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Dalit Rights

Human Rights Law Network village Ramayana legally aware

अब Human Rights Law Network ने गांव रामायण के लोगों को किया कानूनी जागरूक

नई दिल्‍ली/हांसी: हरियाणा (Haryana) के गांव रामायण के गुरु रविदास धर्मशाला में ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (Human Rights Law Network) की तरफ से कानूनी जागरूकता व सहायता शिविर का आयोजन किया. इस जागरूकता शिविर का मकसद गांव के गरीब व वंचित समाज के लोगों को कानून के प्रति जागरूक करना व उनकी कानूनी सहायता करना था. इस कानूनी जागरूकता शिविर में 70 से अधिक महिला व पुरुष ग्रामीणों ने हिस्सा लिया.

इस शिविर में आए वकीलों ने ग्रामीणों को, प्रशासनिक समस्याओं, बिजली बिल व मीटर से संबंधित समस्याओं, मजदूरी व मजदूरों से संबंधित कानून, घरेलू हिंसा अधिनियम, भारतीय दंड संहिता, जूनाइल जस्टिस एक्ट, भारतीय संविधान, अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम, पंचायती राज अधिनियम जैसे कानूनों की जानकारी दी . कानूनी जानकारी देने के बाद लोगों ने अपनी अपनी-अपनी समस्याओं के बारे में बताया व लिखित में मौके पर आए हुए अधिवक्ताओं को शिकायत दी, जिस बारे में उनको आश्वासन दिया गया कि उनकी पूरी कानूनी मदद की जाएगी.

संगठन के प्रदेश संयोजक वकील रजत कलसन (Advocate Rajat Kalsan) ने बताया की सरकार का दायित्व है कि लोगों तक पूरी कानूनी जानकारी पहुंचे परंतु सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं है. आम जनता भी कानूनी समस्याओं को लेकर घरों से निकलने में हिचकते हैं तथा उन्हें कानूनी कार्रवाई में होने वाले भारी-भरकम खर्चे का भी डर रहता है. इसलिए अब ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (Human Rights Law Network) हर गांव में जाकर लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगा तथा उन्होंने कानूनी तौर पर जागरूक भी करेगा. उन्होंने अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम (SC/ST Act) की जानकारी दी.

Advocate Rajat Kalsan ने शिविर में लोगों को बताया कि सरकार का दायित्व है कि लोगों तक पूरी कानूनी जानकारी पहुंचे परंतु सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास पर्याप्त नहीं है.

गांव रामायण में इस कानूनी जागरूकता शिविर में अधिवक्ता रोहित कलसन ने प्रशासनिक सामान्य कानून, घरेलू हिंसा अधिनियम तथा अधिवक्ता दीपक सैनी ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन ऑफ सेक्सल ऑफन्स एक्ट तथा अधिवक्ता प्रवेश महिपाल ने महिला हिंसा के विरुद्ध कानूनों पर अधिवक्ता मलकीत सिंह ने किशोर न्याय अधिनियम व आरटीआई एक्ट संविधान के बारे में लोगों को जानकारी दी.

इस कानूनी जागरूकता शिविर में मानवाधिकार कार्यकर्ता अजय भाटला डॉ सुशील, संजय बौद्ध, बलजीत, राजेश,शिव कुमार, विकास, प्रमोद, सतीश, हरीश, प्रेम बौद्ध,अमन, टोनी, रोबिन, अंकुश, विक्रम नरड़, सुरेशपाल, संजीव बामनिया, अशोक धानिया, कुलदीप व दर्जनों लोग मौजूद रहे.

पहली बार घोड़ी पर बैठेगा दलित जाति का दूल्हा, पुलिस ने कहा- हम साथ हैं, चिंता मत करिए

महोबा. आजादी के कई दशक बीत जाने के बावजूद एक दलित को घोड़ी पर बारात (Dalit Barat on horse) निकालने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से मदद मांगनी पड़ रही है. कभी राजस्थान, कभी पंजाब तो कभी उत्तर प्रदेश से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं. ताजा मामला महाराष्ट्र (Maharashtra) के महोबा जिले का है.

जिले में एक दलित युवक ने अपनी शादी से पहले की रस्म के लिए अपने घर से पास के मंदिर में घोड़े की सवारी करने के लिए पुलिस सुरक्षा (Dalit Man demand Police Protection for Marriage) मांगी है. दलित युवक में मन में खौफ है कि कहीं उसके साथ पुरानी कहानी दोहराई न जाए इसलिए उसने पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की है.

पुलिस थाने में लिखित में दी शिकायत
रिपोर्ट के मुताबिक, अलखराम अहिरवार ने महोबा में महोबकांत पुलिस को एक आवेदन दिया है, जिसमें उनसे 18 जून की शादी से पहले मंदिर में होने वाली रस्म के लिए सुरक्षा मुहैया कराने को कहा गया है. स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) महोबकांत, सुनील तिवारी ने संवाददाताओं को बताया कि दूल्हे ने लिखित में दिया था कि वह पुलिस सुरक्षा चाहता है क्योंकि वह विवाह पूर्व समारोह में घोड़े की सवारी करना चाहता है.

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अलखराम की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे
दलित युवक अलखराम से इस तरह की इच्छा की लिखित जानकारी मिलने के बाद एसएचओ ने कहा, हमने अनुमति दी है ताकि अलखराम अपनी इच्छा पूरी कर सके. स्थिति सामान्य है और किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं है. हम आवेदक को सुरक्षा भी प्रदान करेंगे और उम्मीद करते हैं कि शादी से पहले की रस्में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होंगी.’

ऐसा पहली बार होगा जब गांव में कोई दलित युवक घोड़ी पर अपनी बारात निकालेगा.

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हालांकि इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है कि आखिरकार कब दलित को घोड़ी पर बारात निकालने का अधिकार मिलेगा?

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Dalit Beat

दलित वर्ग ध्यान दें! उत्पीड़न की घटनाओं पर एक क्लिक में करें शिकायत

नई दिल्ली. देशभर में दलित वर्ग के लोगों के साथ होने वाले उत्पीड़न (Dalit oppression) को ध्यान में रखते हुए अनुसूचित जाति आयोग (Scheduled Castes Commission) ने एक्शन लिया है. दलितों के साथ जातिगत आधार पर किसी तरह का दुर्व्यवाहर न हो इसके लिए अनुसूचित जाति आयोग ने एक शिकायत पोर्टल को लॉन्च किया है. इस पोर्टल के जरिए अनुसूचित जाति का कोई भी व्यक्ति देश के किसी भी हिस्से से अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है.

शिकायतों की वर्तमान स्थिति और अन्य चीजों की भी सुविधा

– इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाने वाले दलितों के लिए ई-फाइलिंग की सुविधा भी है.

– आपकी शिकायत की वर्तमान स्थिति क्या है, उस पर क्या एक्शन लिया गया पोर्टल पर उसे भी देखा जा सकता है.

-इस पोर्टल के माध्यम के जरिए आप दस्तावेज़ और ऑडियो / वीडियो फ़ाइलों को भी अपलोड कर सकते हैं.

आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस पोर्टल के माध्यम से विशेष रूप से अनुसूचित जाति की आबादी की शिकायतों और उसके निवारण को व्यवस्थित करना है.

देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले दलितों के साथ किसी भी तरह का शारीरिक या मौखिक तौर पर उत्पीड़न होता है तो वो ncsc.negd.in वेबसाइट पर लॉगिन कर सकते हैं और शिकायत दर्ज करवा सकते हैं.

 

UP panchayat poll

UP Panchayat Elections: अनुसूचित जाति के लोगों ने की मतदान स्थल बदलवाने की गुहार, जानें क्या है मामला

लखनऊ. 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों (5 State Assembly elections) के बीच उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों (UP Panchayat Elections) को लेकर सरगमियां तेज हैं. इन चुनावों में कई सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं. इसी बीच छपरौली क्षेत्र के शेरपुर गांव में रहने वाले अनुसूचित के लोगों ने मतदान स्थल बदलवाने की मांग की है.

लोगों का कहना है कि पंचायत चुनाव के लिए जो बूथ बनाए गए हैं वो गांव के बिल्कुल बीचों-बीच है और वहां पर उच्च जाति के लोग ज्यादा हैं

दबंगई दिखाते हैं उच्च जाति के लोग
लोगों का कहना है कि इन मकानों में रहने वाले लोग पंचायत चुनाव में हमें दबंगई दिखाते हैं और अपने मकानों की छत से पथराव कर देते हैं जिससे हम अपनी वोट नहीं डाल पाते हैं.

हरिजन मंदिर पर बनाए गए मतदान स्थल
ग्रामीणों की मांग है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह ही पंचायत चुनावों में हरिजन मंदिर को बूथ बनाया जाए. इसके लिए गांव के लोगों ने एडीएम को पत्र सौंपा है.

 

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वहीं, इस पूरे मामले पर एडीएम अमित कुमार का कहना है कि किसी भी चुनाव के लिए धार्मिक स्थल को मतदान केंद्र नहीं बनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि मतदान संपन्न तरीके से हो सकें, इसके लिए सुरक्षा की व्यवस्था की गई है. यदि कोई मतदाता को धमकाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.