Mahoba

Mahoba 60 year old Dalit woman gang raped putting chillies in private parts

Mahoba: 60 साल की बुजुर्ग दलित महिला का गैंगरेप किया, प्राइवेट पार्ट्स में मिर्च डालकर तड़पाया

नई दिल्‍ली/महोबा : उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का महोबा (Mahoba) जातिगत उत्‍पीड़न (Dalit Atrocities) की घटनाओं की वजह से पिछले लंबे से चर्चा का केंद्र बना हुआ, लेकिन मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे. अब महोबा (Mahoba) में एक बुजुर्ग दलित विधवा (Dalit woman gang raped) संग हैवानियत की हदें पार की गईं. रिपोर्ट के अनुसार, यहां घर में सो रही दलित विधवा को अगवा किया गया और फि‍र दबंगों ने उसके साथ गैंगरेप किया.

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान आरोपितों ने हैवानियत की सभी हदें पार कर दीं और हाथ-पैर बांधकर महिला के नाजुक अंगों में मिर्च पाउडर डालकर उसे तड़पाया. ये लोग फिर उसे मरा हुआ समझकर भाग निकले. लोगों ने खंडहर में महिला को बेहोशी की हालत में पड़ा देख पुलिस को सूचना दी.

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रिपोर्ट के अनुसार, कबरई कस्बे में 60 वर्षीय दलित विधवा (Dalit woman gang rape) अपनी पोतियों के साथ रहती है. उक्‍त महिला के बेटे-बहू बाहर रहकर काम करते हैं. बीती शनिवार की देर रात घर में सो रही महिला को दबंग अगवाकर करके ले गए. उन्‍होंने कस्बे के बाहर खंडहर में उसके साथ गैंगरेप किया.

जब महिला ने शोर मचाया तो उसके हाथ-पैर बांध दिए गए और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया. उन्‍होंने हैवानियत दिखाते हुए महिला के नाजुक अंगों में मिर्च पाउडर डाल दिया और पीटने लगे. इससे वह बेहोश हो गई. जब इन लोगों को लगा कि वह मर गई तो तो वे यहां से भाग निकले.

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रविवार की सुबह उसके पड़ोसियों ने खंडहर में निर्वस्त्र हालत में देखा तो महिला पर पहले कपड़ा डालकर उसे ढका और उसके हाथ-पैर खोले.

इसकी सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और उसे चिकित्सालय में भर्ती कराया.एसपी सुधा सिंह खुद अस्पताल पहुंचीं और उससे घटना की जानकारी ली. एसपी के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक आरके गौतम ने मौके पर पहुंचकर छानबीन और कबरई पुलिस ने पीड़ित के बयान के आधार पर दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है.

Mahoba Dalit

महोबा: दलित परिवार को किया दाने-दाने को मोहताज, पैर न छूने पर नहीं दिया बटाई का अनाज

नई दिल्‍ली : बुंदेलखंड (Bundelkhand) में सामन्तवादियों के दलितों के साथ उत्पीड़न की दास्तान अभी तक थमने का नाम नहीं ले रही हैं. महोबा (Mahoba) में दलित दूल्हे (Dalit Groom) के घोड़ी में चढ़ने से रोकने और दलित महिला ग्राम प्रधान (Dalit Woman Gram Pradhan) को कुर्सी से उतारने के बाद अब एक दबंग ने दलित (Dalit) बटाईदार को पैर छूने की शर्त पर ही बटाई का अनाज देने के साथ उसके साथ गाली-गलौच की.

पीड़ित दलित बटाईदार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. बटाई का गल्ला ना मिल पाने से दलित बटाईदार को अपनी बेटी की शादी भी टालनी पड़ी है. उसने पुलिस अधीक्षक को भी लिखित प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई.

इस घटना के चलते पीडि़त वहां लोगों की सामंतवादी सोच और विचारधारा से परेशान है. गरीबी और मुफलिसी ने परिवार को परेशान कर रखा है.

दरअसल, 21 साल की रेणु (बदला हुआ नाम) के पिता बाबूराम वर्मा ने चंद्रशेखर राजपूत के साथ मिलकर करीब 12 बीघा जमीन को बटाई पर ले रखा था. दोनों की मेहनत के बाद फसल में गेंहू और चने की बेहतर पैदावार हुई थी, मगर अच्छी पैदावार को देख दबंग साझेदार की नियत बदल गई और अनाज के बंटवारे पर रोक लगा दी.

ऐसे में दलित परिवार की बेटी की शादी रूक गई. घर में अनाज की कमी के चलते लड़के वालों ने लड़की से शादी करने से इंकार कर दिया है.

बीते 26 अप्रैल को आरती की शादी तय हुई थी मगर रिश्ता अनाज के अभाव में टूट गया. हैरान परेशान पिता ने लड़के वालों से कुछ मोहलत मांगी कि हमारे पास कुछ ही दिनों में अनाज आ जायेगा, मगर साझेदार से 10 जून को अनाज न मिल पाने की वजह से 19 जून को होने वाली शादी आखिरकार टूट गई.

अब परिवार सरकारी राशन के सहारे पेट की आग बुझा रहा है. परेशान पिता बेटियों के सिर पर हाथ रखकर जिला प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठा है.

रेणु बताती हैं कि परिवार को चलाने के लिए मेरी मां ईंट भट्टे पर काम कर किसी तरह हम सभी का भरण पोषण कर रही है. पिता को खेती से आस थी मगर अनाज नहीं मिला. सामंतवादी सोच के चलते मेरे पिता के साझेदार हम सभी से अनाज के बदले पैर पड़ने की शर्त रख रहे हैं. यही वजह है कि जिंदगी की गाड़ी जिस रफ्तार से चली थी उस पर सामंतवादी सोच विचारधारा ने ब्रेक लगा दिया है.

शादी टूटने के बाद रेणु के पिता बाबूराम हाथों में वर पक्ष से आए संदेश को देखकर फूट फूटकर रो रहे हैं. वह कहते हैं कि मेरी बेटी की शादी एक बार नहीं दो बार टूटी है. अगर मुझे बटाई का अनाज दे दिया होता तो परिवार के हालातों के साथ-साथ मेरी बेटी के हाथ पीले हो गए होते. मगर तमाम शिकवा शिकायतों के बाद भी आज तक हमें अपने हिस्से का अनाज नहीं मिल सका है. मैंने हैरान और परेशान होकर पुलिस अधीक्षक सुधा सिंह से न्याय की गुहार लगाई है. पीड़ित की पुत्रियां आरती, सुधा और रोशनी रो-रोकर अपना दर्द बयां कर रही हैं.

महोबा की पुलिस अधीक्षक सुधा सिंह बताती है कि कबरई थाना क्षेत्र से एक व्यक्ति द्वारा अपने ही साझेदार के खिलाफ शिकायती पत्र दिया गया था, जिस पर अनाज के बंटवारे का विवाद बताया गया है. इस मामले को गंभीरता से लेते जांच की जा रही है और तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं. मामले की जांच पूरी होने पर दोषी पाए जाने के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी.

इस मामले को लेकर भीम आर्मी के महोबा जिलाध्‍यक्ष आकाश रावण ने DalitAwaaz.com से बातचीत में कहा कि एसपी सुधा सिंह से हमारी बात हुई है और उनका कहना है कि प्रकरण की जांच कराई जा रही है. लिहाजा, प्रशासन का इस मामले में पूरा संज्ञान है और आश्‍वासन दिया है कि दो दिन का समय दिया जाए. अगर जांच रिपोर्ट के बाद संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई तो भीम आर्मी आगे की रणनीति तैयार करेगी.

UP Mahoba dalit groom Bhim Army vinay ratan singh

भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्‍यक्ष ने कहा, सभी टीमें माधवगंज गांव पहुंचे, अलखराम की बारात घोड़ी पर ही निकलेगी

नई दिल्‍ली/महोबा : आजादी के 70 साल से ज्‍यादा गुज़रने के बावजूद उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के महोबा (Mahoba) जिले के माधवगंज गांव में दलितों को घोड़ी पर चढ़कर बारात न निकालने द‍िए जाने का मामला गरमा गया है. भीम आर्मी ने इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. संगठन ने तय किया है कि हर हाल में अलखराम की बारात घोड़ी पर चढ़वाकर निकलवाई जाएगी.

भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्‍यक्ष विनय रतन सिंह की तरफ से उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सिकंदर बौद्ध एवं बुंदेलखंड प्रभारी कौशल वाल्मीकि से कहा गया है कि वह बुंदेलखंड की समस्त जिला टीमों को लेकर बारात वाले दिन महोबा माधोगंज पहुंचे.

वहीं, भीम आर्मी (झांसी मण्डल) के अध्यक्ष मोती लाल गौतम एवं मंडल प्रभारी ध्यानचंद्र वाल्‍मीकी ने कहा है कि बुंदेलखंड प्रभारी कौशल वाल्मीकि के नेतृत्व में झांसी मण्डल के तीनों जिलों की टीमें गांव में पहुचेंगी और अलखराम की बारात घोड़ी पर ही निकलेगी.

उनकी तरफ से कहा गया है क‍ि हम संविधान को मानने वाले लोग हैं और अपने स्वाभिमान से समझौता बिल्‍कुल नहीं करेंगे.

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दरअसल, गांव में बरसों से चली आ रही इस रुढ़िवादी परंपरा को तोड़ने के लिए दलित (Dalit) युवक अलखराम अहरिवार ने आवाज उठाई है. अपने अधिकारों के प्रति सजग इस दलित युवक ने आवाज़ उठाते हुए उसने पुलिस-प्रशासन से इजाजत मांगी है कि उसे घोड़ी चढ़ने की अनुमति दी जाए, ताकि वह अपनी बारात धूमधाम से निकाल सके.

पढ़ें : साबरकांठा: गांव में तैनात किए गए 120 जवान, तब घोड़ी पर दलित युवक ने निकाली बारात

यह मामला महोबकंठ थाने के एक गांव माधवगंज का है. अनुसूचित जाति की चमार (Chamar) जाति से ताल्‍लुक रखने वाले 22 साल के अलखराम अहरिवार की शादी आगामी 18 जून 2021 को है. अलखराम ने जिद ठानी है कि वह घोड़ी पर चढ़कर ही अपनी बारात निकालेंगे. पर गांव के बाकी लोगों की तरह ही कहीं उनके भी अरमान अधूरे न रह जाएं, इसके लिए उन्‍होंने बकायदा वीडियो जारी कर मदद मांगी है.

देखें वीडियो…

अलखराम के पिता ग्‍यादीन अहिरवार ने महोबकंठ थाने के प्रभारी को लिखित शिकायत दी है क‍ि आगामी 18 जून को उनके बेटे की शादी है और वह उसे घोड़ी पर चढ़ाकर बारात निकालना चाहते हैं, लेकिन गांव के ही जातिवादी, दूषित मानसिकता के लोग उन्‍हें रोकने के प्रयास में हैं.

पढ़ें : दबंगों के डर से भारी पुलिस फोर्स के बीच घोड़ी पर बैठा ‘दलित कांस्टेबल दूल्हा’

थाना प्रभारी को दी गई शिकायत में कहा गया है कि ये अराजक लोग गांव में घूम-घूमकर कह रहे हैं कि वे बारात को घोड़ी पर निकलने नहीं देंगे और बारात पर लाठियों और पत्‍थरों से हमला किए जाने की आशंका है. ग्‍यादीन ने अपनी शिकायत में कहा है कि इन लोगों का कहना है कि तुम लोग चमार हो और हम तुम्‍हें घोड़ी पर बैठकर बारात नहीं निकालने देंगे. लिहाजा, उन्‍हें सुरक्षा प्रदान की जाए और उनके बेटे की बारात घोड़ी पर निकाली जाए.

पढ़ें : घोड़ी पर बैठने के लिए दलित दूल्हे ने पुलिस से मांगी मदद, शादी समारोह में तनाव की आशंका

इससे पहले भीम आर्मी भारत एकता मिशन (झांसी मंडल) के मीडिया प्रभारी मानवेंद्र बौद्ध का कहना है कि कुछ मनुवादियों ने यहां तय किया है कि वह दलित समाज के युवक को घोड़ी पर चढ़कर बारात नहीं निकालने देंगे. इस बाबत महोबा के जिला अध्‍यक्ष आकाश रावण ने पुलिस-प्रशासन को ज्ञापन देकर कहा है कि वह घोड़ी पर ही अलखराम की बारात निकलवाएंगे. इसके लिए बड़ी सदस्‍य में भीम आर्मी एवं आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता 18 जून को गांव पहुंचेंगे.

UP Mahoba dalit groom determined to mount a mare Bhim Army Supports

सवर्णों की जिद-‘चमार हो, घोड़ी पर बारात नहीं निकलने देंगे’, भीम आर्मी ने भी ठानी- बारात निकवाकर रहेंगे

नई दिल्‍ली/महोबा : देश आज भी जातिवाद (Casteism) की बेडि़यों में बड़ी हद तक जकड़ा है. सामाजिक भेदभाव के शिकार पिछड़े दलितों (Dalits) को कथित सवर्णों द्वारा उनके कानूनी, मानवीय अधिकारों से महरूम रखने का सिलसिला अभी तक जारी है. आजादी के 70 साल से ज्‍यादा गुज़रने के बावजूद उत्‍तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का महोबा (Mahoba) जिला इसका बड़ा प्रमाण है.

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले (Mahoba) में सामने आया यह मामला 21वीं सदी में भी ऊंच-नीच की रूढ़िवादी सोच को उजागर करता है. यहां 74 सालों बाद भी आजतक किसी दलित दूल्हे की बारात घोड़ी पर सवार होकर नहीं निकल सकी है. सुनकर आपको हैरानी होगी, लेकिन यह सच है. यहां ऊंची जाति के लोग दलितों को घोड़ी चढ़ने की इजाजत नहीं देते हैं.

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इस रुढ़िवादी परंपरा को तोड़ने के लिए एक दलित (Dalit) युवक ने आवाज उठाई है. अपने अधिकारों के प्रति सजग इस दलित युवक ने आवाज़ उठाते हुए उसने पुलिस-प्रशासन से इजाजत मांगी है कि उसे घोड़ी चढ़ने की अनुमति दी जाए, ताकि वह अपनी बारात धूमधाम से निकाल सके.

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यह मामला महोबकंठ थाने के एक गांव माधवगंज का है. अनुसूचित जाति की चमार (Chamar) जाति से ताल्‍लुक रखने वाले 22 साल के अलखराम अहरिवार की शादी आगामी 18 जून 2021 को है. अलखराम ने जिद ठानी है कि वह घोड़ी पर चढ़कर ही अपनी बारात निकालेंगे. पर गांव के बाकी लोगों की तरह ही कहीं उनके भी अरमान अधूरे न रह जाएं, इसके लिए उन्‍होंने बकायदा वीडियो जारी कर मदद मांगी है.

इससे पहले भी माधवगंज गांव में कई दलित युवकों की बारात बिना घोड़ी के निकली है, जिनमें कई दिल्‍ली में प्राइवे नौकरी तक करते हैं.

देखें वीडियो…

अलखराम के पिता ग्‍यादीन अहिरवार ने महोबकंठ थाने के प्रभारी को लिखित शिकायत दी है क‍ि आगामी 18 जून को उनके बेटे की शादी है और वह उसे घोड़ी पर चढ़ाकर बारात निकालना चाहते हैं, लेकिन गांव के ही जातिवादी, दूषित मानसिकता के लोग उन्‍हें रोकने के प्रयास में हैं.

पढ़ें : दबंगों के डर से भारी पुलिस फोर्स के बीच घोड़ी पर बैठा ‘दलित कांस्टेबल दूल्हा’

थाना प्रभारी को दी गई शिकायत में कहा गया है कि ये अराजक लोग गांव में घूम-घूमकर कह रहे हैं कि वे बारात को घोड़ी पर निकलने नहीं देंगे और बारात पर लाठियों और पत्‍थरों से हमला किए जाने की आशंका है.

ग्‍यादीन ने अपनी शिकायत में कहा है कि इन लोगों का कहना है कि तुम लोग चमार हो और हम तुम्‍हें घोड़ी पर बैठकर बारात नहीं निकालने देंगे. लिहाजा, उन्‍हें सुरक्षा प्रदान की जाए और उनके बेटे की बारात घोड़ी पर निकाली जाए.

पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा. महोबकंठ थाना पुलिस को शांति व्यवस्था कायम रखने के निर्देश दिए गए हैं.

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वहीं, अलखराम की पोस्ट को देखते हुए भीम सेना ने अपनी दम पर अलखराम की बारात घोड़ी में चढ़वा कर निकलवाने की तैयारी शुरू कर दी है. भीम आर्मी भारत एकता मिशन (झांसी मंडल) के मीडिया प्रभारी मानवेंद्र बौद्ध का कहना है कि कुछ मनुवादियों ने यहां तय किया है कि वह दलित समाज के युवक को घोड़ी पर चढ़कर बारात नहीं निकालने देंगे. इस बाबत महोबा के जिला अध्‍यक्ष आकाश रावण ने पुलिस-प्रशासन को ज्ञापन देकर कहा है कि वह घोड़ी पर ही अलखराम की बारात निकलवाएंगे. इसके लिए बड़ी सदस्‍य में भीम आर्मी एवं आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता 18 जून को गांव पहुंचेंगे.

इस मामले में भीम आर्मी के महोबा जिलाध्‍यक्ष आकाश रावण ने दलित आवाज़ से बातचीत में बताया कि करीब 5 से 6 दिन पहले अलखराम ने फेसबुक पर पोस्‍ट डाला था कि क्‍या कोई संगठन उसे उसकी शादी में घोड़ी पर चढ़वाकर बारात निकलवाने में मदद कर सकता है. इसके बाद उनके गांव के यादव और अन्‍य जाति के लोगों ने बकायदा धमकी दी है कि वह अलखराम को घोड़ी पर नहीं चढ़ने देंगे और ऐसा होने पर छतों से पत्‍थरों की बरसात भी करेंगे.

आकाश रावण ने बताया क‍ि इसकी जानकारी के बाद वह और उनकी टीम गांव में गए और पूरे मामले को समझा और अलखराम को आश्‍वस्‍त किया गया है कि उनकी बारात घोड़ी पर ही निकलेगी. इस बारे में संबंधित थाने और जिला कप्‍तान को सूचना दे दी गई है. शादी के दिन भीम आर्मी के करीब 500 से अधिक सदस्‍य गांव में पहुंचेंगे और अलखराम की सुरक्षा में तैनात होकर उन्‍हें घोड़ी पर बारात निकलवाने में मदद करेंगे. भीम आर्मी के प्रदेश अध्‍यक्ष सिकंदर बौद्ध और भीम आर्मी भारत एकता मिशन (झांसी मंडल) के मीडिया प्रभारी मानवेंद्र बौद्ध के भी इस दौरान आने की पूरी उम्‍मीद है.