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Bihar MLC Chunav 2022 RJD Lalu Yadav gave ticket to Dalit Munni Devi Rajak

रेलवे प्‍लेटफॉर्म पर लोगों के कपड़े धोने वाली दलित मुन्‍नी रजक को लालू यादव ने दिया MLC टिकट

नई दिल्‍ली/पटना: (Bihar MLC Chunav 2022) बिहार विधान परिषद चुनाव 2022 (Bihar Legislative Council Election 2022) के लिए लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के नेतृत्‍व वाली राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) द्वारा 3 नामों की घोषणा की गई है, उसमें मुन्नी देवी उर्फ मुन्नी रजक (RJD MLC Candidate Munni Rajak) की चर्चा पूरे देश में हो रही है. दलित मुन्‍नी रजक (Dalit Munni Rajak), जिनका जीवनयापन का जरिया कपड़े धोना, इस्त्री करना है, जिनके पास मोबाइल तक नहीं है, आरजेडी की ओर से उन्‍हें यह सम्‍मान दिए जाने की हर ओर सराहना हो रही है. इस सम्मान को पाकर मुन्नी देवी काफी खुश हैं. यहां तक की नामों की घोषणा के बाद लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) ने उन्हें खुद अपनी गाड़ी से उन्हें घर तक छोड़ने गए.

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दरअसल, नालंदा के बख्तियारपुर (Bakhtiyarpur of Nalanda) की रहने वाली मुन्‍नी देवी दलित (Dalit Munni Devi) हैं और रजक समुदाय (Rajak Community) से आती हैं. मुन्नी रजक पेशे से कपड़े धोने का काम करती हैं. वह राजद महिला प्रकोष्ठ (RJD Women’s Cell) की महासचिव हैं. आरजेडी ने आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़ी जाति की महिला को टिकट देकर बिहार में एक बार फिर से बड़ा संदेश दिया है. इस सम्मान को पाकर मुन्नी देवी काफी खुश नजर आईं और उन्होंने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव और मीसा भारती (Lalu Prasad Yadav, Rabri Devi, Tejashwi Yadav, Tej Pratap Yadav and Misa Bharti) का अभार प्रकट किया. इस सम्‍मान के लिए बोलते-बोलते मुन्नी रजक भावुक भी हो गईं.

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आरजेडी ने बिहार विधान परिषद चुनाव 2022 (Bihar MLC Chunav 2022) के लिए जिन 3 नामों की घोषणा की, उनमें एक अल्पसंख्यक युवा कारी शोएब हैं, दूसरी दलित महिला मुन्नी देवी और एक ब्राह्मण अशोक पांडेय हैं. इस फैसले के बाद तेज प्रताप यादव मुन्नी देवी ने मुन्नी देवी को राजनीति के गुर सीखने को कहा.

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बता दें कि मुन्‍नी देवी आरजेडी की बेहद सक्रिय महिला कार्यकर्ता मानी जाती हैं. पिछले दिनों जब लालू यादव के घर सीबीआई की छापेमारी हुई तो इस दौरान पूरे दिन मुन्नी रजक सीबीआई के खिलाफ नारेबाजी करती रही थीं. उनका यह वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर वायरल है.

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बिहार विधान परिषद का टिकट मिलने के बाद मुन्नी देवी ने मीडिया से बात की. उन्‍होंने कहा कि लालू यादव जी के यहां से मुझे फोन कर बुलाया गया. मुझे लगा वट सावित्री पूजा होने के चलते उन्‍हें कोई उपहार जरूर मिलेगा. उन्होंने कहा कि मैं आज भी परिवार का गुजारा कपड़े धोकर करती हूं. न मेरे पास अपना घर है न जमीन है. भाड़े के घर में रहती हूं. ऐसी गरीब महिला को टिकट देकर आरजेडी ने साबित कर दिया कि हर किसी का ख्याल लालू प्रसाद यादव रखते हैं. मुन्नी देवी ने कहा कि आज लोग लालू प्रसाद यादव को फंसाने का काम कर रहे हैं, जबकि वो गरीबों का ख्याल रखते हैं.

(Bihar MLC Chunav 2022)

Heirs of Scheduled Castes Land Allottees Will get possession of land after 50 years

Scheduled Caste: अनुसूचित जाति के भूमि आवंटियों के वारिसों को 50 साल बाद मिलेगा जमीन का कब्जा

नई दिल्‍ली/बेंगलुरु : कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम (Karnataka Land Reforms Act) के तहत 1972 में चार-चार एकड़ जमीन पाने वाले अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के पांच लोगों के वारिस आखिरकार 50 साल बाद संपत्ति का सुख ले सकेंगे. इन अनुसूचित जाति के लोगों के तहत किरायेदार होने का दावा करने वाले दो “संपन्न व्यक्तियों” ने किसी तरह समूचे 20 एकड़ पर अधिभोग अधिकार प्राप्त कर लिया था. 50 साल बाद कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) ने उपायुक्त को निर्देश दिया है कि जमीन के मूल आवंटियों – मुनिथिम्मा, वरदा, मुनिस्वामी, मुनिस्वामप्पा और चिक्कागुल्लोनु- के वारिसों को तीन महीने के अंदर जमीन पर कब्जा दिलाएं.

पांच दशकों तक अनुदान प्राप्तकर्ता और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों ने भूमि न्यायाधिकरण और अन्य अधिकारियों के समक्ष यह मामला लड़ा था.

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न्यायमूर्ति आर देवसास ने अपने हालिया फैसले में कहा, “इस तरह के मामले इस बात की भी कड़वी सच्चाई पेश करते हैं कि कैसे गरीब, जिनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं है, उन्हें कानूनी उलझनों में और उलझा दिया जाता है. ऐसे व्यक्तियों को कठिन सवालों के जवाब देने को कहा जाता है जैसे – अधिकारियों/उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय से संपर्क करने में देरी क्यों हुई.”

कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम (Karnataka Land Reforms Act) के तहत उपायुक्त द्वारा 1972 में देवनहल्ली के विश्वनाथपुरा गांव में मुनिथिम्मा, वरदा, मुनिस्वामी, मुनिस्वामप्पा और चिक्कागुल्लोनु को चार-चार एकड़ जमीन दी गई थी.

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दो व्यक्तियों – बायरप्पा और पिल्लप्पा – ने 1976 में दावा किया कि वे पांच मूल अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) अनुदानकर्ताओं के तहत किरायेदार थे और पूरे 20 एकड़ के लिए अधिभोग अधिकार की मांग की.

भूमि न्यायाधिकरण (Land Tribunal) ने 1980 में उनके पक्ष में फैसला सुनाया. इस आदेश को हालांकि उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया और मामला वापस न्यायाधिकरण को भेज दिया गया.

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भूमि न्यायाधिकरण ने 1993 में एक अन्य आदेश में एक बार फिर दावेदारों के अधिभोग अधिकारों के पक्ष में फैसला सुनाया. इस आदेश को हाईकोर्ट में दी गई चुनौती 1997 में खारिज कर दी गई थी.

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मूल अनुसूचित जाति अनुदान प्राप्तकर्ताओं के उत्तराधिकारियों ने कर्नाटक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (भूमि के हस्तांतरण का निषेध) अधिनियम (Karnataka Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prohibition of Transfer of Land) Act) के तहत सहायक आयुक्त से संपर्क किया. लेकिन उनका दावा खारिज कर दिया गया. उपायुक्त के समक्ष भी उनकी एक अपील खारिज कर दी गई.

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मूल अनुदानकर्ताओं के उत्तराधिकारियों ने इसके बाद 2014 में फिर से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया.

अपने हालिया फैसले में अदालत ने कहा, “यह मामला दर्शाता है कि कैसे दलित वर्गों (Depressed Classes) से संबंधित व्यक्तियों के पक्ष में संप्रभु शक्ति द्वारा दिए गए अनुदान पर अमीर और प्रभावशाली लोगों द्वारा कब्जा कर लिया जा रहा है.”

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भूमि न्यायाधिकरण, सहायक आयुक्त और उपायुक्त के आदेशों को रद्द करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा, “समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि कानून और प्रक्रियाएं गरीब याचिकाकर्ता के वैध अधिकारों से वंचित करने के लिए संपन्न लोगों का साधन नहीं बननी चाहिए.”

Gujarat OBC youth attacked with sticks for playing DJ at Dalit girl wedding

गुजरात में OBC युवकों ने दलित युवती की शादी में डीजे बजाने पर लाठी से हमला किया

अहमदाबाद: (Dalit Atrocities) गुजरात (Gujarat) के अहमदाबाद जिले (Ahmedabad District) में डीजे (DJ) बजाने के मुद्दे पर एक दलित की शादी (Dalit Marriage) के जुलूस यानि बारात पर ओबीसी (OBC) युवकोंं द्वारा हमला करने के आरोप में पुलिस ने बृहस्पतिवार को छह लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया.

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देतरोज पुलिस थाने (Detroj Police Station) के उप निरीक्षक एच. आर. पटेल ने कहा कि अहमदाबाद के देतरोज तालुका के डांगरवा गांव (Dangarva Village of Detroj Taluka) में दलित (Dalit) शख्‍स जगदीश परमार ने अपनी बेटी की शादी के मौके पर बृहस्पतिवार को एक जुलूस का आयोजन किया था.

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पटेल ने कहा, “गांव में जब जुलूस एक स्थान पर पहुंचा तब ठाकोर (OBC) समुदाय के कुछ युवकों ने उस क्षेत्र में डीजे नहीं बजाने को कहा. इनकार किये जाने पर छह लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों पर लाठी से हमला किया. इस हमले में वधू के पिता घायल हो गए.”

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अधिकारी ने कहा कि घटना के संबंध में छह लोगों के विरुद्ध एक मामला दर्ज किया गया है और अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.

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Muzaffarnagar Pawti Khurd village munadi viral by Rajbir Pradhan for Chamars

मुजफ्फरनगर: ‘कोई भी चमार राजबीर प्रधान की ट्यूबवेल, खेत की मेढ़, समाधि पर दिख गया तो 5000 जुर्माना और 50 जूते लगेंगे’

नई दिल्‍ली/मुजफ्फरनगर : देश को आजादी मिले 70 साल से ज्‍यादा होने को आए, लेकिन भारत में दलित समाज (Dalit Community) अभी तक जातिवाद के चंगुल से निकल नहीं पाया. उन पर आज भी तरह-तरह से अत्‍याचार (Dalit Atrocities) हो रहे हैं. मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां खुद को प्रधान मानने वाले एक राजबीर नामक शख्‍स ने पावटी खुर्द गांव (Muzaffarnagar Pawti Khurd Village) में मुनादी करा दी कि कोई भी चमार (Chamar) अगर राजबीर प्रधान की ट्यूबवेल, खेत की मेढ़ या समाधि पर दिख गया तो 5000 जुर्माना और 50 जूते लगेंगे. पुलिस इस मामले में गंभीर रुख अपनाए हुए है और मुनादी करने वाले शख्‍स को गिरफतार कर लिया गया है. जल्‍द ही आरोपी राजबीर को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

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इस मामले के सामने आने के बाद भीम आर्मी के मुखिया (Bhim Army Chief) और आजादी समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के अध्‍यक्ष चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने नाराजगी जताई और घोषणा की है कि राजबीर प्रधान की ये गलतफहमी दूर करने वह जल्द पावटी जाएंगे. उन्‍होंने लिखा, यूपी के ज़िला मुज़फ़्फ़रनगर के गांव पावटी खुर्द में खुलेआम मुनादी हो रही है कि “कोई भी ‘चमार’ (Chamar) उसकी डोल, समाधि,ट्यूबवेल पर दिख गया तो 5 हजार रुपए जुर्माना और 50 जूते होंगे! हिंदू बनने का जिनको शौक़ चढ़ा था, उन्हें अब समझ आ गया होगा. वैसे इनकी गलतफहमी दूर करने मैं जल्द पावटी जाऊंगा. ये है मोदी और योगी के रामराज्य की एक झलक. लेकिन याद रखिये यह गुलाम भारत नही है, यह आजाद भारत है जो भारतीय संविधान से चलता है. भीम आर्मी के रहते ये गुंडागर्दी अब नहीं चलेगी.

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दरअसल, मुजफ्फरनगर कोर्ट (Muzaffarnagar Court) में पेशी के दौरान मारे गए कुख्यात विक्की त्यागी के पिता राजबीर प्रधान के नाम से पावटी खुर्द में मुनादी कराई गई है कि अनुसूचित जाति की चमार जाति से ताल्‍लुक रखने वाला का कोई भी व्यक्ति उसकी ट्यूबवेल, खेत की मेढ़ या समाधि पर दिख गया तो उसे पांच हजार रुपये जुर्माना और 50 जूते लगाए जाएंगे.

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इस मुनादी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने पर मुजफ्फरनगर पुलिस हरकत में आई और मुनादी करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है. एसएसपी अभिषेक यादव (SSP Abhishek Yadav) का कहना है कि गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है. राजवीर की गिरफ्तारी भी अति शीघ्र कराई जाएगी.

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बता दें कि जिस राजबीर प्रधान नाम के व्‍यक्ति ने यह मुनादी कराई वह विक्रांत उर्फ विक्की त्यागी का पिता है, जिसकी फरवरी 2015 में कोर्ट में पेशी के दौरान हत्या कर दी गई थी. एसओ ज्ञानेश्वर बौद्ध ने पुलिसकर्मी विक्की त्यागी के घर पर भेजे, लेकिन कोई मिला नहीं.

(Muzaffarnagar Pawti Khurd Village)

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