मनोरंजन ब्यापारी : रिक्शा चालक से दलित साहित्यकार तक का सफर, संघर्ष भरी कहानी

Manoranjan Byapari

कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election) में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आने का दावा ठोंक रही हैं. सालों बाद भी राजनीतिक गलियारों में गिने-चुने नाम ही हैं जिनकी आंधी देखने को मिल रही है. हालांकि जो उम्मीदवार रण में उतारे गए हैं वो एक से एक बढ़कर हैं. इन्हीं में एक हैं बालागढ़ विधानसभा सीट से टीएमसी के प्रत्याशी मनोरंजन ब्यापारी (Manoranjan Byapari) की कहानी. मनोरंजन ब्यापारी का सफर न सिर्फ दिलचस्प है बल्कि संघर्षों की दास्तान भी है.

हर वक्त गले में गमछा डाले और एक बैग साथ में लिए दिखने वाले ब्यापारी रिक्शा चालक रह चुके हैं. फिर 23 साल तक कुक रहे, फिर मजदूरी की, उसके बाद बड़े लेखक बने और अब राजनीति के सफर पर रास्ता तय करने के लिए निकल चुके हैं.

दलित साहित्य में बड़ी आवाज है मनोरंजन ब्यापारी
मनोरंजन ब्यापारी को बंगाली दलित साहित्य (Bengali Dalit Sahitya) में बड़ी आवाज माना जाता है. वे बड़े सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता हैं. कोई औपचारिक शिक्षा न लेने के बावजूद वो अब तक दर्जनों उपन्यास और सैंकड़ों लघु कहानियां लिख चुके हैं. इसके अलावा सामाजिक मुद्दों पर भी लगातार लेखन करते रहते हैं.

बांग्लादेश के रहने वाले हैं ब्यापारी
बांग्लादेश के रहने वाले मनोरंजन ब्यापारी ने कई बार ऐसा काम किया है, जिसके कारण उनका नाम सुर्खियों में आया है. ब्यापारी ने नक्सल मूवमेंट के दौरान भी दिलचस्पी दिखाई थी. बालागढ़ में ब्यापारी की एक अनोखी पहचान है. उनका कहना है कि बीजेपी के अमित शाह (Amit Shah) हों या फिर अन्य वरिष्ठ नेता चाहे कोई कितने भी दावे ठोक ले, लेकिन दोबारा सत्ता में वापसी तो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी की होगी. उनका मानना है कि पश्चिम बंगाल की जनता ममता पर एक बार फिर भरोसा करेगी.

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