एडवोकेट अमित साहनी

UP Raibareli Dalit Youth Beaten to Death

दलित आवाज़ की खबर का असर, रायबरेली दलित युवक की मौत का मामला राष्‍ट्रपति तक पहुंचा

उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के रायबरेली (Raebareli) में दलित (Dalit) युवक की गाय के महज उनके खेत में जाकर चरने पर उच्‍च जाति के लोगों द्वारा युवक को बेदर्दी से पीटने और उसकी मौत हो जाने के मामले की दलित आवाज़ द्वारा की गई कवरेज (पढ़ें इस घटना की पूरी कवरेज) का व्‍यापक असर देखने को मिला है. इस मामले को लेकर राष्‍ट्रपति (President of India), राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (National Commission for Scheduled Castes) एवं राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) के समक्ष शिकायत की गई है. इस शिकायत में मामले की उच्‍चस्‍तरीय निष्‍पक्ष जांच कराकर समाज में व्‍यापक संदेश देने एवं पीडि़त के परिवारवालों को उपर्युक्‍त मुआवजा दिए जाने की मांग भी की गई है.

बता दें कि दलित आवाज़ (Dalit Awaaz) द्वारा इस मामले की रिपोर्ट प्रकाशित किए जाने के बाद इसे सोशल मीडिया पर काफी रिस्‍पॉन्‍स मिला. अभी तक इस खबर को सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्मस पर 37000 बार से ज्‍यादा शेयर किया जा चुका है. केवल देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से लोग इसे पढ़ रहे हैं. दलित युवक के साथ हुई इस दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना पर अपनी नाराजगी जता रहे हैं.

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एडवोकेट और सोशल एक्टिविस्‍ट अमित साहनी (Advocate and Social Activist Amit Sahni) द्वारा राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) के अलावा राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग व राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन को पत्र लिखकर इस मामले की शिकायत की गई है, जिसमें कहा गया है कि इस मामले की उच्‍चस्‍तरीय निष्‍पक्ष जांच कराई जाए.

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एडवोकेट अमित साहनी की ओर से भेजे गए इस पत्र में कहा गया है ‘दलित आवाज़ डॉट कॉम (dalitawaaz.com) एवं एक अन्‍य समाचार पोर्टल पर प्रकाशित खबर से रायबरेली में दलितों (Dalit) की बदतर स्थिति और जातिगत भेदभाव (Caste Discrimnation) का गंभीर मामला सामने आया. इस न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार, रायबरेली जिले के भदोखर थाना क्षेत्र के बेला खारा गांव के निवासी राम नरेश गौतम का पुत्र राम शंकर 27 अप्रैल 2020 को अपने जानवर चरा रहा था. इस दौरान चरते-चरते उसके जानवर गांव के दबंग प्रमोद बाजपेई के खेत मे चले गए. इस पर प्रमोद ने सिद्धार्थ बाजपेई के साथ मिलकर राम नरेश को बुरी तरह पीटा. इससे राम नरेश बुरी तरह चोटिल हो गया. राम नरेश के घरवालों ने इसकी शिकायत थाने में की, लेकिन दबंगों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया.

पत्र में कहा गया है कि यहां तक की पुलिस ने दलित किशोर को मेडिकल सुविधाएं दिलवाने के लिए कोई कार्रवाई की, जिसके चलते दलित किशोर की मौत हो जाने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और थानेदार ने महज शिकायत दर्ज करते हुए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पर कार्यवाही करने की बात कही.

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एडवोकेट साहनी की तरफ से कहा गया है कि दलितों पर अत्याचार का ये कोई अकेला मामला नहीं है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश विशेषकर रायबरेली में आए दिन दलितों पर अत्याचार के मामले आम हो चले हैं. ऐसी घटनाएं पूरे समाज पर कलंक हैं कि आजादी के 70 से अधिक बरस बीत जाने के बाद भी दलितों को इतनी ही भावना से देखा जाता है और सही मायने में दलितों के प्रति सामाजिक नजरिया बतलाती हैं और यह भी प्रदर्शित करती हैं कि दलितों का समाज में किस तरह शोषण होता आया है और कानूनी फेरबदल होने के बावजूद भी दलितों पर सामाजिक बर्बरता समाप्त नहीं हो पाई है.

UP Raibareli Dalit Youth Beaten to Death

उनकी तरफ से मांग की गई है कि दोषियों के उच्च जाति व् रसूखदार परिवार से होने के कारण उक्त दोषियों के खिलाफ उपयुक्त कार्यवाही न होने का अंदेशा है और यह गुजारिश की जाती है कि आप पूरे मामले कि उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित करें और मृतक व उसके परिवार को प्रोटेक्शन मुहैया करवाई जाए ताकि जातिगत हिंसा को उस इलाके में रोका जा सके.

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साथ ही कहा गया है कि मृतक के परिवार को सरकार से तरफ से उचित मुआवज़ा दिलवाया जाए, क्योंकि परिवार के कमाने वाले सदस्य के जाने के पश्चात परिवार पर जो आर्थिक संकट आया है, उसकी आंशिक भरपाई हो सके. पत्र में आगे कहा गया है कि इस पूरे मसले में उचित कार्रवाई होने से ही समाज में संदेश जाएगा कि दलितों, पिछड़े वर्गों और जातिगत अपराधों को समाज में जगह नहीं दी जाएगी और ऐसा करने वाले लोगों को खिलाफ भविष्य में कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी.

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Advocate Amit Sahni

भारतीय संविधान के प्रावधान, जो दलितों को देते हैं विशेष अधिकार…

(ब्‍लॉग- अमित साहनी)

भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार के रूप में समानता का अधिकार देता है. भारतीय संविधान के भाग 3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक मूल अधिकारों का वर्णन है.

आर्टिकल 14- समता का अधिकार (Right to Equality)
आर्टिकल 14 किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता या विधियों के सामान सरंक्षण से वंचित नहीं करेगा. भारतीय सविधान में शैक्षिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के पक्ष में कानून बनाने और आरक्षण देने सम्बंधित प्रावधान है और जिसके तहत न केवल शैक्षिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग बल्कि महिलाओ और बच्चो के पक्ष में भी कानून बनाने का प्रावधान है और ऐसे कानून सांविधानिक रूप से पूर्णतय वैध होंगे.

आर्टिकल 15 और 16 में शैक्षिक और सामाजिक रूप से कमजोर नागरिकोंं के उत्थान के लिए जरुरी प्रावधान हैं, जिसके तहत इस वर्ग को शिक्षा, नौकरियों और प्रमोशन में विशेष दर्जा मिलता है और इसका एकमात्र उद्देश्य है कि इस वर्ग के पिछड़ेपन को दूर कर इसे सामाजिक समानता दिलाकर बाकी वर्गों के बराबर दर्जा देना है.

आर्टिकल 15 कहता है कि; राज्य अपने किसी नागरिक के साथ केवल धर्म, जाति, लिंग, नस्ल और जन्म स्थान या इनमें से किसी भी आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा.

आइये जानते हैं क्या कहता है अनुच्छेद 15 ?

धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध (Discrimination on grounds of religion, race, caste, sex or place of birth)

(1) राज्य किसी नागरिक के साथ धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर या इनमें से किसी एक के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा.
(2) किसी नागरिक के साथ धर्म, नस्ल, जाति, जन्मस्थान के आधार पर या इनमें से किसी के आधार पर निम्‍न संबंध में भेदभाव नहीं होगा-

(ए) दुकानों, सार्वजनिक रेस्त्रां, होटल और सार्वजनिक मनोरंजन के साधन तक पहुंच, अथवा
(बी) कुएं , जलाशय, स्नानघाट, सड़क और सार्वजनिक आश्रय जिसका रखरखाव पूर्णतः या अंशतः राज्य निधि से हो रहा है या आम जनता के प्रयोग के लिए समर्पित हो, का प्रयोग

(3) राज्‍य महिलाओं व बच्‍चों के लिए विशेष प्रावधान बना सकते हैं.
(4) इस अनुच्छेद में या अनुच्छेद 29 (2) का कोई विषय राज्य को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े नागरिकों की प्रगति के लिए कोई विशेष प्रावधान बनाने से नहीं रोकेगा.

अनुच्छेद 15 (4) संविधान में संवैधानिक (प्रथम संशोधन) अधिनियम, 1951 के द्वारा जोड़ा गया, इसने कई अनुच्छेदों को संशोधित किया. इस प्रावधान ने राज्य को तकनीकी, यांत्रिकी और चिकित्सा महाविद्यालयों तथा वैज्ञानिक व विशेषीकृत कोर्स के संस्थान समेत शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए सीटें आरक्षित करने हेतु अधिकार संपन्न बनाया है.

आर्टिकल 16 एम्प्लॉयमेंट में समान अवसरों की बात करता है… (Equality of opportunity in matters of public employment)
(1) सभी नागरिकों के लिए एम्प्लॉयमेंट या अपॉइंटमेंट के सामान अवसर होंगे.
(2) एम्प्लॉयमेंट के मसलों में राज्य किसी नागरिक के साथ धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर या इनमें से किसी एक के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा.
(3) राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेशों में नियुक्ति के सन्दर्भ में सरकार उस राज्य के निवासी होने बाबत कानून बना सकती है.
4) सरकार पिछड़े नागरिकों जिनका सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है, उनको नौकरियों में आरक्षण देने बाबत कानून बना सकती है.
4 A) सरकार पिछड़े नागरिकों जिनका सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है, उनको नौकरियों की प्रमोशन और परिणामी सेनिओरिटी में प्रमोशन में आरक्षण बाबत कानून बना सकती है. 
4 B) सरकार पिछड़े नागरिकों जिनका सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है, और जिनकी रिक्तिया एक वर्ष में भरी नहीं गयी है उनके सम्बन्ध में कानून बना सकती है कि ऐसी रिक्तियां अगले साल भरी जाए और उसमें अगले साल कि होने वाली रिक्तिओं में जोड़कर उसे अगले साल कि अधिकतम 50 फीसदी सीमा में न गिना जाए.

(एडवोकेट अमित साहनी जनहित मुद्दों, दलितों एवं वंचित वर्ग के कानूनी अधिकारों को लेकर सक्रिय हैं और दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में दर्जनों जनहित याचिकाएं डाल उनके हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं…)