yuvraj singh

SC ST Act Challan may be submit against Yuvraj Singh Munmun Dutta Yuvika Chaudhary by Hansi police in court soon

SC/ST Act : युवराज सिंह, एक्‍ट्रेस मुनमुन दत्‍ता और युविका चौधरी के खिलाफ हांसी पुलिस में जल्‍द पेश कर सकती है चालान

नई दिल्‍ली/हांसी : अनुसूचित जाति समुदाय के लिए अपमानजनक टिप्पणी (Derogatory remarks for Scheduled Caste Community) करने के मामले में फंसे पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) के अलावा तारक मेहता का उल्टा चश्मा की अभिनेत्री मुनमुन दत्ता (Munmun Dutta) उर्फ बबीता जी और अभिनेत्री युविका चौधरी (Actress Yuvika Chaudhary) की मुसीबत बढ़ सकती है. कहा जा रहा है कि हिसार की हांसी पुलिस (Hansi Police) तीनों के खिलाफ विशेष अदालत (एससी/एसटी एक्‍ट) में जल्‍द ही चालान पेश कर सकती है.

हांसी पुलिस के सूत्रों के अनुसार, इस मामले में हांसी पुलिस (Hansi Police) की तरफ से तीनों आरोपी सेलिब्रिटीज के खिलाफ जांच लगभग पूरी कर ली गई है. सूत्रों बताते हैं कि मामले में जांच अधिकारी की तरफ से एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) के मामले में तीनों आरोपी सेलिब्रिटीज के खिलाफ अगले दो से तीन दिन के भीतर हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत में अंतिम रिपोर्ट चालान प्रस्‍तुत की जा सकती है.

कानून के मुताबिक, जिस दिन हांसी पुलिस इनके खिलाफ हिसार की विशेष अदालत के जज के सामने चालान या फाइनल रिपोर्ट पेश करेगी, तब इन सेलेब्रिटीज को भी अदालत में पेश होकर रेगुलर बेल हासिल करनी पड़ेगी. इसके बाद इन तीनों के खिलाफ हिसार की विशेष अदालत में अलग-अलग ट्रायल शुरू हो जाएंगे.

बता दें कि पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को खारिज कराने के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की तथा मुनमुन दत्ता ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी, लेकिन हाईकोर्ट ने युवराज सिंह को एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर में राहत देने से इनकार कर दिया था. इसी तरह मुनमुन दत्ता को भी सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली थी. एफआईआर खारिज करने की उनकी याचिका भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने खारिज कर दी थी.

गौरतलब है कि पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने जून 2020 में तथा मुनमुन दत्ता व युविका चौधरी ने मई 2021 में अनुसूचित जाति के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद नेशनल अलायन्स फ़ॉर दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक रजत कल्सन (Advocate Rajat Kalsan) ने इनके खिलाफ हांसी के थाना शहर में अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए थे.

After cricketer Yuvraj Singh now actress Yuvika Chaudhary arrested released on interim bail

SC समाज पर अपमानजनक टिप्‍पणी करने वाली अभिनेत्री युविका चौधरी भी गिरफ्तार

नई दिल्‍ली : अनुसूचित जाति समाज के प्रति अपमानजनक टिप्‍पणी करने को लेकर क्रिकेटर युवराज सिंह (Cricketer Yuvraj Singh) के बाद आज बॉलीवुड अभिनेत्री तथा बिग बॉस में काम कर चुकी युविका चौधरी (Yuvika Chaudhary) को भी हांसी पुलिस ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया. करीब 3 घंटे की पूछताछ के बाद हुई औपचारिक गिरफ्तारी के बाद युविका को अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया. इस दौरान युविका चौधरी के साथ करीबन 10 बाउंसर और उसके पति प्रिंस नरूला (Prince Narula) तथा उसके अधिवक्ता भी मौजूद थे.

दरअसल, युविका चौधरी ने बीते 25 मई को अपने ब्लॉग पर एक वीडियो में अनुसूचित जाति समाज के लिए अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद दलित अधिकार कार्यकर्ता एवं वकील रजत कलसन ने थाना शहर हांसी में उक्त अभिनेत्री के खिलाफ अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया था. इस केस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिेनेत्री को जांच में शामिल होने के आदेश दिए थे.

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इसके बाद आज युविका चौधरी (Yuvika Chaudhary) ने हांसी पुलिस (Hansi Police) के समक्ष समर्पण कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उनसे डीएसपी कार्यालय हांसी में बिठाकर करीब 3 घंटे पूछताछ की. जिसके बाद पुलिस ने उन्‍हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर बाद में अंतरिम जमानत के आधार पर छोड़ दिया.

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रजत कलसन ने बताया कि अब वह इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. उनकी ओर से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की जाएगी, क्‍योंकि एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) में अंतरिम जमानत का प्रावधान नहीं है. यह आदेश गलत है और इससे समाज में एक्‍ट को लेकर गलत संदेश जाएगा. उन्‍होंने कहा कि हम युवराज के साथ उनकी भी अंतरिम जमानत कैंसिल कवारकर उन्‍हें जेल भिजवाएंगे.

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बता दें कि शिकायतकर्ता रजत कलसन की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद उक्त अभिनेत्री ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को खारिज कराने के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया था. इसके बाद उक्त अभिनेत्री ने हिसार की अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे 11 अक्टूबर को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया था. इसके बाद हाईकोर्ट ने उक्त अभिनेत्री को राहत देते हुए उसे अंतरिम जमानत दे दी थी तथा जांच में शामिल होने के आदेश दिए थे.

अब पुलिस युविका चौधरी के खिलाफ हिसार की विशेष अदालत में चालान पेश करेगी, जहां पर उन्‍हें नियमित जमानत करानी पड़ेगी. अगर उक्त अदालत में युविका चौधरी के खिलाफ आरोप साबित हुए और उसे 5 साल तक की सजा भी हो सकती है.

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शिकायतकर्ता रजत कलसन ने युवराज सिंह के खिलाफ भी एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था, जिसमें युवराज सिंह ने 16 अक्टूबर को पुलिस के सामने समर्पण किया था तथा पुलिस ने उन्‍हें औपचारिक गिरफ्तार कर पूछताछ करने के बाद अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया था. इसी तरह की अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में तारक मेहता का उल्टा चश्मा की अभिनेत्री मुनमुन दत्ता के खिलाफ हांसी थाना शहर में मुकदमा दर्ज है तथा उन पर भी पुलिसिया कार्रवाई बाकी है.

गौरतलब है कि अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दर्ज मामले में हरियाणा की हांसी पुलिस (Hansi Police) द्वारा शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह (Cricketer Yuvraj Singh) को औपचारिक गिरफ्तार करने के तुरंत बाद अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया था. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर युवराज सिंह कल हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां दो से तीन घंटे की पूछताछ एवं औपचारिक गिरफ्तारी के बाद उन्‍हें अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया था. शिकायतकर्ता वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता रजत कलसन ने पुलिस की कार्रवाई पर अंसुष्टि जताते हुए कहा कि Hansi Police ने नियमों के अनुसार इस एक्‍शन से उन्‍हें अवगत नहीं कराया. साथ ही उन्‍होंने पुलिस पर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) को वीआईपी ट्रिटमेंट दिए जाने का आरोप भी लगाया. साथ ही जल्‍द सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अंतरिम जमानत के आदेश को चुनौती दी जाएगी.

युवराज सिंह के खिलाफ करीब 8 महीने बाद हरियाणा पुलिस ने SC/ST Act में दर्ज की एफआईआर

इस मामले में युवराज सिंह की तरफ से अपने बचाव में दी गई दलीलों से असंतुष्‍ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रिकेट युवराज सिंह को पुलिस के समक्ष सरेंडर करने और जांच में सहयोग देने के आदेश दिए थे. इसके बाद बीते शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां से हांसी पुलिस उन्‍हें हिसार के गजेडिट ऑफि‍सर्स जियो मैस ले गई. यहां युवरात से करीब दो से तीन घंटे से पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्‍हें औपचारिक रूप से अरेस्‍ट कर लिया गया और अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया.

रजत कलसन ने आरोप लगाया कि इस पूरी कार्रवाई के सख्‍त होने की बजाय पुलिस ने युवराज को वीआईपी ट्रिटमेंट दिया. यहां तक की पुलिसवालों ने उनके साथ फोटो तक खिंचवाए. उन्‍होंने कहा कि नियमानुसार पुलिस ने उन्‍हें कार्रवाई से अवगत तक नहीं कराया.

जातिगत टिप्‍पणी मामला: युवराज सिंह नहीं कर रहे जांच में सहयोग, सरकारी वकील ने हाईकोर्ट को बताया

उन्‍होंने बताया कि अब वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. उनकी ओर से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की जाएगी, क्‍योंकि एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) में अंतरिम जमानत का प्रावधान नहीं है. यह आदेश गलत है और इससे समाज में एक्‍ट को लेकर गलत संदेश जाएगा. उन्‍होंने कहा कि हम इस उनकी अंतरिम जमानत को कैंसिल कवारकर जेल भिजवाएंगे.

बता दें कि युवराज पर आरोप है कि उन्होंने बीते साल रोहित शर्मा से लाइव चैट के दौरान युजवेंद्र चहल पर अनुसूचित जाति के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ दलित अधिकार कार्यकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में SC-ST एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए युवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर हाईकोर्ट ने युवराज के खिलाफ पुलिस की उत्पीड़न कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. अभी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है.

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युवराज सिंह के खिलाफ करीब 8 महीने बाद हरियाणा पुलिस ने SC/ST Act में दर्ज की एफआईआर

रजत कलसन ने न्‍यूज़18 हिंदी (डिजिटल) को बताया कि इस मामले में युवराज सिंह की तरफ से अपने बचाव में दी गई दलीलों से असंतुष्‍ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्रिकेट युवराज सिंह को पुलिस के समक्ष सरेंडर करने और जांच में सहयोग देने के आदेश दिए थे. इसके बाद बीते शनिवार को क्रिकेटर युवराज सिंह हांसी पुलिस के समक्ष पेश हुए थे, जहां से हांसी पुलिस उन्‍हें हिसार के गजेडिट ऑफि‍सर्स जियो मैस ले गई. यहां युवरात से करीब दो से तीन घंटे से पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्‍हें औपचारिक रूप से अरेस्‍ट कर लिया गया और अंतरिम जमानत पर छोड़ दिया गया.

रजत कलसन ने आरोप लगाया कि इस पूरी कार्रवाई के सख्‍त होने की बजाय पुलिस ने युवराज को वीआईपी ट्रिटमेंट दिया. यहां तक की पुलिसवालों ने उनके साथ फोटो तक खिंचवाए. उन्‍होंने कहा कि नियमानुसार पुलिस ने उन्‍हें कार्रवाई से अवगत तक नहीं कराया.

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उन्‍होंने बताया कि अब वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करेंगे. उनकी ओर से बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की जाएगी, क्‍योंकि एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) में अंतरिम जमानत का प्रावधान नहीं है. यह आदेश गलत है और इससे समाज में एक्‍ट को लेकर गलत संदेश जाएगा. उन्‍होंने कहा कि हम इस उनकी अंतरिम जमानत को कैंसिल कवारकर जेल भिजवाएंगे.

बता दें कि युवराज पर आरोप है कि उन्होंने बीते साल रोहित शर्मा से लाइव चैट के दौरान युजवेंद्र चहल पर अनुसूचित जाति के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसके खिलाफ दलित अधिकार कार्यकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में SC-ST एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए युवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर हाईकोर्ट ने युवराज के खिलाफ पुलिस की उत्पीड़न कार्रवाई पर रोक लगा दी थी. अभी मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है.

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Caste comment case Yuvraj Singh not cooperating in investigation PP told Punjab and Haryana High Court

जातिगत टिप्‍पणी मामला: युवराज सिंह नहीं कर रहे जांच में सहयोग, सरकारी वकील ने हाईकोर्ट को बताया

नई दिल्‍ली: अनुसूचित जाति समाज (Scheduled Caste Community) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में दर्ज केस को खारिज करने के लिए क्रिकेटर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) द्वारा दायर अर्जी पर शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) में सुनवाई हुई. युवराज पर हरियाणा (Haryana) के हांसी थाना (Hansi Police Station) शहर में अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम (SC/ST Act) व भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत मामला दर्ज है.

सुनवाई के दौरान युवराज सिंह (Yuvraj Singh) की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पुनीत बाली ने हाईकोर्ट की बेंच के समक्ष कहा कि वे इस मामले में एक रिजॉइंडर फाइल करना चाहते हैं इसलिए उन्हें समय दिया जाए, जिस पर शिकायतकर्ता वकील रजत कलसन (Advocate Rajat Kalsan) के अधिवक्ता अर्जुन श्योराण ने कहा कि इस मामले में पहले ही बहुत समय दिया जा चुका है तथा आज की पेशी अंतिम बहस के लिए मुकर्रर थी और वे इस मामले में बहस करना चाहते हैं, इसलिए इस मामले में बहस सुनी जाए.

इस दौरान बेंच ने सरकारी वकील से जांच का स्टेटस पूछते हुए कहा कि क्या युवराज सिंह को और जांच में शामिल किया गया है? इस पर सरकारी वकील ने आरोप लगाया कि युवराज सिंह एक बार जांच में शामिल हुए हैं. उनकी तरफ से जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा है और तथा ना ही उनकी तरफ से अपना मोबाइल फोन पुलिस को सौंपा गया है.

इस पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने युवराज सिंह के वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर आप जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो अदालत इस मामले में युवराज सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बारे में लगाई गई रोक को हटाने से गुरेज नहीं करेगी. इस पर युवराज सिंह के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता युवराज सिंह दुबई गए हैं और आते ही वह जांच में शामिल होकर पूरा सहयोग करेंगे.

शिकायतकर्ता के अधिवक्ता अर्जुन श्योराण ने अदालत से कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई की जल्‍द ही कोई तारीख दी जाए, जिस पर कोर्ट ने अगली तारीख 6 सितंबर मुकर्रर की.

गौरतलब है कि युवराज ने अनुसूचित जाति समाज के खिलाफ अपमानजनक व आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसके चलते उसके खिलाफ दलित अधिकार कार्यकर्ता रजत कलसन ने हांसी थाना शहर में एससी एसटी एक्ट व आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. इस मुकदमे को खारिज कराने के लिए युवराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर हाईकोर्ट ने युवराज के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी.