन पिटिशन दायर की थी, जिसमें पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने केवल एक तारीख के लिए रोक लगा दी थी. उसके बाद से कोरोना के चलते उक्त मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई तथा उक्त आदेश ही चला आ रहा था.

कलसन ने बताया कि हाल में ही माननीय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इंडियन रेसुरफेसिंग ऑफ रोड एजेंसी बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के मामले में 21 जुलाई 2021 को आदेश पारित कर कहा था कि जिन मामलों में हाईकोर्ट ने स्टे जारी किए हैं, वह स्टे छह महीने के बाद प्रभावी नहीं रहेंगे.

गत छह अगस्त को भाटला समाजिक बहिष्कार मामले में हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत से मांग की की धारा 319 के तहत तलब किए गए आरोपियों के द्वारा हाईकोर्ट से स्टे हासिल किया गया था. मैं केवल एक तारीख पेशी के लिए था तथा सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार अब उक्त स्टे प्रभावी नहीं है, जिसके बाद विशेष अदालत ने सरपंच प्रतिनिधि पुनीत कुमार समेत छह आरोपियों की गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए है.

विशेष बात यह है कि अदालत ने गिरफ्तारी वारंट व हांसी की एसपी को निर्देशित कर जारी किए हैं. अब अगली तारीख 24 सितंबर से पहले पुलिस को आरोपियों को गिरफ्तार करना होगा.

Mirchpur Kand victims Water entered into Valmiki community tents

दुखद: मिर्चपुर पीड़ितों की बस्ती के तंबुओं में पानी घुसा, खाना-कपड़े बर्बाद, बिजली-पानी भी बंद

नई दिल्‍ली/हिसार : हरियाणा (Haryana) के मिर्चपुर कांड (Mirchpur Kand) के बाद गांव से अपना घर-परिवार छोड़ने को मजबूर हुए दलित (Dalit) समाज के लोगों को आज भी क्‍या-क्‍या नहीं झेलना पड़ रहा. जातिवादी उत्‍पीड़न (Caste Oppression) की इस निर्मम घटना को झेलने वाले 250 से अधिक परिवार आज सरकारी उदासीनता के चलते नरक से बदतर जीवन जीने को मजबूर हो चले हैं. उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं. ना सरकार, ना प्रशासन. मॉनसून ने तो जैसे उनके लिए जीवनयापन की तमाम मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, ऊपर से सरकारी उदासीनता ने इस जख्‍म पर नमक डालने जैसा काम किया है.

दरअसल, ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (Human Rights Law Network) की एक टीम ने गांव ढंडूर में बनी मिर्चपुर पीड़ितों (Mirchpur Victims) की बस्ती में दौरा किया. यहां मिर्चपुर पीड़ितों ने अपने रहने के लिए अस्थाई टेंट बना रखे हैं. वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की इस पांच सदस्यीय टीम ने जो देखा वह बेहद दुखद था. यहां तेज बारिश व हवा के चलते लगभग सभी टैंट तबाह हो चुके हैं.

पीड़ित वाल्मीकि समुदाय के लोगों के तंबुओं के अंदर पानी घुस गया है, जिसके चलते वहां पीड़ितों का जीना दुभर हो चला है. पीड़ितों का खाना, जरूरी सामान, बिस्तर, कपड़े सबकुछ पानी में खराब हो चुके हैं. तंबू में बनी रसोईयां में भी पानी भर गया है, जिसके चलते वह अपना खाना भी नहीं बना पा रहे हैं .

अधिवक्ता रजत कलसन (Advocate Rajat Kalsan) के नेतृत्व में यहां का जायजा लेने पहुंची इस टीम को पीड़ितों ने बताया कि पिछले 5 दिनों से बिजली की सप्लाई बंद है तथा पानी के टैंकर भी आने बंद हो गए हैं, जिस बारे में प्रशासन के अधिकारियों से गुहार और चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है. उनकी जिंदगी नरक से भी बदतर हो गई है.

इस मामले में अधिवक्ता रजत कलसन ने तुरंत हिसार के उपमंडल अधिकारी नागरिक से संपर्क कर उन्हें मिर्चपुर पीड़ितों की बस्ती में बिजली व पानी की सप्लाई शुरू कराने के लिए कहा. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया तथा बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता ने टीम को इतला कर बताया कि शाम तक बिजली की सप्लाई बहाल कर दी जाएगी व उपमंडल अधिकारी नागरिक ने बताया कि पानी के टैंकरों से बस्ती में पानी सप्लाई भी शुरू कर दी जाएगी.

Advocate Rajat Kalasn Mirchpur Kand victims Water entered into Valmiki community tents
अधिवक्ता रजत कलसन के नेतृत्व में ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क की एक टीम ने गांव ढंडूर में बनी मिर्चपुर पीड़ितों के बस्ती में दौरा किया.

दरअसल, मिर्चपुर कांड (Mirchpur Kand) के बाद पीड़ित वाल्मीकि परिवारों (Valmiki Families) ने जनवरी 2011 में गांव से पलायन कर दिया था. उसके बाद यह पीड़ित 10 साल तक वेदपाल तंवर के तंवर फार्म हाउस पर रहे. जून 2011 में एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई और 2014 में उक्त याचिका को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) में ट्रांसफर कर दिया, जो अभी विचाराधीन है.

वकील रजत कलसन (Advocate Rajat Kalsan) ने बताया कि उस याचिका में हमने मिर्चपुर के पीड़ितों के पुनर्वास की मांग की थी, परंतु जब यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार और अब भाजपा सरकार दोनों ने मिर्चपुर पीड़ितों (Mirchpur Victims) के अलग जगह पर पुनर्वास का विरोध किया, लेकिन हम लोगों ने लगातार अपने धरना-प्रदर्शन जारी रखें और अदालतों में भी लगातार पुनर्वास के लिए पैरवी की, जिसके चलते हरियाणा सरकार (Haryana Govt) को मिर्चपुर के पीड़ित वाल्मीकि समाज (Victims of Mirchpur Valmiki Samaj) के लोगों को रहने के लिए जगह देनी पड़ी और हिसार (Hisar) के ढंडूर गांव (Dhandoor Village) के पास करीबन 258 परिवारों को रहने के लिए प्लॉट दिए गए हैं. इन प्लॉटों की एवज में हरियाणा सरकार मिर्चपुर पीड़ितों के गांव के घरों को सरकारी कब्जे में ले लिया है तथा इन प्लॉटों की एवज में उन्हें किस्तें भी देनी पड़ रही हैं.

कलसन ने कहा कि प्लॉट तो मिर्चपुर (Mirchpur Kand) के पीड़ितों को मिल गए हैं, लेकिन वहां पर रहने के लिए जरूरी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली, बच्चों के लिए स्कूल, सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी का अभी तक कोई इंतजाम नहीं है.

इसके साथ ही बुनियादी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र ,रिहायशी प्रमाण ,फैमिली आईडी, राशन कार्ड जैसी जरूरी दस्तावेज भी इन लोगों के आज तक नहीं बने हैं, जिसके चलते ना तो इनके बच्चे स्कूलों में एडमिशन ले पा रहे हैं, ना ही इनके बिजली व पानी के कनेक्शन वगैरह लग सके हैं.

कलसन ने कहा कि जल्द ही इस बारे में वे पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर हाईकोर्ट के समक्ष मांग रखेंगे कि हरियाणा सरकार को आदेश दिए जाए कि मिर्चपुर (Mirchpur Kand) पीड़ितों के लिए बस्ती में बिजली, पानी की सुविधा उनके लिए कम्युनिटी सेंटर, पुलिस चौकी स्कूल, डिस्पेंसरी की सुविधा उपलब्ध कराई जाए. साथ ही जिला प्रशासन को निर्देश दिए जाएं कि पीड़ितों के राशन कार्ड, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, रिहायशी प्रमाण, पत्र व फैमिली आईडी बनवाई जाए.

इस मौके पर अधिवक्ता दीपक सैनी ,अधिवक्ता मलकीत सिंह, अधिवक्ता प्रवेश महिपाल, एक्टिविस्ट अजय भाटला, रामकुमार, रमेश व पीड़ितों में रमेश, दिलबाग, गुलाब सिंह ,तिलकराज व अन्य पीड़ित महिलाएं व पुरुष मौजूद थे.