दिल्‍ली पुलिस

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EXCLUSIVE: जिस दलित डॉक्‍टर को ‘SC-काली बिल्‍ली’ बुलाया गया, उनकी आवाज़ भी इंक्‍वायरी में दबाई गई

देश के सबसे बड़े/स्‍पेशलिस्‍ट अस्‍पताल कहे जाने वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान यानि एम्‍स (AIIMS) में एक वरिष्ठ महिला रेजिडेंट डॉक्टर को जातिगत उत्‍पीड़न का शिकार होना पड़ा है. यहां सेंटर फॉर डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च (सीडीईआर) के एक फैकल्टी मेंबर के खिलाफ रेजिडेंट डॉक्‍टर ने एफआईआर दर्ज कराते हुए कहा है कि फैकल्टी मेंबर ने डॉक्टर के लिए अभद्र जातिगत टिप्‍पणी करते हुए कहा कि तू एससी है. अपना मुंह बंद कर और काली बिल्ली की तरह मेरा रास्ता मत काट.

एम्‍स (AIIMS) की रेजिडेंट डॉक्‍टर्स एसोसिएशन के अध्‍यक्ष डॉ. आदर्श प्रताप सिंह ने दलित आवाज़ डॉट कॉम (dalitawaaz.com) से एक्‍सक्‍लूसिव बातचीत करते हुए इस घटना का पूरा सिलसिलेवार ब्‍यौरा दिया और उन्‍होंने इस पूरे मामले पर प्रकाश डाला. डॉ. आदर्श प्रताप सिंह ने बताया क‍ि पीडि़त महिला डॉक्‍टर को पिछले एक-डेढ़ साल से यह सब झेलना पड़ रहा था और उनकी तरफ से अपने विभागाध्‍यक्ष से लेकर एम्‍स की हर उच्‍च कमेटी तक से बारे में शिकायत की गई, लेकिन हर बार उनकी आवाज़ को दबा दिया गया. उन्‍होंने स्‍वीकार किया कि एम्‍स में कहीं न कहीं एससी/एसटी डॉक्‍टरों को जातिगत उत्‍पीड़न का शिकार होना पड़ता हैं.

आइये जानते हैं पूरी घटना को, जैसा की डॉ. आदर्श प्रताप सिंह ने बताया…

फैकल्‍टी मैंबर महिला डॉक्‍टर को जातिसूचक शब्‍दों का इस्‍तेमाल कर बुलाता था
मूल रूप से पूर्वी उत्‍तर प्रदेश की रहने वाली महिला डॉक्‍टर को पिछले एक डेढ साल से यह सब झेलना पड़ रहा था. फैकल्‍टी मैंबर महिला डॉक्‍टर को जातिसूचक शब्‍दों का इस्‍तेमाल कर बुलाता था. इस बारे में महिला डॉक्‍टर ने कई बार अपने हेड ऑफ डिपार्टमेंट को भी सूचित किया, लिखित तौर पर शिकायत भी की, लेकिन हमेशा उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई. उन्‍होंने एक-दो महीने पहले अपने एचओडी को कंप्‍लेंट भी दी. साथ ही एम्‍स निदेशक, एम्‍स रेडिजेंट डॉक्‍टर्स एसोसिएशन और इंस्‍टीटयूशन में एससी/एसटी कमेटी को भी सूचना दी. एक महीना बीत जाने के बाद भी कुछ एक्‍शन नहीं लिया गया.

हर इंक्‍वायरी में महिला डॉक्‍टर की आवाज़ को दबाया गया
कम से कम एक-दो हफ्ते के बाद प्राइमरी इंक्‍वायरी बैठाई गई. उसमें भी इंटरनल इंक्‍वायरी हुई और उनकी आवाज को ही यह कहकर दबाने की कोशिश की गई कि अपनी कंप्‍लेंट वापस ले लो, ऐसा होता रहता है. अगली कमेटी में भी इंटरनल इंक्‍वायरी हुई और उसमें भी वही सब हुआ और उनकी आवाज को दबाया गया. इन सभी के चलते वो काफी परेशान थीं.

AIIMS File Photo
एम्‍स का फाइल फोटो…

एचओडी ने कभी आरोपी फैकल्‍टी मेंबर डॉक्‍टर पर एक्‍शन नहीं लिया
यह बार यह घटना जो हुई, एक फैकल्‍टी मेंबर हैं जो बार-बार महिला डॉक्‍टर के साथ ऐसा र्दुव्‍यवहार करता था. उनके बारे में कई बार एचओडी से शिकायत की गई थी, लेकिन एचओडी ने भी एक्‍शन नहीं लिया. उन्‍होंने महिला डॉक्‍टर की आवाज़ को दबाने में एक तरह से फैकल्‍टी मेंबर का साथ दिया. उन्‍होंने महिला डॉक्‍टर को परेशान करने वाले फैकल्‍टी मेंबर पर कोई कार्रवाई ही नहीं की.

राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने मांगी है पूरी फाइल
एम्‍स ने इस मामले में इंक्‍वायरी बैठा दी है. वहीं, इस मामले में दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) की तरफ से एफआईआर दर्ज कर ली गई है. राष्‍ट्रीय महिला आयोग एवं दिल्‍ली महिला आयोग ने भी एम्स प्रशासन से सारे डॉक्‍टयूमेंट मांगे. हालांकि अभी उनकी तरफ से क्‍या एक्‍शन लिया गया, इसकी कोई आधिकारिक सूचना हमारे पास नहीं है.एनसीडब्‍ल्‍यू ने एम्‍स निदेशक से इस पूरे मामले के दस्‍तावेज उन्‍हें एक फाइल में सौंपने और उनकी तरफ से इस बारे में क्‍या कार्रवाई की गई, इसका स्‍पष्‍टीकरण मांगा गया है.

सरकार ने अभी तक नहीं द‍िया कोई जवाब
इस घटना को लेकर आरडीए की तरफ से सरकार को पत्र लिखकर कार्रवाई करने एवं पीडि़त डॉक्‍टर को न्‍याय दिलाने की मांग की गई, लेकिन सरकार की तरफ से अभी हमें कोई जवाब नहीं आया है. केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को भेजे गए पत्र का जवाब अभी तक रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को नहीं मिला है.

‘लोगों की आवाज को कितना दबाया जाता है, यह बातें लोगों को पता लगनी चाहिए’
दरअसल, अब ये मेडिको लीगल केस हो गया है. पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. हम चाहते हैं पुलिस भी प्राथमिकता के आधार पर इसमें कार्रवाई करे. बतौरआरडीए प्रेजिडेंट मैंने इन सब बातों को लोगों के बीच में रखा, क्‍योंक‍ि इतने प्रतिष्‍ठ‍ित संस्‍थान में ऐसी सब घटनाओं का बढ़ना बहुत शर्म की बात है. इस बात को पूरा देश और दुनिया जाने कि इंस्‍टीटयूशन में इस प्रकार की चीजें कितनी बढ़ती हैं. लोगों की आवाज को कितना दबाया जाता है, यह बातें लोगों को पता लगनी चाहिए. बाकी लोग इन सब चीजों को करने से डरें और हायर अथॉरिटी को भी इसका पता चले.

Court Order SC ST ACT

ACP ने ठीक से नहीं की दलित के केस की जांच, SC/ST ACT में दर्ज हो गई FIR

दिल्ली की एक अदालत ने एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST ACT) के तहत एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है. अदालत ने नोटिस के बावजूद अदालत में पेश होने में नाकाम रहने और एक आपराधिक मामले में कथित तौर पर एकतरफा जांच करने के तहत पुलिस अफसर पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने एसीपी बिजेन्द्र सिंह, जोकि आपराधिक मामले के जांच अधिकारी थे, के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) पश्चिमी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया और वरिष्ठ अधिकारी को 13 अप्रैल को एक अनुपालन रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहा. साथ ही कोर्ट ने संयुक्त आयुक्‍त को अदालत की टिप्पणियों के मद्देनजर मामले को ठीक से जांचने करने को भी कहा.

अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम Scheduled Caste/Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act की धारा 4 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए जो एक लोक सेवक द्वारा कर्तव्यों की जानबूझकर उपेक्षा के लिए सजा से संबंधित है.

यह आपराधिक मामला एक आवासीय क्षेत्र में पार्किंग विवाद से संबंधित है, जो पिछले साल जुलाई में हुआ था.

शिकायतकर्ता द्वारा इस आपराधिक मामले में दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि एसीपी बिजेन्द्र सिंह ने मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की और उन्होंने उसके पैतृक गांव में दिल्ली पुलिस के दो सिपाहियों सहित विभिन्न व्यक्तियों को भेजा था, जिसमें एक वकील भी था, ताकि वे उस पर अपनी शिकायत वापस लेने का दबाव डालें.

अदालत ने कहा कि एसीपी पर अपनी जिम्मेदारियों को दूसरों को सौंपने का आरोप लगाया गया है, जो अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) के नियम 7 का स्पष्ट उल्लंघन है. इसके तहत अब मामले की जांच एक पुलिस अधिकारी द्वारा की जाएगी, जोकि पुलिस उपाधीक्षक के स्तर से नीचे न हो. अदालत ने टिप्‍पणी में कहा क‍ि यह भी देखा गया कि एसीपी ने अन्य अधिकारियों के साथ एकतरफा पूछताछ की और आरोपी व्यक्तियों को गिरफ्तार करने में विफल रहे.

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‘तू एससी है, अपनी हद में रह, काली बिल्ली की तरह मेरा रास्ता मत काट’- एम्‍स डॉक्‍टर की आपबीती

देश के सबसे बड़े/स्‍पेशलिस्‍ट अस्‍पताल कहे जाने वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान यानि एम्‍स (AIIMS) में एक वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर को जातिगत उत्‍पीड़न का शिकार होना पड़ा है. यहां सेंटर फॉर डेंटल एजुकेशन एंड रिसर्च (सीडीईआर) के एक फैकल्टी मेंबर के खिलाफ रेजिडेंट डॉक्‍टर ने एफआईआर दर्ज कराते हुए बताया है कि पिछले महीने हुई इस घटना में फैकल्टी मेंबर ने डॉक्टर के लिए अभद्र जातिगत टिप्‍पणी करते हुए कहा कि तू एससी है. अपना मुंह बंद कर और काली बिल्ली की तरह मेरा रास्ता मत काट.

डॉक्‍टर की शिकायत पर दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) ने आरोपी फैकल्‍टी मेंबर के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की है.

बता दें कि बीते 17 अप्रैल को महिला डॉक्टर ने जाति और धर्म के आधार पर किए जा रहे भेदभाव के चलते आत्महत्या करने की कोशिश की थी. यह महिला डॉक्टर दवा के ओवरडोस के चलते अपने छात्रावास में बेहोश पाई गईं थी. इसके बाद उनके दोस्तों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था. अब उनकी हालत स्थिर है और जल्द ही उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी.

दक्षिण दिल्ली रेंज के संयुक्त आयुक्‍त देवेश श्रीवास्तव के अनुसार, महिला चिकित्सक की शिकायत पर हौज खास पुलिस स्टेशन (Hauz Khas Police Station) में एफ़आईआर दर्ज की गई है. पीडि़त डॉक्‍टर का बयान दर्ज किया गया है और जांच की जा रही है. वहीं, एम्स के एक रेजिडेंट डॉक्टर के अनुसार, मामले की जांच के लिए एक आंतरिक सहित दो समितियां गठित की गई है.

एफ़आईआर में वरिष्ठ डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि पिछले दो साल से फैकल्टी मेंबर मेरे खिलाफ भेदभाव कर रहा है. इस बारे में मेरी तरफ से सीडीईआर प्रमुख से शिकायत भी की गई, लेकिन हर बार मुझे लिखित शिकायत देने से रोक दिया गया.

डॉक्टर ने कहा कि बीते 16 मार्च को फैकल्टी मेंबर ने रोगियों और तिमारदारों के सामने उनके लिए असभ्य भाषा और जातिवादी गालियों का इस्तेमाल किया. डॉक्टर ने बताया की एक दिन फैकल्टी मेंबर ने उन्हें हिंसक रूप से उनकी सीट से भी हटाते हुए कहा था कि तू एक एससी है और अपनी हद में रह.

एफआईआर में महिला डॉक्‍टर ने कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने फैकल्टी मेंबर से कहा कि वह ऐसी बातें नहीं कह सकते. इसके बाद वह अन्य रोगियों को देखने चली गईं.

डॉक्टर का यह भी कहना है कि उन्हें थोड़ी देर बाद सीडीईआर प्रमुख के कमरे में बुलाया गया. यहां सीडीईआर ने उनपर चिल्लाते हुए कहा कि वे एक फैकल्टी मेंबर के साथ दुर्व्यवहार नहीं कर सकती हैं.

पुलिस को दिए गए बयान के मुताबिक, महिला डॉक्‍टर ने फैकल्टी मेंबर के खिलाफ सीडीईआर प्रमुख, एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, एम्स एससी और एसटी सेल, महिला शिकायत सेल और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को भी शिकायत भेजी थी.

उनका यह भी कहना है कि बीते 17-23 मार्च तक उन्‍हें अपमानित किया गया और जब 9 अप्रैल को एक समिति ने इस बारे में उनसे मुलाकात की तो उनसे अपनी शिकायत वापस लेने के लिए भी कहा गया.