Hansi Police

After cricketer Yuvraj Singh now actress Yuvika Chaudhary arrested released on interim bail

SC समाज पर अपमानजनक टिप्‍पणी करने वाली अभिनेत्री युविका चौधरी भी गिरफ्तार

नई दिल्‍ली : अनुसूचित जाति समाज के प्रति अपमानजनक टिप्‍पणी करने को लेकर क्रिकेटर युवराज सिंह (Cricketer Yuvraj Singh) के बाद आज बॉलीवुड अभिनेत्री तथा बिग बॉस में काम कर चुकी युविका चौधरी (Yuvika Chaudhary) को भी हांसी पुलिस ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया. करीब 3 घंटे की पूछताछ के बाद हुई औपचारिक गिरफ्तारी के बाद युविका को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया. इस दौरान युविका चौधरी के साथ करीबन 10 बाउंसर और उसके पति प्रिंस नरूला (Prince Narula) तथा उसके अधिवक्ता भी मौजूद थे.

दरअसल, युविका चौधरी ने बीते 25 मई को अपने ब्लॉग पर एक वीडियो में अनुसूचित जाति समाज के लिए अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद दलित अधिकार कार्यकर्ता एवं वकील रजत कलसन ने थाना शहर हांसी में उक्त अभिनेत्री के खिलाफ अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया था. इस केस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिेनेत्री को जांच में शामिल होने के आदेश दिए थे.

युविका चौधरी के ‘भंगी’ वाले बयान पर बोले पति प्रिंस नरूला- ‘ये तो छोटी सी बात है’

इसके बाद आज युविका चौधरी (Yuvika Chaudhary) ने हांसी पुलिस (Hansi Police) के समक्ष समर्पण कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उनसे डीएसपी कार्यालय हांसी में बिठाकर करीब 3 घंटे पूछताछ की. जिसके बाद पुलिस ने उन्‍हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर बाद में अंतरिम जमानत के आधार पर छोड़ दिया.

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रजत कलसन ने बताया कि अब वह इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. उनकी ओर से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की जाएगी, क्‍योंकि एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) में अंतरिम जमानत का प्रावधान नहीं है. यह आदेश गलत है और इससे समाज में एक्‍ट को लेकर गलत संदेश जाएगा. उन्‍होंने कहा कि हम युवराज के साथ उनकी भी अंतरिम जमानत कैंसिल कवारकर उन्‍हें जेल भिजवाएंगे.

‘भंगी’ वाले बयान पर फंसी युविका चौधरी, गैर जमानती धाराओं के तहत केस दर्ज

बता दें कि शिकायतकर्ता रजत कलसन की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद उक्त अभिनेत्री ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को खारिज कराने के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया था. इसके बाद उक्त अभिनेत्री ने हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे 11 अक्टूबर को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया था. इसके बाद हाईकोर्ट ने उक्त अभिनेत्री को राहत देते हुए उसे अंतरिम जमानत दे दी थी तथा जांच में शामिल होने के आदेश दिए थे.

अब पुलिस युविका चौधरी के खिलाफ हिसार की विशेष अदालत में चालान पेश करेगी, जहां पर उन्‍हें नियमित जमानत करानी पड़ेगी. अगर उक्त अदालत में युविका चौधरी के खिलाफ आरोप साबित हुए और उसे 5 साल तक की सजा भी हो सकती है.

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शिकायतकर्ता रजत कलसन ने युवराज सिंह के खिलाफ भी एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था, जिसमें युवराज सिंह ने 16 अक्टूबर को पुलिस के सामने समर्पण किया था तथा पुलिस ने उन्‍हें औपचारिक गिरफ्तार कर पूछताछ करने के बाद अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया था. इसी तरह की अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में तारक मेहता का उल्टा चश्मा की अभिनेत्री मुनमुन दत्ता के खिलाफ हांसी थाना शहर में मुकदमा दर्ज है तथा उन पर भी पुलिसिया कार्रवाई बाकी है.

गौरतलब है कि अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज मामले में हरियाणा की हांसी पुलिस (Hansi Police) द्वारा शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह (Cricketer Yuvraj Singh) को औपचारिक गिरफ्तार करने के तुरंत बाद अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया था. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर युवराज सिंह कल हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां दो से तीन घंटे की पूछताछ एवं औपचारिक गिरफ्तारी के बाद उन्‍हें अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया था. शिकायतकर्ता वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता रजत कलसन ने पुलिस की कार्रवाई पर अंसुष्टि जताते हुए कहा कि Hansi Police ने नियमों के अनुसार इस एक्‍शन से उन्‍हें अवगत नहीं कराया. साथ ही उन्‍होंने पुलिस पर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) को वीआईपी ट्रिटमेंट दिए जाने का आरोप भी लगाया. साथ ही जल्‍द सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अंतरिम जमानत के आदेश को चुनौती दी जाएगी.

युवराज सिंह के खिलाफ करीब 8 महीने बाद हरियाणा पुलिस ने SC/ST Act में दर्ज की एफआईआर

इस मामले में युवराज सिंह की तरफ से अपने बचाव में दी गई दलीलों से असंतुष्‍ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रिकेट युवराज सिंह को पुलिस के समक्ष सरेंडर करने और जांच में सहयोग देने के आदेश दिए थे. इसके बाद बीते शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां से हांसी पुलिस उन्‍हें हिसार के गजेडिट ऑफि‍सर्स जियो मैस ले गई. यहां युवरात से करीब दो से तीन घंटे से पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्‍हें औपचारिक रूप से अरेस्‍ट कर लिया गया और अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया.

रजत कलसन ने आरोप लगाया कि इस पूरी कार्रवाई के सख्‍त होने की बजाय पुलिस ने युवराज को वीआईपी ट्रिटमेंट दिया. यहां तक की पुलिसवालों ने उनके साथ फोटो तक खिंचवाए. उन्‍होंने कहा कि नियमानुसार पुलिस ने उन्‍हें कार्रवाई से अवगत तक नहीं कराया.

जातिगत टिप्‍पणी मामला: युवराज सिंह नहीं कर रहे जांच में सहयोग, सरकारी वकील ने हाईकोर्ट को बताया

उन्‍होंने बताया कि अब वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. उनकी ओर से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की जाएगी, क्‍योंकि एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) में अंतरिम जमानत का प्रावधान नहीं है. यह आदेश गलत है और इससे समाज में एक्‍ट को लेकर गलत संदेश जाएगा. उन्‍होंने कहा कि हम इस उनकी अंतरिम जमानत को कैंसिल कवारकर जेल भिजवाएंगे.

बता दें कि युवराज पर आरोप है कि उन्होंने बीते साल रोहित शर्मा से लाइव चैट के दौरान युजवेंद्र चहल पर अनुसूचित जाति के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ दलित अधिकार कार्यकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में SC-ST एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए युवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर हाईकोर्ट ने युवराज के खिलाफ पुलिस की उत्पीड़न कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. अभी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है.

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रजत कलसन ने न्‍यूज़18 हिंदी (डिजिटल) को बताया कि इस मामले में युवराज सिंह की तरफ से अपने बचाव में दी गई दलीलों से असंतुष्‍ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रिकेट युवराज सिंह को पुलिस के समक्ष सरेंडर करने और जांच में सहयोग देने के आदेश दिए थे. इसके बाद बीते शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां से हांसी पुलिस उन्‍हें हिसार के गजेडिट ऑफि‍सर्स जियो मैस ले गई. यहां युवरात से करीब दो से तीन घंटे से पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्‍हें औपचारिक रूप से अरेस्‍ट कर लिया गया और अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया.

रजत कलसन ने आरोप लगाया कि इस पूरी कार्रवाई के सख्‍त होने की बजाय पुलिस ने युवराज को वीआईपी ट्रिटमेंट दिया. यहां तक की पुलिसवालों ने उनके साथ फोटो तक खिंचवाए. उन्‍होंने कहा कि नियमानुसार पुलिस ने उन्‍हें कार्रवाई से अवगत तक नहीं कराया.

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बता दें कि युवराज पर आरोप है कि उन्होंने बीते साल रोहित शर्मा से लाइव चैट के दौरान युजवेंद्र चहल पर अनुसूचित जाति के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ दलित अधिकार कार्यकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में SC-ST एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए युवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर हाईकोर्ट ने युवराज के खिलाफ पुलिस की उत्पीड़न कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. अभी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है.

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Yuvraj Singh SC ST Act

Exclusive: युवराज सिंह के खिलाफ मामला कोर्ट पहुंचा, हांसी SP से कोर्ट ने मांगी स्‍टेट्स रिपोर्ट

टीम इंडिया (Indian Cricket Team) के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) द्वारा जातिसूचक शब्‍दों (Casteist Remarks) का इस्‍तेमाल करने के खिलाफ शिकायत दिए जाने के बावजूद हरियाणा पुलिस (Haryana Police) द्वारा केस दर्ज न किए जाने के बाद अब मामला अदालत तक पहुंच गया है. दलित सामाजिक अधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता रजत कलसन ने हिसार जिला अदालत की एससी-एसटी स्‍पेशल कोर्ट में शिकायत दाखिल कर युवराज सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के पुलिस को निर्देश दिए जाने की मांग की.

हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत के न्यायाधीश बीपी सिरोही ने शिकायतकर्ता रजत कलसन की शिकायत पर सुनवाई करते हुए बुधवार को हांसी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर युवराज के खिलाफ दिनांक 2 जून को दी गई शिकायत पर की गई कार्रवाई की स्‍टेट्स रिपोर्ट मांगी है.

अदालत के नोटिस के बाद हांसी के एसपी को इस मामले में अधिवक्ता रजत कलसन की शिकायत पर की गई कार्रवाई का स्टेटस अदालत के समक्ष रखना होगा.

स्‍पेशल कोर्ट में दाखिल की गई शिकायत
वकील रजत कलसन की तरफ से स्‍पेशल जज (SC/ST Act)  बीपी सिरोही की अदालत में यह शिकायत दाखिल की गई. इस शिकायत में उन्‍होंने लिखा है, बीते 1 जून 2020 को उन्‍होंने इंटरनेट के जरिये अपने मोबाइल फोन पर वीडियो देखी, जो युवराज सिंह द्वारा पोस्‍ट की गई थी और इस वीडियो में वह रोहित शर्मा (Rohit Sharma), जोकि भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्‍य और मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी हैं, से बातचीत कर रहे थे. इस बातचीत में युवराज कहते दिखे कि ये भंगी लोगों को और कोई काम नहीं है.

युवराज ने जानबूझकर अनुसूच‍ित जाति समुदाय का नाम अपशब्‍द के तौर पर लिया
शिकायत में उन्‍होंने कहा है कि युवराज सिंह ने इरादतन और जानबूझकर अनुसूच‍ित जाति समुदाय का नाम अपशब्‍द के भाव से अपने दोस्‍त के लिए इस्‍तेमाल किया. अनुसूच‍ित जाति के लिए इस अपमाजनक टिप्‍पणी पर रोहित शर्मा भी हंस रहे थे. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और इसे लाखों लोगों ने देखा.

युवराज की टिप्‍पणी से शेड्यूल कास्‍ट कम्‍युनिटी ने अपमानित महसूस किया
कलसन ने शिकायत में आगे कहा, युवराज सिंह ने साफ तौर पर सोशल मीडियो प्‍लेटफॉर्म पर अपशब्‍द के तौर पर अनुसूचित जाति के समुदाय का नाम लिया और उनके द्वारा ऐसा किए जाने से न केवल आवेदक बल्कि पूरे शेड्यूल कास्‍ट कम्‍युनिटी ने अपमानित महसूस किया. उस वीडियो में जानबूझकर की गई टिप्पणी अपमान, गाली देने के इरादे से की गई, जोकि सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर उसके पूरे SC/ST समुदाय को अपमानित कर रही है और यह सार्वजनिक दृश्य में है.

शिकायत में बताया, IO ने कहा- बिना एसपी की इजाजत केस दर्ज नहीं कर सकते…
शिकायत में उनकी तरफ से कोर्ट को बताया गया है कि उन्‍होंने बीते 2 जून को एसपी, हांसी लोकेंद्र सिंह के समक्ष शिकायत दाखिल की थी, जिसके बाद डीएसपी, हांसी रोहतास सिहाग को जांच अधिकारी बनाया गया. जांच अधिकारी ने प्रारंभिक जांच शुरू की और कानून की धारा 18-ए का उल्‍लंघन किया. शिकायतकर्ता ने डीएसपी हांसी को वह आपत्तिजनक वीडियो, अपना कास्‍ट सर्टिफिकेट, सेक्‍शन 18-ए, रूल 5 और सेक्‍शन 15-ए (9) की प्रिंटिड समरी दी. उनकी तरफ से कहा गया कि 8 जून को उन्‍होंने डीएसपी को शाम 7.30 बजे किया तथा IO ने उनसे कहा कि वह बिना एसपी की इजाजत के केस दर्ज नहीं कर सकते.

युवराज के हैं बड़े पॉलिटिकल लिंक- कलसन
उनकी तरफ से आगे कहा गया है कि आरोपी एक शक्तिशाली व्यक्तित्व है और उसे बड़े राजनीतिक एवं प्रशासनिक संपर्क हैं. उनकी तरफ से हांसी के एसपी और डीएसपी के अलावा पुलिस स्‍टेशन सिटी हांसी के इंचार्ज से मुलाकात की गई, लेकिन केस से संबंधित कई कागजात और सबूत भी दिखाए लेकिन उक्‍त पुलिस अधिकारियों का व्‍यवहार देखकर लगता है कि उन्‍हें पुलिस की तरफ से इस केस में कोई न्‍याय नहीं मिलेगा.

लिहाजा उनकी तरफ से कोर्ट से मांग की गई कि युवराज सिंह के खिलाफ SC/ST POA Act की धारा 14, 15-A (9), Rule 5 तथा आईपीसी की धारा 154 के तहत एफआईआर दर्ज करने के आदेश थाना शहर हांसी के SHO को दिए जाएं तथा मामले की जांच की जाए.

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