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एससी/एसटी एक्‍ट

Yuvraj Singh SC ST Act

Exclusive: युवराज सिंह के खिलाफ मामला कोर्ट पहुंचा, हांसी SP से कोर्ट ने मांगी स्‍टेट्स रिपोर्ट

टीम इंडिया (Indian Cricket Team) के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) द्वारा जातिसूचक शब्‍दों (Casteist Remarks) का इस्‍तेमाल करने के खिलाफ शिकायत दिए जाने के बावजूद हरियाणा पुलिस (Haryana Police) द्वारा केस दर्ज न किए जाने के बाद अब मामला अदालत तक पहुंच गया है. दलित सामाजिक अधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता रजत कलसन ने हिसार जिला अदालत की एससी-एसटी स्‍पेशल कोर्ट में शिकायत दाखिल कर युवराज सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के पुलिस को निर्देश दिए जाने की मांग की.

हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत के न्यायाधीश बीपी सिरोही ने शिकायतकर्ता रजत कलसन की शिकायत पर सुनवाई करते हुए बुधवार को हांसी के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर युवराज के खिलाफ दिनांक 2 जून को दी गई शिकायत पर की गई कार्रवाई की स्‍टेट्स रिपोर्ट मांगी है.

अदालत के नोटिस के बाद हांसी के एसपी को इस मामले में अधिवक्ता रजत कलसन की शिकायत पर की गई कार्रवाई का स्टेटस अदालत के समक्ष रखना होगा.

स्‍पेशल कोर्ट में दाखिल की गई शिकायत
वकील रजत कलसन की तरफ से स्‍पेशल जज (SC/ST Act)  बीपी सिरोही की अदालत में यह शिकायत दाखिल की गई. इस शिकायत में उन्‍होंने लिखा है, बीते 1 जून 2020 को उन्‍होंने इंटरनेट के जरिये अपने मोबाइल फोन पर वीडियो देखी, जो युवराज सिंह द्वारा पोस्‍ट की गई थी और इस वीडियो में वह रोहित शर्मा (Rohit Sharma), जोकि भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्‍य और मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी हैं, से बातचीत कर रहे थे. इस बातचीत में युवराज कहते दिखे कि ये भंगी लोगों को और कोई काम नहीं है.

युवराज ने जानबूझकर अनुसूच‍ित जाति समुदाय का नाम अपशब्‍द के तौर पर लिया
शिकायत में उन्‍होंने कहा है कि युवराज सिंह ने इरादतन और जानबूझकर अनुसूच‍ित जाति समुदाय का नाम अपशब्‍द के भाव से अपने दोस्‍त के लिए इस्‍तेमाल किया. अनुसूच‍ित जाति के लिए इस अपमाजनक टिप्‍पणी पर रोहित शर्मा भी हंस रहे थे. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और इसे लाखों लोगों ने देखा.

युवराज की टिप्‍पणी से शेड्यूल कास्‍ट कम्‍युनिटी ने अपमानित महसूस किया
कलसन ने शिकायत में आगे कहा, युवराज सिंह ने साफ तौर पर सोशल मीडियो प्‍लेटफॉर्म पर अपशब्‍द के तौर पर अनुसूचित जाति के समुदाय का नाम लिया और उनके द्वारा ऐसा किए जाने से न केवल आवेदक बल्कि पूरे शेड्यूल कास्‍ट कम्‍युनिटी ने अपमानित महसूस किया. उस वीडियो में जानबूझकर की गई टिप्पणी अपमान, गाली देने के इरादे से की गई, जोकि सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर उसके पूरे SC/ST समुदाय को अपमानित कर रही है और यह सार्वजनिक दृश्य में है.

शिकायत में बताया, IO ने कहा- बिना एसपी की इजाजत केस दर्ज नहीं कर सकते…
शिकायत में उनकी तरफ से कोर्ट को बताया गया है कि उन्‍होंने बीते 2 जून को एसपी, हांसी लोकेंद्र सिंह के समक्ष शिकायत दाखिल की थी, जिसके बाद डीएसपी, हांसी रोहतास सिहाग को जांच अधिकारी बनाया गया. जांच अधिकारी ने प्रारंभिक जांच शुरू की और कानून की धारा 18-ए का उल्‍लंघन किया. शिकायतकर्ता ने डीएसपी हांसी को वह आपत्तिजनक वीडियो, अपना कास्‍ट सर्टिफिकेट, सेक्‍शन 18-ए, रूल 5 और सेक्‍शन 15-ए (9) की प्रिंटिड समरी दी. उनकी तरफ से कहा गया कि 8 जून को उन्‍होंने डीएसपी को शाम 7.30 बजे किया तथा IO ने उनसे कहा कि वह बिना एसपी की इजाजत के केस दर्ज नहीं कर सकते.

युवराज के हैं बड़े पॉलिटिकल लिंक- कलसन
उनकी तरफ से आगे कहा गया है कि आरोपी एक शक्तिशाली व्यक्तित्व है और उसे बड़े राजनीतिक एवं प्रशासनिक संपर्क हैं. उनकी तरफ से हांसी के एसपी और डीएसपी के अलावा पुलिस स्‍टेशन सिटी हांसी के इंचार्ज से मुलाकात की गई, लेकिन केस से संबंधित कई कागजात और सबूत भी दिखाए लेकिन उक्‍त पुलिस अधिकारियों का व्‍यवहार देखकर लगता है कि उन्‍हें पुलिस की तरफ से इस केस में कोई न्‍याय नहीं मिलेगा.

लिहाजा उनकी तरफ से कोर्ट से मांग की गई कि युवराज सिंह के खिलाफ SC/ST POA Act की धारा 14, 15-A (9), Rule 5 तथा आईपीसी की धारा 154 के तहत एफआईआर दर्ज करने के आदेश थाना शहर हांसी के SHO को दिए जाएं तथा मामले की जांच की जाए.

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(Dalit Awaaz.com के फेसबुक पेज को Like करें और Twitter पर फॉलो जरूर करें)

Yuvraj SIngh Caste Comment

Exclusive: युवराज सिंह के माफी मांगने से कुछ नहीं होगा, उनके खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी- एडवोकेट कलसन

टीम इंडिया (Indian Cricket Team) के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) द्वारा जातिसूचक शब्‍दों (Casteist Remarks) का इस्‍तेमाल किए जाने पर उपजे विवाद के बाद शुक्रवार को माफी मांगे जाने के बाद के बाद भी विवाद खत्‍म होता नहीं दिख रहा है. इस मामले में शिकायतकर्ता दलित सामाजिक अधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता रजत कलसन का कहना है कि युवराज सिंह के माफी मांगने से कुछ नहीं होगा. उन्‍होंने अपमानजनक तरीके से जातिसूचक शब्‍दों का इस्‍तेमाल कर अपराध किया. उनके खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी.

DalitAwaaz.com से विशेष बातचीत में सामाजिक अधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता रजत कलसन ने कहा कि ‘युवराज सिंह ने ट्विटर माफी मांगकर पर माना है कि उन्‍होंने जातिसूचक शब्‍दों का इस्‍तेमाल कर अपराध किया है. उन्‍होंने कहा कि युवराज सिंह के खिलाफ जिन धाराओं में केस बन रहा है, वह नॉन कंपाउंडेबल हैं, यानि उनमें समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है. उनका कहना है कि युवराज सिंह ने गलती की है और उनके खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी’.

बाद में उन्‍होंने सोशल मीडिया पर भी यह बयान जारी किया.

 

दरअसल, हाल ही में युवराज सिंह ने भारतीय टीम के सलामी बल्‍लेबाज रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के साथ लाइव वेब चैट के दौरान गेंदबाज युजवेंद्र चहल का उल्‍लेख होने पर भंगी शब्‍द का इस्‍तेमाल किया था, जिसके बाद इस वीडियो पर लोगों ने गहरी नाराजगी जताई थी और बाकायदा सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) पर बकायदा #युवराज_सिंह_माफी_मांगो टॉप ट्रेंड के साथ उनसे माफी की मांग की गई.

इस वीडियो पर नाराज़गी जताते हुए युवराज के खिलाफ दलित सामाजिक अधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता रजत कलसन द्वारा युवराज के खिलाफ हरियाणा (Haryana) हांसी (Hansi) के पुलिस अधीक्षक के समक्ष दायर शिकायत की थी. हांसी एसपी को दी गई इस लिखित शिकायत में युवराज के खिलाफ केस दर्ज कर उन्‍हें गिरफ्तार करने की मांग की गई है.

इसके विवाद और कानूनी मुश्किल में पड़ने के बाद  युवराज ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए लिखा, ‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं रंग, जाति, पंथ या लिंग के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव में विश्वास नहीं करता हूं. मैंने लोगों की भलाई में अपनी जिंदगी जी है और आगे भी ऐसा ही जीना चाहता हूं. मैं प्रत्‍येक व्यक्ति का सम्मान करता हूं.’

ट्वीट कर युवराज सिंह ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि मैं अपने दोस्तों से बात कर रहा था और उस समय मेरी बात को गलत तरीके से लिया गया, जो अनुचित था. एक जिम्मेदार भारतीय होने के नाते मैं कहना चाहता हूं कि अनजाने में अगर मेरी बातों से किसी को दुख पहुंचा है, तो मैं खेद व्यक्त करता हूं.’

उन्‍होंने कहा कि भारत और उसके सभी लोगों के लिए मेरा प्यार शाश्वत है.

 

उल्‍लेखनीय कि वकील कलसन द्वारा हांसी पुलि‍स को दी गई शिकायत के आधार पर हांसी पुलिस ने बीते बुधवार को उनके बयान दर्ज कर लिए. बुधवार को पुलिस ने द्वारा यह कानूनी प्रकिया अपनाई गई.

वकील रजत कलसन ने DalitAwaaz.com को बताया था कि, डीएसपी रोहताश सिंह ने बुधवार को उनके Crpc 161 के बयान दर्ज किए गए. उनके अनुसार, पुलिस ने उन्‍हें आश्‍वस्‍त किया है कि वह इस मामले में गंभीर हैं और इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी राय ली जा रही है. इस बारे में जल्‍द ही सूचना दे दी जाएगी.

Read- संगरूर में शुरू हुआ दलित महिलाओं का यह आंदोलन हर औरत के लिए सीख है…

इससे पहले बुधवार को ही संबंधित पुलिस की ओर से शिकायतकर्ता से उनसे मामले की डीवीडी मांगी गई, साथ ही उनका जाति प्रमाण पत्र भी मांगा गया और उन्‍हें जांच अधिकारी के पास भेजा गया. अनुसूचित जाति आयोग को भेजी गई शिकायत के बाद कमिशन ने भी हांसी पुलिस को 15 द‍िन में एक्‍शन टेकन रिपोर्ट देने को कहा.

दरअसल, सोशल मीडिया पर यह मामला सामने आने के बाद मंगलवार को एडवोकेट रजन कलसन ने एसपी और SC आयोग को भेजी शिकायत में लिखा था, जाट जाति से ताल्‍लुक रखने वाले युवराज सिंह सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में अपने साथी क्रिकेटर से बातचीत करते हुए दलित समाज के खिलाफ जानबूझकर उनका अपमान करने की नीयत से टिप्‍पणी की कि ये भंगी लोगों को कोई काम नहीं है.

इस दौरान उनके साथ बातचीत कर रहे रोहित शर्मा (Rohit Sharma) सवर्ण जाति से हैं. रोहित शर्मा ने उक्‍त टिप्‍पणी को सुनने के बाद युवराज की बात पर हंसकर युवराज की दलित समाज के खिलाफ टिप्‍पणी पर सहमति जाहिर की.

शिकायत में कहा गया कि उक्‍त टिप्‍पणी सोशल मीडिया पर वायरल है तथा सोशल मीडिया पर उक्‍त वीडियो में दलित समाज के खिलाफ अपमानजनकर टिप्‍पणी को देश, विदेश के लाखों करोड़ों लोगों ने देखा है, जिससे प्रार्थी तथा इस शिकायत पर हस्‍ताक्षर करने वाले दलित समाज के गवाहों की भावनाएं बतौर दलित समाज के सदस्‍य आहत हुई हैं.

वकील रजत कलसन ने अपनी शिकायत में कहा कि युवराज सिंह ने जानबूझकर उक्‍त टिप्‍पणी कर पूरे दलित समाज को नीचा दिखाने व अपमानित करने का काम किया तथा सवर्ण तथा दलित समुदायों के बीच दुश्‍मनी करने का व उनमें दंगा फैलाने का प्रयास किया है, जिससे देश का सामाजिक भाईचारा व सौहार्द खराब होने की आशंका है तथा उन्‍होंने यह टिप्‍पणी कर संविधान में देश की अखंडता, एकता व भाईचारे को तोड़ने का अपराध किया है.

शिकायत में एसपी से मांग की गई है कि युवराज सिंह के खिलाफ अनुसूचित जाति व जनजाति अत्‍याचार अधिनियम (SC/ST Act) तथा आईपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तार किया जाए.

टीम इंडिया (Indian Cricket Team) के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) जातिसूचक शब्‍दों (Casteist Remarks) का इस्‍तेमाल कर नए विवाद में फंस गए हैं. युवराज सिंह द्वारा गेंदबाज युजवेंद्र चहल को भंगी कह दिए जाने के बाद उन्‍हें नाराजगी का सामना करना पड़ा है. लोगों की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) पर बकायदा #युवराज_सिंह_माफी_मांगो टॉप ट्रेंड में रहा.

दरअसल, युवराज सिंह भारतीय टीम के सलामी बल्‍लेबाज रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के साथ लाइव वेब चैट कर रहे थे तभी उन्होंने इस जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया.

जानिए कौन सी बातें हैं, SC/ST Act के तहत अपराध…

लाइव चैट में युवराज और रोहित बात कर रहे थे. इस दौरान युवराज ने कहा कि कुलदीप भी ऑनलाइन आ गया. उधर से रोहित शर्मा बोलते हैं कि कुलदीप ऑनलाइन है, ये सब ऑनलाइन हैं, ये सब ऐसे ही बैठे हुए हैं… इतने में युवराज सिंह बोलते हैं कि ये भंगी लोगों को कोई काम नहीं है यूज़ी को. यूज़ी को देखा क्‍या फोटो डाला है अपनी फैमिली के साथ. मैंने उसको यही बोला कि अपने बाप को नचा रहा है, तू पागल तो नहीं है @#$%… यह सुनकर युवराज सिंह हंस देते हैं.

इस तरह इस चैट में युवराज द्वारा युजवेंद्र को भंगी कहे जाने के बाद सोमवार रात से सोशल मीडिया पर युवराज सिंह से माफी मांगने को कहा जा रहा है. टि्वटर पर #युवराज_सिंह_माफी_मांगो ट्रेंड पर लोग तरह तरह के कमेंट कर उनसे माफी मांगने और अपनी नाराजगी भरी प्रतिक्रिया जाहिर कर रहे हैं.

Twitter पर #युवराज_सिंह_माफी_मांगो ट्रेंड पर लोगों के सभी कमेंट देखने के लिए यहां क्लिक करें…

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(Dalit Awaaz.com के फेसबुक पेज को Like करें और Twitter पर फॉलो जरूर करें)

Yuvraj Singh apologized caste comment

युवराज सिंह ने जातिसूचक टिप्‍पणी पर मांगी माफी, बोले- ‘लोगों की भलाई के ल‍िए ही जीना चाहता हूं’

टीम इंडिया (Indian Cricket Team) के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) द्वारा जातिसूचक शब्‍दों (Casteist Remarks) का इस्‍तेमाल किए जाने पर उपजे विवाद के बाद युवराज ने शुक्रवार को माफी मांग ली. उन्‍होंने ट्विटर पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि अगर उनकी बात से किसी की भावना को ठेस पहुंची, तो वह उसके लिए वह माफी मांगते हैं.

दरअसल, हाल ही में युवराज सिंह ने भारतीय टीम के सलामी बल्‍लेबाज रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के साथ लाइव वेब चैट के दौरान गेंदबाज युजवेंद्र चहल का उल्‍लेख होने पर भंगी शब्‍द का इस्‍तेमाल किया था, जिसके बाद इस वीडियो पर लोगों ने गहरी नाराजगी जताई थी और बाकायदा सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) पर बकायदा #युवराज_सिंह_माफी_मांगो टॉप ट्रेंड के साथ उनसे माफी की मांग की गई.

इस वीडियो पर नाराज़गी जताते हुए युवराज के खिलाफ दलित सामाजिक अधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता रजत कलसन द्वारा युवराज के खिलाफ हरियाणा (Haryana) हांसी (Hansi) के पुलिस अधीक्षक के समक्ष दायर शिकायत की थी. हांसी एसपी को दी गई इस लिखित शिकायत में युवराज के खिलाफ केस दर्ज कर उन्‍हें गिरफ्तार करने की मांग की गई है.

इसके विवाद और कानूनी मुश्किल में पड़ने के बाद  युवराज ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए लिखा, ‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं रंग, जाति, पंथ या लिंग के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव में विश्वास नहीं करता हूं. मैंने लोगों की भलाई में अपनी जिंदगी जी है और आगे भी ऐसा ही जीना चाहता हूं. मैं प्रत्‍येक व्यक्ति का सम्मान करता हूं.’

ट्वीट कर युवराज सिंह ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि मैं अपने दोस्तों से बात कर रहा था और उस समय मेरी बात को गलत तरीके से लिया गया, जो अनुचित था. एक जिम्मेदार भारतीय होने के नाते मैं कहना चाहता हूं कि अनजाने में अगर मेरी बातों से किसी को दुख पहुंचा है, तो मैं खेद व्यक्त करता हूं.’

उन्‍होंने कहा कि भारत और उसके सभी लोगों के लिए मेरा प्यार शाश्वत है.

 

उल्‍लेखनीय कि वकील कलसन द्वारा हांसी पुलि‍स को दी गई शिकायत के आधार पर हांसी पुलिस ने बीते बुधवार को उनके बयान दर्ज कर लिए. बुधवार को पुलिस ने द्वारा यह कानूनी प्रकिया अपनाई गई.

वकील रजत कलसन ने DalitAwaaz.com को बताया था कि, डीएसपी रोहताश सिंह ने बुधवार को उनके Crpc 161 के बयान दर्ज किए गए. उनके अनुसार, पुलिस ने उन्‍हें आश्‍वस्‍त किया है कि वह इस मामले में गंभीर हैं और इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी राय ली जा रही है. इस बारे में जल्‍द ही सूचना दे दी जाएगी.

Read- संगरूर में शुरू हुआ दलित महिलाओं का यह आंदोलन हर औरत के लिए सीख है…

इससे पहले बुधवार को ही संबंधित पुलिस की ओर से शिकायतकर्ता से उनसे मामले की डीवीडी मांगी गई, साथ ही उनका जाति प्रमाण पत्र भी मांगा गया और उन्‍हें जांच अधिकारी के पास भेजा गया. अनुसूचित जाति आयोग को भेजी गई शिकायत के बाद कमिशन ने भी हांसी पुलिस को 15 द‍िन में एक्‍शन टेकन रिपोर्ट देने को कहा.

दरअसल, सोशल मीडिया पर यह मामला सामने आने के बाद मंगलवार को एडवोकेट रजन कलसन ने एसपी और SC आयोग को भेजी शिकायत में लिखा था, जाट जाति से ताल्‍लुक रखने वाले युवराज सिंह सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में अपने साथी क्रिकेटर से बातचीत करते हुए दलित समाज के खिलाफ जानबूझकर उनका अपमान करने की नीयत से टिप्‍पणी की कि ये भंगी लोगों को कोई काम नहीं है.

इस दौरान उनके साथ बातचीत कर रहे रोहित शर्मा (Rohit Sharma) सवर्ण जाति से हैं. रोहित शर्मा ने उक्‍त टिप्‍पणी को सुनने के बाद युवराज की बात पर हंसकर युवराज की दलित समाज के खिलाफ टिप्‍पणी पर सहमति जाहिर की.

शिकायत में कहा गया कि उक्‍त टिप्‍पणी सोशल मीडिया पर वायरल है तथा सोशल मीडिया पर उक्‍त वीडियो में दलित समाज के खिलाफ अपमानजनकर टिप्‍पणी को देश, विदेश के लाखों करोड़ों लोगों ने देखा है, जिससे प्रार्थी तथा इस शिकायत पर हस्‍ताक्षर करने वाले दलित समाज के गवाहों की भावनाएं बतौर दलित समाज के सदस्‍य आहत हुई हैं.

वकील रजत कलसन ने अपनी शिकायत में कहा कि युवराज सिंह ने जानबूझकर उक्‍त टिप्‍पणी कर पूरे दलित समाज को नीचा दिखाने व अपमानित करने का काम किया तथा सवर्ण तथा दलित समुदायों के बीच दुश्‍मनी करने का व उनमें दंगा फैलाने का प्रयास किया है, जिससे देश का सामाजिक भाईचारा व सौहार्द खराब होने की आशंका है तथा उन्‍होंने यह टिप्‍पणी कर संविधान में देश की अखंडता, एकता व भाईचारे को तोड़ने का अपराध किया है.

शिकायत में एसपी से मांग की गई है कि युवराज सिंह के खिलाफ अनुसूचित जाति व जनजाति अत्‍याचार अधिनियम (SC/ST Act) तथा आईपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करके गिरफ्तार किया जाए.

टीम इंडिया (Indian Cricket Team) के पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) जातिसूचक शब्‍दों (Casteist Remarks) का इस्‍तेमाल कर नए विवाद में फंस गए हैं. युवराज सिंह द्वारा गेंदबाज युजवेंद्र चहल को भंगी कह दिए जाने के बाद उन्‍हें नाराजगी का सामना करना पड़ा है. लोगों की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ट्विटर (Twitter) पर बकायदा #युवराज_सिंह_माफी_मांगो टॉप ट्रेंड में रहा.

दरअसल, युवराज सिंह भारतीय टीम के सलामी बल्‍लेबाज रोहित शर्मा (Rohit Sharma) के साथ लाइव वेब चैट कर रहे थे तभी उन्होंने इस जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया.

जानिए कौन सी बातें हैं, SC/ST Act के तहत अपराध…

लाइव चैट में युवराज और रोहित बात कर रहे थे. इस दौरान युवराज ने कहा कि कुलदीप भी ऑनलाइन आ गया. उधर से रोहित शर्मा बोलते हैं कि कुलदीप ऑनलाइन है, ये सब ऑनलाइन हैं, ये सब ऐसे ही बैठे हुए हैं… इतने में युवराज सिंह बोलते हैं कि ये भंगी लोगों को कोई काम नहीं है यूज़ी को. यूज़ी को देखा क्‍या फोटो डाला है अपनी फैमिली के साथ. मैंने उसको यही बोला कि अपने बाप को नचा रहा है, तू पागल तो नहीं है @#$%… यह सुनकर युवराज सिंह हंस देते हैं.

इस तरह इस चैट में युवराज द्वारा युजवेंद्र को भंगी कहे जाने के बाद सोमवार रात से सोशल मीडिया पर युवराज सिंह से माफी मांगने को कहा जा रहा है. टि्वटर पर #युवराज_सिंह_माफी_मांगो ट्रेंड पर लोग तरह तरह के कमेंट कर उनसे माफी मांगने और अपनी नाराजगी भरी प्रतिक्रिया जाहिर कर रहे हैं.

technical flaws of SC ST Act

SC/ST Act की वो तकनीकी खामियां, जिनसे दलितों पर अत्‍याचार करने वाले बच जाते हैं…

अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम 1989 (Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act, 1989) को भारत के संविधान के अनुच्छेद 17 के तहत ‘अस्पृश्यता के अंत’ की अवधारणा के तहत 1989 में अधिनियमित किया गया था. संविधान के अनुच्छेद 17 में अस्पृश्यता के अंत को कानून का रूप मिलने व इसके बाद सिविल राइट्स एक्ट (Civil Rights Act) के अस्तित्व में आने के बावजूद अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) व अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) समुदाय के खिलाफ जाति आधारित अपराध, अत्याचार तथा उनका आर्थिक व सामाजिक शोषण नहीं रूक पाया, जिसके चलते भारत की संसद को 1989 में एक नया सख्त कानून अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम बनाना पड़ा. हालां‍कि अगर इस कानून को देखा जाए तो यह कानून देखने में बेहद मजबूत नजर आता है तथा इसमें समय-समय पर संशोधन करके इसको और भी मजबूत बनाया गया है, लेकिन इसके बावजूद भी इसमें कुछ इस तरह की तकनीकी खामियां या कमियां हैं, जिसका फायदा अक्सर अनुसूचित जाति व जनजाति पर अत्याचार करने वाले लोग उठा जाते हैं.

पढ़ें- फोन पर जातिसूचक टिप्पणी करना SC/ST ACT के तहत अपराध नहीं : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

अब सीधा मुद्दे पर आते हैं. अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम में कुछ कानूनी शब्दों की परिभाषा दी गई है, परंतु इसमें कहीं भी शब्द पब्लिक व्यू यानी सार्वजनिक दृश्यता व पब्लिक प्लेस यानी सार्वजनिक स्थान की परिभाषा नहीं दी गई है.

अनुसूचित जाति व जनजाति समुदाय के किसी सदस्य को अपमानित करने का सबसे आसान तरीका है कि उसे जातिसूचक शब्दों या जाति के आधार पर दी जाने वाली गालियों से उसे संबोधित किया जाए. आमतौर पर शरीर के विरुद्ध किए गए अपराध व्यक्ति को शारीरिक तौर पर नुकसान पहुंचाते हैं, परंतु जातिसूचक गालियां बकने जैसे अपराध दलित समुदाय (Dalit Community) के लोगों की आत्मा को घाव पहुंचाते हैं तथा उसे एहसास दिलाते हैं कि वह आखिर इस समुदाय में पैदा ही क्यों हुआ तथा उसके मन में हजारों सवाल होने लगते हैं कि आखिर उसके साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है?

पढ़ें- जानिए कौन सी बातें हैं, SC/ST Act के तहत अपराध…

हम अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम 1989 की बात करें तो उसकी धारा 3(1)(r) व 3(1)(s) में कहा गया है कि यदि गैर अनुसूचित जाति समुदाय का कोई व्यक्ति यदि अनुसूचित जाति समुदाय के व्यक्ति को अपमानित करने की नियत से जातिसूचक गालियां देता है तो वह अपराध है, बशर्ते वह जातिसूचक गालियां सार्वजनिक दृश्यता (Public view) में व (Public Place) सार्वजनिक स्थान पर दी गई हों, यानी वह जगह सार्वजनिक स्थान होना चाहिए तथा वहां पर कुछ लोग इस घटना को देखने के लिए भी मौजूद होने चाहिए. अगर इस बात को दूसरे तरीके से कहें तो अगर किसी गैर अनुसूचित जाति समुदाय के व्यक्ति ने आपको किसी बंद कमरे में, या टेलीफोन पर या किसी गैर सार्वजनिक जगह या जनता की अनुपस्थिति में जातिसूचक गालियां दी हैं तो वह अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध नहीं है.

पढ़ें- एससी/एसटी एक्ट की 20 जरूरी बातें, जो आपको पता होनी चाहिए

अगर हम भारतीय अपराध कानून को पढ़ें तो भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) में साफ कहा गया है कि किसी अपराध को कारित होने के लिए सबसे पहले उस अपराध को करने की मंशा होने चाहिए, फिर अपराध करने की तैयारी तथा फिर अपराध करने का प्रयास होता है, लेकिन एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) की धारा में 3(1)(r) भारतीय आपराधिक कानून की मूल अवधारणा को एक तरह से नहीं माना गया है. अगर अपराधी की नियत या मंशा दलित समाज (Dalit Community) के व्यक्ति को जातिसूचक गालियां देकर उसे अपमानित करने की हो, लेकिन उसकी गालियों को सुनने के लिए कोई और व्यक्ति या गवाह मौजूद ना हो या जगह सार्वजनिक ना हो तो एससी/एसटी एक्ट के तहत यह अपराध नहीं माना जाएगा, लेकिन अगर भारतीय आपराधिक कानून की मूल अवधारणा की बात करें तो अगर जातिसूचक गालियां जानबूझकर दलित व्यक्ति को अपमानित करने की नियत या मंशा से दी गई है तो वह निश्चित रूप से एक अपराध है.

पढ़ें- जाति आधारित अत्याचार होने पर पुलिस FIR दर्ज न करे तो क्‍या करें

रोजाना अदालतों में देखा जा रहा है अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज अपराधों में अपराधी इस कानून की इसी कमी का फायदा उठाकर जमानत प्राप्त कर लेते हैं. तब बाद में इस तकनीकी खामी के चलते बरी भी हो जाते हैं जोकि दलित समुदाय के लिए न्याय नहीं पूर्णता अन्याय है.

इसलिए अब समय आ गया है कि एससी/एसटी एक्ट में सार्वजनिक दृश्यता या पब्लिक व्यू को फिर से परिभाषित किया जाए तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r) व 3(1)(s) से पब्लिक व्यू यानी सार्वजनिक दृश्यता व पब्लिक प्लेस यानी सार्वजनिक स्थान शब्द को हटाया जाए तथा भारतीय आपराधिक कानून के तहत सार्वजनिक जगह की जगह अपराधी की मानसिकता या मंशा देखी जानी चाहिए.

(रजत कलसन जाने-माने वकील हैं एवं दलितों के कानूनी अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं)

(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं.)

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