Punjab

Congress targeted PM Modi said retaliatory action against Dalit Chief Minister Charanjit Singh Channi

Congress का पीएम मोदी पर निशाना, कहा- इकलौते दलित मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ प्रतिशोध की कार्रवाई

नई दिल्ली : पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 (Punjab Assembly Election 2022) से पहले कांग्रेस (Congress) ने पंजाब (Punjab) में कई स्थानों पर प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) की छापेमारी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि देश के इकलौते दलित मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Dalit Chief Minister Charanjit Singh Channi) के खिलाफ प्रतिशोध की कार्रवाई की गई है. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री मोदी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच नूराकुश्ती चल रही है.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मोदी सरकार और भाजपा प्रतिशोध की आग में धधक रही है. मोदी सरकार (Modi Govt) किसानों तथा दलित-पिछड़ों (Farmers and Dalit-Backwards) से बदला ले रही है. आंदोलन के दौरान 700 किसानों ने दम तोड़ दिया, लेकिन प्रधानमंत्री ने उनकी सुध नहीं ली. अब दलित (Dalits) और पिछड़ों से प्रतिशोध लिया जा रहा है.

कांग्रेस (Congress) नेता सुरजेवाला ने दावा किया, ‘‘जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब (Punjab) और उत्तराखंड (Uttarakhand) में दलित और पिछड़े नकार रहे हैं और हार सुनिश्चित दिख रही है, वैसे ही भाजपा का इन वर्गों पर हमला बढ़ता जा रहा है.’’

Punjab Assembly Election 2022: कौन है पंजाब का रविदासिया समुदाय, जिनकी वजह से चुनाव की तारीखें बदली?

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा का ‘इलेक्शन डिमार्टमेंट’ यानी ईडी अब पंजाब पहुंचा है. देश के इकलौते दलित मुख्यमंत्री (Dalit Chief Minister) से बदला लेने के लिए प्रधानमंत्री और भाजपा ने ईडी को भेज दिया है. यह दिखाता है कि देश के इकलौते मुख्यमंत्री के खिलाफ भाजपा के मन में प्रतिशोध की भावना धधक रही है.’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि चन्नी के परिवार के खिलाफ कोई आरोप नहीं है और प्राथमिकी में भी नाम नहीं है, लेकिन बचकाने और मनगढ़ंत आरोप मढ़े जा रहे हैं.

उन्होंने यह दावा भी किया, ‘‘मोदी जी और केजरीवाल में खूब नूराकुश्ती चल रही है. जब प्रधानमंत्री का काफिला कुछ समय के लिए रुक जाता है, तो सबसे पहले केजरीवाल प्रधानमंत्री के बचाव में कूदते हैं. ईडी की कार्रवाई के बारे में सबसे पहले ट्वीट केजरीवाल ने किया है. केजरीवाल और मोदी जी उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में नूराकुश्ती कर रहे हैं.’’

सुरजेवाला ने कहा कि मोदी और केजरीवाल को चन्नी का मुख्यमंत्री बनना पच नहीं रहा है, इसलिए वो ‘पंजाब, पंजाबियों और पंजाबियत’ को बदनाम करने के लिए साजिश कर रहे हैं.

कांग्रेस (Congress) के पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा, ‘‘भाजपा भूल कर रही है कि यह चन्नी जी हैं, अमरिंदर सिंह नहीं हैं. चन्नी मजबूती से खड़े रहेंगे. कांग्रेस पार्टी चन्नी और पंजाब के साथ मजबूती से खड़ी है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस पंजाब में फिर से सरकार बनाने जा रही है, इसलिए ये लोग बौखला रहे हैं.’’

UP Chunav 2022 : सोनभद्र आदिवासी नरसंहार की आवाज बने आदिवासी युवक को कांग्रेस ने बनाया प्रत्‍याशी, जानें कितने दलितों को मिला टिकट

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने गैरकानूनी तरीके से रेत का खनन करने में शामिल कम्पनियों और ‘रेत माफिया’ के खिलाफ धन शोधन की जांच के तहत पंजाब में कई स्थानों पर मंगलवार को छापेमारी की. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि संघीय एजेंसी के अधिकारी चंडीगढ़ तथा मोहाली में कम से कम 10 से 12 स्थानों पर छापेमारी कर रहे हैं और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है.

Punjab में Scheduled Caste सदस्य राजस्थान में भूमि खरीद के लिए जाति लाभ का दावा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

भूपिंदर सिंह उर्फ हनी नामक व्यक्ति के परिसर पर छापेमारी की जा रही है. उन्हें पंजाब के कांग्रेस (Congress) के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Punjab Chief Minister Charanjit Singh Channi) का रिश्तेदार बताया जा रहा है. विपक्षी दलों ने पहले भी चन्नी के हनी के साथ संबंध होने का दावा किया है, लेकिन मुख्यमंत्री ने इन बातों को खारिज कर दिया था.

 

Punjab Assembly Election 2022 Who is Ravidassia Community of Punjab because of which Punjab election dates changed

Punjab Assembly Election 2022: कौन है पंजाब का रविदासिया समुदाय, जिनकी वजह से चुनाव की तारीखें बदली?

रविदास जयंती (Ravidas Jayanti) के मद्देनजर पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 (Punjab Assembly Election 2022) की तारीख बदल दी गई है. इसके चलते राज्‍य में दलित वोट की ताकत को सबसे सामने उभारा है. साथ ही दलित समाज के लोगों और उनका नेतृत्व करने वाले डेरों का महत्व सामने आया है. चुनावी की तारीखों में बदलाव होते ही रविदासिया समुदाय (Ravidassia Community) राष्ट्रीय पटल पर चर्चा का विषय बन गया है.

रविदासिया समुदाय (Ravidassia Community) संत रविदास (Sant Ravidas) से जुड़ा समूह है. गुरु रविदास (Guru Ravidas) ने जिस पंथ को प्रचारित और प्रसारित किया, रविदासिया समुदाय (Ravidassia Community) उसी का अनुसरण करता है. यह पंथ 20वीं सदी में भारत पर अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान अस्तित्व में आया. पर आजादी के बाद ये लगातार समृद्ध और विस्तारित हुआ. इस पंथ को मानने वालों की आबादी करीब 20 से 50 लाख तक बताई जाती है.

गुरु रविदास (Guru Ravidas) को इस समुदाय में ‘सतगुरु’ और मौजूदा डेरा प्रमुखों को ‘गुरु’ और पंथ को मानने वालों को ‘भगत’ कहा जाता है. दरअसल, पहले यह समुदाय सिख धर्मग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब (Guru Granth Sahib) को ही अपना पवित्र प्रतीक मानता था, लेकिन साल 2009 में ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में तत्कालीन रविदासिया गुरु संत निरंजन दास (Guru Niranjan das) और उनके नायब संत रामानंद दास पर जानलेवा हमला हुआ था. कहा जाता है कि सिख आतंकियों ने यह हमला किया, जिसमें संत रामानंद दास का निधन हो गया. इसके बाद यह पंथ सिखों से अलग हो गया.

Sant Ravidas : जानें क्‍यों सतगुरु रविदास ने सदैव निराकार को अपनाया?

आखिर रविदासिया समुदाय पंजाब में कितना प्रभावशाली है?
दरअसल, देखा जाए तो इसका जवाब दो हिस्सों में मिलता है. पहले हिस्‍से में- रविदासिया समुदाय का सबसे बड़ा ठिकाना ‘डेरा सचखंड बल्लां’ (Dera Sachkhand Ballan) का मुख्यालय जालंधर, पंजाब में है. इस डेरे के प्रमुख वही गुरु निरंजन दास हैं, जिन्होंने 2009 में विएना में हुए हमले के बाद अपना रास्ता अलग कर लिया था. दूसरा पहलू ये भी है कि पंजाब (Punjab) ही नहीं ज्‍यादा स्थलों पर रविदासिया समुदाय (Ravidassiya Community) के बहुतायत सदस्य अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) से ताल्लुक रखते हैं. वर्ष 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक, पंजाब राज्‍य में करीब 32% आबादी दलितों की है. इसमें से सिर्फ ‘डेरा सचखंड बल्लां’ (Dera Sachkhand Ballan) के समर्थकों की तादाद ही 15 लाख से कुछ अधिक बताई जाती है.

पंजाब में दलितों 39 उपवर्ग, इनमें दूसरे सबसे बड़े रविदासी?
‘द पायनियर’ की हाल ही केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि पंजाब (Punjab) दलितों (Dalits) में 39 उपवर्ग हैं. इनमें भी 5 उपवर्ग ऐसे हैं, जिनमें 80% दलित आबादी (SC Population) आ जाती है. इनमें 5 उपवर्गों में भी 30% मजहबी सिखों के बाद दूसरे सबसे बड़े रविदासिया (Ravidassiya) हैं, 24% के करीब. अधिकांश रविदासिया (Ravidassiya) पंजाब (Punjab) के दोआबा क्षेत्र में पाए जाते हैं. इस क्षेत्र में जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर, कपूरथला जैसे जिले आते हैं.

Scheduled Caste members in Punjab cannot claim caste benefits for land purchase in Rajasthan Supreme Court

Punjab में Scheduled Caste सदस्य राजस्थान में भूमि खरीद के लिए जाति लाभ का दावा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्‍ली : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court) के उस फैसले के खिलाफ अपील खारिज कर दी, जिसमें कहा गया था कि पंजाब (Punjab) का कोई निवासी, अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) का सदस्य होने के आधार पर राजस्थान (Rajasthan) में भूमि खरीद के लिए अनुसूचित जाति का लाभ नहीं ले सकता है.

SC/ST ACT के केस को सही समझौता होने पर खत्म किया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्‍पणी

शीर्ष अदालत (Supreme Court) के पहले के फैसलों का जिक्र करते हुए, न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता पंजाब (Punjab) का स्थायी निवासी है और वह राजस्थान में अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के सदस्य होने के लाभ का दावा नहीं कर सकता है, जोकि मूल आवंटी को अनुसूचित जाति भूमिहीन व्यक्ति के रूप में दी गई थी.

दलितों को हमेशा याद रखना चाहिए ‘2 अप्रैल 2018’ का भारत बंद

न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने ठीक फैसला दिया था कि अपीलकर्ता के पक्ष में जमीन का लेन-देन राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (Rajasthan Tenancy Act, 1955) के एक प्रावधान का स्पष्ट उल्लंघन है.

 

lakhbir-got-30000-for-spoiling-kisan-andolan-skm-asp-said-morcha-suffers-from-ethnic-frustration

लखबीर को आंदोलन खराब करने के लिए 30 हजार मिले: SKM | असपा बोली- मोर्चा जातीय कुंठा से ग्रस्त

नई दिल्‍ली : बीते 15 अक्टूबर को किसान आंदोलन (Kisan Andolan) विरोध स्‍थल पर मौजूद निहंग सिखों के एक समूह द्वारा सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर पंजाब (Punjab) के दलित मजदूर लखबीर सिंह (Dalit Lakhbir Singh Murder) की गई निर्मम हत्‍या के मामले में संयुक्‍त किसान मोर्चा (Samyukt Kisan Morcha) ने नया बयान जारी किया है. मोर्चे ने आरोप लगाया है कि लखबीर सिंह को किसी से तीस हजार रुपये मिले थे और यह आंदोलन को पटरी से उतारने के लिए दिए गए. मोर्चा के इस बयान पर आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) ने नाराजगी जताई है. पार्टी के प्रवक्‍ता सूरज कुमार बौद्ध ने इसे शर्मनाम बताते हुए कहा कि मोर्चा जातीय कुंठा से ग्रस्त नजर आता है.

चंद्रशेखर आजाद की पंजाब CM से मांग, दलित लखबीर की हत्‍या की CBI जांच हो, परिवार को 1 करोड़ की मदद दी जाए

किसान आंदोलन (Kisan Andolan) का नेतृत्‍व कर रहे संयुक्‍त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को जारी अपने दैनिक प्रेस बुलेटिन में कहा कि ‘बीते 15 अक्टूबर को निहंग सिखों के एक समूह द्वारा सिंघु बॉर्डर पर लखबीर सिंह का एक ताजा वीडियो सामने आने के बाद, यह मालूम होता है कि लखबीर सिंह (Lakhbir Singh) को किसी से तीस हजार रुपये मिले थे, और यह आंदोलन को पटरी से उतारने के लिए दिए गए थे’.

मिशन आंबेडकर सिंघु बॉर्डर पर दलित लखबीर की हत्‍या केस को लेकर UN मानवाधिकार उच्‍चायुक्‍त ऑफिस तक पहुंचा

मोर्चा ने आगे कहा कि, ‘एसकेएम ने इस पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से कराने की अपनी मांग दोहराई है ताकि हिंसक घटनाओं के पीछे की साजिश का पर्दाफाश हो सके’.

लखबीर सिंह हत्‍याकांड को लेकर SC Commission के अध्‍यक्ष का अकाल तख्‍त के मुखिया को पत्र

वहीं, आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) ने मोर्चा के इस बयान पर गहरी नाराजगी जताई. पार्टी प्रवक्‍ता सूरज कुमार बौद्ध ने माइक्रो ब्‍लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, ‘पहले लखबीर को नृशंसता से मारा गया और फिर तलवार की नोक पर अधमरे पड़े इंसान से ₹30 हजार लेकर बेअदबी की बात उगलवाना शर्मनाक है’. उन्‍होंने आगे लिखा, ‘इससे भी शर्मनाक ‘ज़मीदार मोर्चा’ का बयान है, जिसमें वे इसे आधार बनाकर बयान जारी कर रहे हैं. मोर्चा जातीय कुंठा से ग्रस्त नजर आता है’.

लखबीर सिंह हत्‍याकांड से जुड़ी सभी खबरें यहां क्लिक कर पढ़ें…

 

सिंघु बॉर्डर पर कत्‍ल किए गए Dalit Lakhbir Singh के हत्‍यारों ने उन पर बेअदबी का केस दर्ज कराया