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लखबीर को आंदोलन खराब करने के लिए 30 हजार मिले: SKM | असपा बोली- मोर्चा जातीय कुंठा से ग्रस्त

नई दिल्‍ली : बीते 15 अक्टूबर को किसान आंदोलन (Kisan Andolan) विरोध स्‍थल पर मौजूद निहंग सिखों के एक समूह द्वारा सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर पंजाब (Punjab) के दलित मजदूर लखबीर सिंह (Dalit Lakhbir Singh Murder) की गई निर्मम हत्‍या के मामले में संयुक्‍त किसान मोर्चा (Samyukt Kisan Morcha) ने नया बयान जारी किया है. मोर्चे ने आरोप लगाया है कि लखबीर सिंह को किसी से तीस हजार रुपये मिले थे और यह आंदोलन को पटरी से उतारने के लिए दिए गए. मोर्चा के इस बयान पर आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) ने नाराजगी जताई है. पार्टी के प्रवक्‍ता सूरज कुमार बौद्ध ने इसे शर्मनाम बताते हुए कहा कि मोर्चा जातीय कुंठा से ग्रस्त नजर आता है.

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किसान आंदोलन (Kisan Andolan) का नेतृत्‍व कर रहे संयुक्‍त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को जारी अपने दैनिक प्रेस बुलेटिन में कहा कि ‘बीते 15 अक्टूबर को निहंग सिखों के एक समूह द्वारा सिंघु बॉर्डर पर लखबीर सिंह का एक ताजा वीडियो सामने आने के बाद, यह मालूम होता है कि लखबीर सिंह (Lakhbir Singh) को किसी से तीस हजार रुपये मिले थे, और यह आंदोलन को पटरी से उतारने के लिए दिए गए थे’.

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मोर्चा ने आगे कहा कि, ‘एसकेएम ने इस पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से कराने की अपनी मांग दोहराई है ताकि हिंसक घटनाओं के पीछे की साजिश का पर्दाफाश हो सके’.

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वहीं, आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) ने मोर्चा के इस बयान पर गहरी नाराजगी जताई. पार्टी प्रवक्‍ता सूरज कुमार बौद्ध ने माइक्रो ब्‍लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, ‘पहले लखबीर को नृशंसता से मारा गया और फिर तलवार की नोक पर अधमरे पड़े इंसान से ₹30 हजार लेकर बेअदबी की बात उगलवाना शर्मनाक है’. उन्‍होंने आगे लिखा, ‘इससे भी शर्मनाक ‘ज़मीदार मोर्चा’ का बयान है, जिसमें वे इसे आधार बनाकर बयान जारी कर रहे हैं. मोर्चा जातीय कुंठा से ग्रस्त नजर आता है’.

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Rajasthan Dalit oppression Jaisalmer Dalit Dinesh Kumar Meghwal beat with rod put cloth in mouth

राजस्‍थान में दलित उत्‍पीड़न चरम पर, बकरी चरा रहे युवक को मुंह में कपड़ा ठूंस रॉड से मारा

जैसलमेर. राजस्थान (Rajasthan) में रोजाना दलित उत्‍पीड़न (Dalit Atrocities) के मामले सामने आते हैं, लेकिन अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Govt) एवं राजस्‍थान पुलिस (Rajasthan Police) प्रशासन के कोई सख्‍त कदम ना उठाने से इन घटनाओं में कोई कमी आ रही है. अब जैसलमेर (Jaisalmer) जिले में एक दलित युवक (Dalit youth) की लोहे की रॉड से बुरी तरह पिटाई करने का मामला सामने आया है.

यह घटना सांगड़ थाना क्षेत्र के मेघा गांव की है. हालांकि राजस्‍थान पुलिस (Rajasthan Police) ने केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन आरोपी अभी तक उसकी गिरफ्त से बाहर हैं. इस घटना का शिकार हुए पीड़ित दलित दिनेश कुमार मेघवाल (Dinesh Kumar Meghwal) ने पुलिस को बताया कि ”बीते बुधवार की सुबह करीब 11 बजे वो अपने गांव मेघा के पास बकरियां चरा रहा था. उसी वक्‍त गांव के ही दो युवक विक्रम सिंह व महेंद्र सिंह अचानक गाड़ी में आए. इन लोगों ने मुझे वहां बकरियां चराने से मना किया. इससे पहले की मैं कुछ बोलता उन्होंने मेरे मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और अपनी गाड़ी में डालकर थोड़ी दूर ले गए.”

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दलित उत्‍पीड़न (Dalit Atrocities) के शिकार दिनेश का आरोप है कि ”विक्रम और महेन्द्र सिंह ने उसे लोहे के किसी हथियार से बहुत मारा. वह चिल्‍लाता रहा. पास में मौजूद गांव के ही एक युवक सुरेश ने उसकी चीख सुनी. वह उसे बचाने को आया. सुरेश के आने के बाद ही दोनों युवकों ने मुझे छोड़ा. अगर सुरेश मौके पर नहीं आता, तो शायद मैं बच नहीं पाता. वो मुझे जान से मार देते’.

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दिनेश कुमार मेघवाल (Dinesh Kumar Meghwal) ने बताया कि इस हमले की वजह से मैं पहले बेहोश हो गया था. फ‍िर सुरेश ने मेरे परिजनों को बुलाया और मुझे अस्पताल में भर्ती करवाया गया. हमने सांगड़ थाने में केस दर्ज करवा दिया है.”

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वहीं, दलित उत्‍पीड़न (Dalit Oppression) की इस घटना को लेकर रालोपा के संयोजक व सांसद हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) ने इस मामले में ट्वीट करते हुए जैसलमेर पुलिस को संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की. इनके अलावा भीम आर्मी (Bhim Army) के जैसलमेर जिलाध्यक्ष हरीश इणखियां ने भी दिनेश से जवाहर अस्पताल में जाकर मुलाक़ात की.

Read Kanshi Ram Ke Vichar he told what is Chamcha

पढ़ें, मान्‍यवर कांशीराम के विचार, उन्‍होंने बताया ‘चमचा’ क्या होता है?

बाबा साहब डॉक्टर बी आर आंबेडकर (Baba Saheb Dr. BR Ambedkar) के नीचे दिए गए इस उद्धरण से मान्‍यवर कांशीराम (Manyavar Kanshi Ram) अपनी बेहद प्रसिद्ध रचना चमचा युग (The Chamcha Age) में चमचों की परिभाषणा हमें समझा रहे हैं. साहेब कांशीराम (Kanshi Ram ke Vichar) के नजरिये से समझिए चमचा क्या होता है?

एक जाने पहचाने मुहावरे का प्रयोग करें तो हिंदुओं के नजरिए से संयुक्त निर्वाचक मंडल एक रॉटन बरो (जीर्ण-शीर्ण उपनगर है) जिसमें हिंदुओं को एक अछूत के नामांकन का अधिकार मिलता है तो नाम मात्र को अछूतों का प्रतिनिधि होता है. किंतु वास्तव में वह हिंदुओं का औजार होता है. – डॉ. बीआर आंबेडकर

 

मान्‍यवर कांशीराम (Kanshi Ram) लिखते हैं कि ‘चमचा युग में वह कहते हैं ‘डॉक्टर आंबेडकर (Dr. Ambedkar) ने इस उत्तरण में हिंदुओं का औजार शब्द प्रयोग किया है. उन्होंने अनुसूचित जातियों के लिए जिन राजनीतिक अधिकारों को प्राप्त किया था, उनके संदर्भ में वे अक्सर ही शब्द हथियार का प्रयोग करते रहे थे. औजार के अतिरिक्त वह दूसरे शब्दों का भी प्रयोग करते रहे थे. जैसे हिंदुओं का दलाल अथवा हिंदुओं का पिट्ठू. संयोगवश उन्हें पूरे जीवन में अनुसूचित जातियों के राजनीतिक दलों (Scheduled Castes Political Parties) को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में किन औजारों, दलालों और पिट्ठूओं से निपटना पड़ा था’.

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ऊंची जातियों के हिंदुओं के इन औजारों, दलालों और पिट्ठूओं की संख्या और किस्मों में समय बिताने के साथ बढ़ोतरी होती रहती है. स्वाधीनता उपरांत काल की राजनीतिक अनिवार्यताओं के चलते इन औजारों, दलालों और पिट्ठूओं को बहुत प्रोत्‍साहन मिला. 1956 में बाबा साहब डॉक्टर बी. आर आंबेडकर के दुखद परिनिर्वाण के बाद यह प्रक्रिया इतनी तेज हो गई कि आज ऊंची जाति हुई हो कि हिंदुओं के औजार, दलाल और पिट्ठू केवल राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि मानव गतिविधि और संबंध के प्रत्येक क्षेत्र में भारी संख्या में मिल जाते हैं. प्रारंभ में तो यह औजार, दलाल और पिट्ठू केवल डॉक्टर आंबेडकर और पैनी दृष्टि वालों को ही दिखाई देते थे. बाद में बुद्धिजीवी वर्ग को भी वह दिखाई देने लगे. किंतु आज औजार, दलाल और पिट्ठू दैनिक जीवन में इतने आम हो गए हैं कि आम आदमी भी उन्हें जनता के बीच आसानी से पहचान सकता है.

Kanshi ram ke Vichar: कांशीराम के अनमोल विचार-कथन, पार्ट-3

मान्‍यवर कांशीराम (Kanshiram) कहते हैं कि ‘आम आदमी की अपनी एक अलग शब्दावली होती है. उसकी शब्दावली में एक औजार, दलाल और पिट्ठू को चमचा कहा जाता है. इस पुस्तक में मैंने अपने आम आदमी की शब्दावली इस्तेमाल करने का फैसला किया है. मेरा सोचना है कि जब हम आम आदमी के मकसद के लिए लड़ रहे हैं तो हमें उसी की शब्दावली का प्रयोग करने से लाभ होगा. चमचा एक देसी शब्द है, जिसका प्रयोग उस व्यक्ति के लिए होता है जो अपने आप कुछ नहीं कर सकता, बल्कि कुछ करवाने के लिए किसी और की जरूरत होती है और वह कोई और व्यक्ति उसका इस्तेमाल हमेशा अपने निजी फायदे और भलाई के लिए अथवा अपनी जाति की भलाई के लिए करता है जो चमचे की जाति के लिए हमेशा अहितकारक होता है’.

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वह कहते हैं कि इस पुस्तक में हम औजार, दलाल और पिट्ठू के मुकाबले चमचा शब्द का प्रयोग अधिक करेंगे. भारतीय संदर्भ में और आम आदमी के लिए यह शब्द अधिक प्रभावी होगा, क्योंकि अर्थ के अतिरिक्त यह अधिकतम प्रभाव के साथ भावना को भी कम व्यक्त करता है. इन चारों शब्दों, चमचा, पिट्ठू, दलाल और औजार का अर्थ एक ही होता है. इसलिए उनका इस्‍तेमाल अर्थ और भाव को व्यक्त करने में उनकी प्रभाविकता पर निर्भर करेगा.

Dalit Leader Jitan Ram manjhi Advocating to end reservation

बताइये, इस दलित नेता ने तो आरक्षण खत्‍म करने की ही वकालत कर दी…

नई दिल्‍ली : जहां देश में आरक्षण (Reservation) का दायरा बढ़ाए जाने की मांग चल रही है, वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने अलग ही वकालत कर दी है. वह चाहते हैं कि आरक्षण को खत्‍म कर दिया जाए. उनका कहना है कि आरक्षण हमारे लिए कलंक है. ऐसा लगता है कि यह भीख है और यह हमारे साथ चिपक गया है.

दरअसल, बुधवार को नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब (Constitutional Club, New Delhi) में हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में मांझी (Jitan Ram Manjhi) बोल पड़े कि आरक्षण और जातिवाद का राक्षस हमें निगल रहा है. समान स्कूली शिक्षा ही इसका उपाय है. अगर देश में कॉमन स्कूलिंग सिस्टम लागू हो जाए तो 10 साल बाद हमें आरक्षण (Reservation) की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी.

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उन्‍होंने कहा कि इसे लागू कर 10 साल का समय दीजिए और देखिये हम आगे बढ़ जाएंगे. फिर आरक्षण और जातिवाद की कोई बात ही नहीं होगी. उन्‍होंने आगे कहा कि हमको आरक्षण नहीं चाहिए था. यह हमको भीख की तरह मिला.

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मांझी ने कहा कि अनुसूचित जाति की सीटों (Scheduled Caste Seats) पर सामान्य वर्ग के लोग जीत रहे हैं. आरक्षण के ज़रिए नौकरी पाए व्यक्ति को बार-बार हीनभावना से देखा जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि आरक्षण देकर एहसान किया गया हो.

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