Dalit Groom

Madhya Pradesh Dalit groom stopped from climbing mare said Dalit will not sit on mare in this village

Madhya Pradesh: दलित दूल्हे को घोड़ी चढ़ने से रोका, कहा- इस गांव में दलित घोड़ी पर नहीं बैठेगा

नई दिल्ली/धार : मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के धार जिले (Dhar District) के कानवन थाना अंतर्गत ग्राम खंडी गारा में शुक्रवार रात दबंगों ने दलित दूल्हे का घोड़ी पर चढ़ने से रोक दिया (Dalit groom stopped from riding a mare). दलित दूल्हे को घोड़ी पर बिठाकर गांव में बारात निकालने की तैयारी थी, लेकिन दबंगों ने दलित दूल्हे को घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया. जब अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) वर्ग की बारात में दूल्हे को घोड़ी पर बिठाकर गांव में निकाले जाने का मामला बढ़ते देख पुलिस तक बुलानी पड़ी. तब कहीं जाकर पुलिस की मौजूदगी में दूल्हे को घोड़ी पर बैठाकर बारात निकाली गई. इस बाबत कानवन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 5 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है.

उदयसिंह नानूराम बंजारीया निवासी बैंगनदा ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उसके बेटे शैलेश की शादी गांव खंडी गारा में केसर सिंह की लड़की से हो रही थी. बीते शुक्रवार रात 10 बजे बारात खंडीगारा के गेट पर पहुंची तो यहां दूल्हे को घोड़ी पर बिठाया गया और गाजे बाजे के साथ बारात निकाली गई. इसी दौरान कुछ युवक बाइक से यहां आए और उन्‍होंने कहा कि इस गांव में दलित दूल्हा (Dalit groom) घोड़ी पर बैठकर नहीं जाएगा. उन्होंने जातिसूचक शब्दों (Caste Slur) का प्रयोग करते हुए गाली गलौज तक की. लड़की वालों ने इन युवकों को काफी मनाने की कोशिश की, लेकिन एक नहीं सुनी.

इसके चलते पुलिस को सूचना दी गई तो पुलिस के मौके पर पहुंचने पर ये युवक यहां से फरार हो . इसके बाद पुलिस की सुरक्षा में दूल्हे को दोबारा से घोड़ी पर बिठाकर बारात निकाली गई. बारात के आगे पीछे पुलिस के जवान चल रहे थे.

देर रात शादी संपन्न होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और मामले में दिलीप सिंह, सिंह, गट्टू सिंह, नेपाल सिंह, दशरथ सिंह सभी निवासी खंडी गारा के विरुद्ध केस दर्ज किया गया.

(Dalit groom stopped from riding mare)

Dalit groom stopped from riding horse

दलित दूल्‍हे को घोड़ी चढ़कर बारात निकालने से रोका, 9 लोगों को मिली 5 साल की सजा

अहमदाबाद : दलित समुदाय के दूल्‍हों (Dalit Groom) को घोड़ी चढ़कर बारात निकालने से रोकने वालों के लिए यह खबर मुंह पर तमाचे के बराबर है. गांधीनगर की एक सत्र अदालत ने शनिवार को नौ लोगों को पांच साल की कैद की सजा सुनाई, जिन्‍होंने साल 2018, जून में परसा गांव में एक दलित युवक को उसकी बारात में घोड़े की सवारी करने से रोका (Dalit Groom stopped from riding Horse) था.

लोक अभियोजक पीडी व्यास ने बताया कि शादी में लोगों को धमकाने और एससी/एसटी एक्‍ट के तहत नटवरसिंह परमार, कुलदीप सिंह चौहान, अनिरुद्धसिंह राठौड़, देवेंद्र सिंह चावड़ा, विजयसिंह चौहान, विपुल चौहान, जिगरसिंह चौहान, नरेश चौहान और वीरेंद्र सिंह चौहान को दोषी ठहराया.

9 आरोपियों पर मुकदमा चलाया गया, लोकअभियोजक ने आरोपों को साबित करने के लिए 18 गवाहों को एग्‍जामिन किया. अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया और उन्हें 5 साल की कैद की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया.

यह मामला 17 जून, 2018 का है, जब परसा गांव के क्षत्रिय समुदाय के युवकों ने मेहसाणा कस्बे के एक प्रशांत सोलंकी की बारात का विरोध किया, क्योंकि वह घोड़े पर सवार होकर बारात निकाल रहा था. दूल्हा कार से गांव की सीमा तक गया था और उसे घोड़े पर सवार होकर शादी में दुल्हन के घर तक जाना था. दोषियों ने इस पर उसे रोक दिया और कहा कि सोलंकी घोड़े की सवारी नहीं कर सकता, क्योंकि केवल “बड़ी जाति” का कोई व्यक्ति ही ऐसा कर सकता है, जैसे कि उनका समुदाय.

इसको लेकर गांव के युवकों से उनकी कहासुनी हो गई और उन्‍होंने खूब धमकाया. दूल्हे के परिवार ने पुलिस को फोन किया और सुरक्षा की मांग की. पुलिस गांव पहुंची और पुलिस की निगरानी में बारात निकाली गई.

पहली बार घोड़ी पर बैठेगा दलित जाति का दूल्हा, पुलिस ने कहा- हम साथ हैं, चिंता मत करिए

महोबा. आजादी के कई दशक बीत जाने के बावजूद एक दलित को घोड़ी पर बारात (Dalit Barat on horse) निकालने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से मदद मांगनी पड़ रही है. कभी राजस्थान, कभी पंजाब तो कभी उत्तर प्रदेश से ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं. ताजा मामला महाराष्ट्र (Maharashtra) के महोबा जिले का है.

जिले में एक दलित युवक ने अपनी शादी से पहले की रस्म के लिए अपने घर से पास के मंदिर में घोड़े की सवारी करने के लिए पुलिस सुरक्षा (Dalit Man demand Police Protection for Marriage) मांगी है. दलित युवक में मन में खौफ है कि कहीं उसके साथ पुरानी कहानी दोहराई न जाए इसलिए उसने पुलिस अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की है.

पुलिस थाने में लिखित में दी शिकायत
रिपोर्ट के मुताबिक, अलखराम अहिरवार ने महोबा में महोबकांत पुलिस को एक आवेदन दिया है, जिसमें उनसे 18 जून की शादी से पहले मंदिर में होने वाली रस्म के लिए सुरक्षा मुहैया कराने को कहा गया है. स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) महोबकांत, सुनील तिवारी ने संवाददाताओं को बताया कि दूल्हे ने लिखित में दिया था कि वह पुलिस सुरक्षा चाहता है क्योंकि वह विवाह पूर्व समारोह में घोड़े की सवारी करना चाहता है.

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अलखराम की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे
दलित युवक अलखराम से इस तरह की इच्छा की लिखित जानकारी मिलने के बाद एसएचओ ने कहा, हमने अनुमति दी है ताकि अलखराम अपनी इच्छा पूरी कर सके. स्थिति सामान्य है और किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं है. हम आवेदक को सुरक्षा भी प्रदान करेंगे और उम्मीद करते हैं कि शादी से पहले की रस्में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होंगी.’

ऐसा पहली बार होगा जब गांव में कोई दलित युवक घोड़ी पर अपनी बारात निकालेगा.

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हालांकि इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है कि आखिरकार कब दलित को घोड़ी पर बारात निकालने का अधिकार मिलेगा?

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Rajasthan Dalit Groom

दबंगों के डर से भारी पुलिस फोर्स के बीच घोड़ी पर बैठा ‘दलित कांस्टेबल दूल्हा’

नई दिल्ली. आजादी के 74 साल भी बाद भी गांवों में जातिवाद और ऊंच-नीच वाली भावना लोगों पर हावी है. ताजा मामला राजस्थान के उदयपुर गांव का है, जहां एक दलित दूल्हे (Constable Dalit Groom) को पुलिस के घेरे में बारात निकालनी पड़ी.

हालांकि पहले भी देश के विभिन्न हिस्सों में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं. लेकिन उदयपुर का ये मामला काफी खास है. जिस दूल्हे ने पुलिस सुरक्षा (Rajasthan Police) में बारात निकाली वो खुद कांस्टेबल के पद पर तैनात है.

घोड़ी पर बारात निकालने पर विवाद की आशंका
अमर उजाला पर प्रकाशित खबर के अनुसार, कांस्टेबल कमलेश मेघवाल को घोड़ी पर बारात निकाले जाने पर विवाद की आशंका थी. जिसके बाद उन्होंने पुलिस फोर्स की सुरक्षा मांगी. मामले की गंभीरता को देखते हुए

कई बार घोड़ी से उतारे गए हैं दलित दूल्हे
शादी के दौरान डिप्टी एसपी, नायब तहसीलदार सहित दो थानों की फोर्स को तैनात किया गया. दूल्हे के भाई दुर्गेश ने बताया कि गांव में दलित समाज के लोगों को घोड़ी पर बैठ बिंदोली नहीं निकालने दी जाती है. इससे पहले भी गांव में कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जब दलित दूल्हे को बिंदौली के वक्त घोड़ी से उतार दिया गया है.