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दलित विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ मिलेगा वजीफा, 19 जून है आवेदन की आखिरी तारीख

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग (Uttar Pradesh Government) द्वारा राज्य के अनुसूचित जाति के छात्रों (Financial Help for Schedule caste students) को पढ़ाई के साथ वजीफा दिया जा रहा है. जो भी छात्र 9 से 11 कक्षा में दाखिला ले चुके हैं वो इसके लिए आवेदन कर सकते हैं.

राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार वजीफे का लाभ चयनित विद्यार्थियों को चालू शिक्षा सत्र से ही मिलना शुरू हो जाएगा.

वजीफे आवेदन के लिए पात्रता

– कक्षा 9वीं से 11वीं तक के छात्र जो इस सत्र के लिए स्कूल में दाखिला ले चुके हों.

– छात्र के पास अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है.

– जिला स्तर पर कक्षा 8 व 10 में पास होने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिलाने के लिए लिखित परीक्षा कराई जाएगी जिसके लिए 19 जून तक निर्धारित प्रारूप पर आवेदन पत्र डीआईओएस दफ्तर में जमा कराए जाएंगे.

अनुसूचित जाति के छात्रों को मिलेगी कितनी आर्थिक सहायता?

– राज्य सरकार द्वारा जारी की गई विज्ञप्ति के अनुसार कक्षा 9 के प्रत्येक विद्यार्थी को 75,500 रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी.

– कक्षा 11 के प्रत्येक विद्यार्थी को 1,25,000 रुपये की धनराशि सालाना वजीफा के रूप में दी जाएगी.

साइकल चोरी के आरोप में 5 दलित युवकों को मिली खौफनाक सजा, VIDEO VIRAL

अमेठी. उत्तर प्रदेश के अमेठी में दलितों (Amethi Dalit youth beaten) के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है. यहां 5 दिन पहले 5 दबंगों ने दलित युवकों पर साइकिल चोरी का आरोप लगाते हुए उन्हें बुलाकर दिन भर काम कराया. इतना ही नहीं काम करवाने के बाद दलित युवकों को मुर्गा बनने पर मजबूर किया और फिर चलाया.

दलित युवकों को मुर्गा बनाने के बाद दबंगों ने उनकी बेरहमी से पिटाई की. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो जिले के मुंशीगंज कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत मुसवापुर चौराहे का है. वीडियो 5 जून का बताया जा रहा है. पीड़ित के अनुसार मुसवापुर चौराहे पर स्थित बुढ़ऊ बाबाधाम के पास गांव वालों ने एक भंडारे का आयोजन किया था.

देखें VIDEO…

आयोजन में रामदैपुर निवासी बशीर अहमद के लड़के की साइकिल चोरी हो गई थी. चोरी के खुलासे के लिए मुसवापुर के आधा दर्जन दबंगों ने बंदोइया गांव के दलित युवकों को काम करने के बहाने बुलाया.

लड़कों के वहां पहुंचते ही दबंगों ने उनसे चोरी गई साइकिल के एवज में 700–700 भरपाई किए जाने के लिए कहा. इसी बीच दबंगों ने तालिबानी अंदाज में पांचो लड़कों का हाथ बांधकर उन्हें मुर्गे की तरह चलने के लिए कहा और पीछे से दबंगों ने डंडे भी बरसाने शुरू कर दिए.

पुलिस ने दर्ज नहीं किया मामला
इस पूरे घटनाक्रम में गौर करने वाली बात ये रही कि पुलिस ने पीड़ित युवकों की शिकायत पर सुनवाई तक नहीं की और केस दर्ज नहीं किया. हालांकि जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस हरकत में आई और मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की.

 

दलित गैंगरेप पीड़िता को अस्पताल में जमीन पर बैठाया गया, मेडिकल के लिए घंटों करना पड़ा इंतजार

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में दलित महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में कमी नहीं आ रही है. आए दिन दलित महिलाओं के साथ रेप, गैंगरेप, छेड़खानी जैसी घटनाएं घटित हो रही हैं. ताजा घटना क्रम में लखीमपुर खीरी जिले के फूलबेहड़ थाना क्षेत्र में दलित युवतियों से गैंगरेप (Gangrape with Dalit Girls) के मामले में एक और लापरवाही सामने आई है.

गैंगरेप की घटना के बाद पुलिस जब युवतियों को मेडिकल (Medical of Dalit gangrape victim) कराने के लिए अस्पताल ले गई तो वहां भी उनके साथ भेदभाव किया गया है. दलित युवतियों को अस्पताल में बैठने के लिए स्टूल तक नहीं दिया गया. रेप पीड़िताएं जमीन पर बैठी रहीं.

रात को पहुंची अस्पताल दोपहर तक नहीं हुआ मेडिकल
रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को फूलबेहड़ थाना क्षेत्र में तीन दलित युवतियों से गैंगरेप हुआ. पुलिस इनको रात को मेडिकल के लिए लेकर आई. हालांकि मेडिकल रविवार दोपहर तक होता रहा. मेडिकल के इंतजार में दलित युवतियों को घंटों तक अस्पताल की जमीन पर ही बैठी रहीं.

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डीएम ने मांगी जांच रिपोर्ट
घटना की जानकारी मिलते ही मामले पर डीएम अरविंद चौरसिया ने संज्ञान लिया है. एसडीएम सदर से जांच रिपोर्ट मांगी गई है.

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UP Police

पंचायत चुनाव में दलित ने नहीं दिया वोट, तो नवनिर्वाचित प्रधान ने फूंक दिया घर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पिछले दिनों संपन्न हुए पंचायत चुनावों (UP Panchayat Elections) के बाद राज्य में दलितों पर अत्याचार बढ़ गया है. ताजा घटनाक्रम में भुता के विशेसरपुर गांव में प्रधानी के चुनाव में वोट नहीं देने से बौखलाए नवनिर्वाचित प्रधान के पति और उसके साथियों ने दलित के घर में आग लगा दी.

आग लगने से दलित के घर का सारा सामान जलकर खाक में तब्दील हो गया. रिपोर्ट के मुताबिक, नवनिर्वाचित प्रधान ने पहले दलित परिवार को जातिसूचक शब्द कहे और मारपीट की इसके बाद अश्लील हरकतें करते हुए महिला के कपड़े फाड़ दिए.

आखिरकार क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, गांव में प्रधान पद के लिए हरीश पटेल और शिवनंदन की पत्नियां लड़ीं थीं. गांव के ही एक दलित परिवार ने शिवनंदन का समर्थन किया. हालांकि चुनावों में उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा.

पीड़ित परिवार ने बताया कि हरीश पटेल इस बात की रंजिश मानने लगे कि उन्होंने उनके विपक्षी का समर्थन क्यों किया. पीड़ित दलित परिवार का कहना है कि चुनाव संपन्न होने के बाद नवनिर्वाचित प्रधान ने उनके साथ कई बार दुर्व्यवहार किया.

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प्रधान के पति को लिया हिरासत में…
फिलहास पुलिस ने नवनिर्वाचित प्रधान और उसके पांच अन्य साथियों के खिलाफ मारपीट, बलवा, दलित उत्पीड़न एवं आगजनी का मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस ने प्रधान पति को हिरासत में लिया है.

 

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