सफल दलित

Dalit UP DGP Brijlal

एक दलित IPS, जिससे कांपते थे क्रिमिनल, बना एक राज्‍य का पुलिस मुखिया

भारत में बहुतेरी दलित (Dalit) प्रतिभाएं हैं, जिनका जन्‍म गरीब परिवार में हुआ, बचपन संघर्ष में बीता, लेकिन अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर उन्‍होंने एक मुकाम हासिल किया. इस तरह ये सफल दलित आज देश-दुनिया के सामने एक मिसाल हैं.

इन्‍हीं शख्सियतों में से एक हैं आईपीएस बृजलाल (IPS Brijlal). इनकी गिनती सफल पुलिस अधिकारियों में की जाती है.

आईपीएस बृजलाल का जन्‍म सिद्धार्थनगर (Siddharthnagar) के छोटे से गांव गुजरौलिया खालसा में हुआ. वे बेहद गरीब परिवार में जन्मे. वह अनुसूचित जाति की कोरी जाति से ताल्‍लुक रखते हैं.

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यूपी के पूर्व डीजीपी रहे बृजलाल तेजतर्रार आईपीएस अफसरों में गिने जाते हैं. 1977 बैच के आईपीएस अधिकारी बृजलाल का नाम ऐसा है कि यूपी का शायद ही कोई ऐसा जिला हो, जहां अपराधी उनके नाम से वाकिफ ना हों.

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यूपी में सरकारें चाहे जिसकी भी रहीं, हर किसी ने उनकी कानून व्‍यवस्‍था संभालने, प्रशासनिक क्षमता, अपराधियों से निपटने के जज्‍बे को देखते हुए हमेशा कानून-व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी.

वह शख्‍स, जो अपनी का‍बिलियत के दम पर बना देश का पहला दलित मुख्‍यमंत्री

वैसे उन्‍हें बसपा सरकार की सख्त कानून-व्यवस्था का चेहरा माना जाता है. उनकी पहली तैनाती 1982 में बतौर एसपी जालौन रही. जालौन में तैनाती के दौरान उन्होंने कई दस्यु गिरोहों जैसे पूरन सिंह, मलखान सिंह जैसे कुख्यात गिरोहों से मोर्चा लिया. इसके बाद सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने साल 1989 में इटावा का एसएसपी भी बनाया. तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह ने उन्हें साल 1991 में मेरठ में एसएसपी बनाया था. वह पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार में लखनऊ के एसपी सिटी बने.

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वह सबसे लंबे समय तक पहले प्रदेश ADG कानून-व्यवस्था, फिर स्पेशल डीजी और फिर DGP यानि पुलिस प्रमुख बनाए गए.​ अक्टूबर 2011 में बृजलाल को यूपी डीजीपी बनाया गया. साल 2014 में वह रिटायर हुए.

बृजलाल अकेले ऐसे आईपीएस अधिकारी रहे, जिन्‍होंने पीलीभीत के एसएसपी रहने के दौरान आतंकियों का पीछा किया और ऐसा करते हुए वह पंजाब तक जा पहुंचे. अपने दो सिपाहियों को मारने वाले आतंकियों को उन्‍होंने अंजाम तक पहुंचाया.

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इसी वजह से वह आतंकियों की हिट लिस्ट में आए. केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की सिफारिश पर उन्हें लंबे समय तक सुरक्षा दी गई. केंद्र ने उन्हें 25 आदमियों की लंबी-चौड़ी सुरक्षा 10 साल तक दी.

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Fist Dalit CM of India Damodaram Sanjivayya

वह शख्‍स, जो अपनी का‍बिलियत के दम पर बना देश का पहला दलित मुख्‍यमंत्री

DalitAwaaz.com पर देश के सफल दलितों (Successful Dalits) की इस श्रृंखला में हम आपको बता रहे हैं कि उन दलित (Dalit) शख्सियतों के बारे में, जिन्‍होंने समाज में सामाजिक, आर्थिक भेदभाव के बावजूद देश-दुनिया में अपनी एक पहचान बनाई. वह अपनी काबिलियत के दम पर उच्‍च पदों पर जाकर बैठे और सभी के लिए प्रेरणास्‍त्रोत बने.

इस कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के पहले दलित मुख्‍यमंत्री (First Dalit CM of India) के बारे में…

दरअसल, हम सभी मानते हैं कि मायावती देश की पहली दलित मुख्‍यमंत्री (Dalit CM) थीं, लेकिन हम तथ्‍यात्‍मक देखें तो बसपा सुप्रीमो मायावती देश की पहली दलित महिला मुख्‍यमंत्री थीं न की दलित मुख्‍यमंत्री.

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हम आपको बताते हैं देश के पहले दलित सीएम के बारे में. ये थे दामोदरम संजीवय्या (Damodaram Sanjivayya).

दामोदरम संजीवय्या 11 जनवरी 1960 से लेकर 12 मार्च 1962 तक आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के मुख्यमंत्री रहे. संजीवय्या एक भारतीय राज्य के पहले दलित मुख्यमंत्री थे.

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दामोदरम संजीवय्या का जन्म 14 फरवरी 1921 को कुरनूल जिले के कल्लूर मंडल के पेद्दापडु गांव में एक माला परिवार में हुआ. जब वह छोटे थे तो उनके पिता की मृत्यु हो गई. वह म्यूनिसिपल स्कूल में एक शानदार छात्र थे और उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज से कानून में स्नातक की डिग्री ली. एक छात्र के रूप में भी उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया.

दामोदरम संजीवय्या समग्र मद्रास राज्य में मंत्री थे. वह 1950-52 में अनंतिम संसद के सदस्य थे. 1962 में, संजीवैया भी ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (All India Congress Committee) के अध्यक्ष बनने वाले आंध्र प्रदेश के पहले दलित नेता बने. वह 9 जून 1964 और 23 जनवरी 1966 के बीच लाल बहादुर शास्त्री के अधीन श्रम और रोजगार मंत्री थे.

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उन्होंने भारत में श्रम समस्याओं और औद्योगिक विकास पर एक पुस्तक लिखी, जोकि 1970 में ऑक्सफोर्ड और आईबीएच पब्लिशिंग कंपनी, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गई.

हैदराबाद के नामपल्ली में सार्वजनिक उद्यान के सामने उनकी प्रतिमा लगाई गई है. वहीं, हैदराबाद में हुसैन सागर के तट पर एक पार्क को संजीवैया पार्क के रूप में उनके सम्मान में नामित किया गया.

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दामोदरम संजीवय्या राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, देश के प्रमुख कानूनी संस्थानों में से एक विशाखापत्तनम को उनके सम्मान में नामित किया गया है.

इंडिया पोस्ट ने 14 फरवरी 2008 को उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट (INR 5.00) जारी किया.

Damodaram Sanjivayya
दामोदरम संजीवय्या 11 जनवरी 1960 से लेकर 12 मार्च 1962 तक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.

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