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It is necessary to encourage employment in India says Milind Kamble DICCI

देश में रोजगार को प्रोत्साहित करना जरूरी : DICCI संस्थापक मिलिंद कांबले

नई दिल्‍ली/औरंगाबाद : दलित इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (DICCI) के संस्थापक मिलिंद कांबले (Milind Kamble) ने कहा कि कोविड-19 महामारी (Covid 19 Pandemic) के बीच देश में रोजगार को प्रोत्साहित करना जरूरी है और केंद्र ने 2022-23 के आम बजट में एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कदमों की रूपरेखा पेश कर ऐसा ही करने की कोशिश की है. कांबले ने यहां संवाददाताओं से चर्चा में कहा कि अनुसूचित जातियों (एससी) के बीच उद्यमशीलता को प्रोत्साहन (Encourage Entrepreneurship among the Scheduled Castes) देने के लिए केंद्र ने ‘डॉक्टर आंबेडकर यंग एंटरप्रेन्योर लीग 2022’ (Dr. Ambedkar Young Entrepreneur League 2022) की शुरुआत की है.

उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने सामाजिक न्याय विभाग के आंबेडकर सामाजिक नवाचार एवं इनक्यूबेशन मिशन (एएसआईआईएम) के तहत आंबेडकर यंग एंटरप्रेन्योर (एवाईई) लीग प्रतियोगिता शुरू की है जिसके तहत वह देश में 1,000 व्यावसायिक विचारों को धन देगी.’’

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मिलिंद कांबले (Milind Kamble) ने कहा कि प्रमुख संस्थानों की साझेदारी में राष्ट्रीय स्तर की यह प्रतियोगिता तीन चरणों में होगी. उन्होंने कहा कि एवाईई लीग के तहत 15 फरवरी तक व्यावसायिक विचारों को आमंत्रित किया गया है और आठ आईआईटी तथा दो आईआईएम के विशेषज्ञ उनकी पड़ताल करेंगे.

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डिक्की (DICCI) संस्थापक ने कहा कि इस प्रतियोगिता का अंतिम चरण दिल्ली में आयोजित होगा. आम बजट के बारे में कांबले ने कहा कि इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘महामारी के बीच देश में रोजगार को बढ़ावा देना जरूरी था. सरकार ने (बजट में) ऐसा करने की कोशिश की है. इसके साथ ही सरकार ने खर्च भी बढ़ाया है और एमएसएमई क्षेत्र के लिए कई कदम उठाए हैं.’’

 

Dr Ambedkar Young Entrepreneurs AYEE League for SC Youths Bring innovative business ideas win 30 lakh rupees

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नई दिल्‍ली : आईएफसीआई वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड (IFCI Venture Capital Funds Limited) द्वारा अनुसूचित जाति (एससी) के युवाओं (Scheduled Caste Youth) के लिए राष्ट्रीय स्तर एक प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है. यह प्रतियोगिता “डॉ. आंबेडकर यंग एंटरप्रेन्योर्स लीग (एवाईई लीग)” (Dr. Ambedkar Young Entrepreneurs League, AYEE Leauge) के नाम से आयोजित की जा रही है. इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का लक्ष्य पूरे देश के अनुसूचित जाति के युवाओं द्वारा उद्यमिता के क्षेत्र में नवीन विचारों की खोज करना है. इसमें आवेदन शुरू करने की तिथि दिनांक 21 जनवरी 2022 एवं अंतिम तिथि 15 फरवरी 2022 है.

डॉ. आंबेडकर यंग एंटरप्रेन्योर्स लीग (एवाईई लीग)” (Dr. Ambedkar Young Entrepreneurs League, AYEE Leauge) के तहत आवेदन करने के लिए, पात्रता मानदंड निम्नलिखित है:
• प्रतिभागी के पास वैध अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय प्रमाण पत्र होना चाहिए.
• प्रतिभागी की आयु 18 वर्ष और उससे अधिक होनी चाहिए.
• प्रतिभागी के पास आर्थिक रूप से समृद्ध एक इनोवेटिव बिजनेस आईडिया होना चाहिए.

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एवाईई लीग (AYEE Leauge) का संक्षिप्त विवरण :
यह प्रतियोगिता 2 चरणों में आयोजित की जाएगी:

चरण 1 – स्क्रीनिंग राउंड: इसमें सभी अनुसूचित जाति (SC) के आवेदक, जिनकी उम्र 18 वर्ष और उससे अधिक हो और जो एक नवोन्मेषी व्यावसायिक विचार पर काम कर रहे है, वे इस प्रतियोगिता के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन पत्र परियोजना/नवाचार के विवरण और एक वैध अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र (SC certificate) के साथ पूरी तरह से भरा जाना चाहिए. अंतिम तिथि तक प्राप्त सभी आवेदनों को एक प्रतिष्ठित जूरी द्वारा शॉर्टलिस्ट किया जाएगा. योग्य पाए गए आवेदनों को स्टेज 2 पर आगे बढ़ाया जाएगा.

चरण 2 -अंतिम दौर: दूसरा चरण देश के कुछ प्रमुख शहरों मे, कुछ प्रतिष्ठित भागीदार संस्थानों के साथ मिलकर, कोविड प्रोटोकॉल (covid protocol) को ध्यान मे रखते हुए ऑनलाईन या ऑफलाईन मोड में आयोजित किया जाएगा. स्टेज 1 के शॉर्टलिस्ट किए गए आवेदकों को स्टेज 2 में चयन पैनल / जूरी के समक्ष अपने विचार प्रस्तुत करने होंगे. स्टेज 2 के विजेताओं को एवाईई लीग के विजेता के रूप में घोषित किया जाएगा और उन्हें 30 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता के लिए विचार किया जाएगा. यह आर्थिक सहायता आंबेडकर सोशल इनोवेशन इनक्यूबेशन मिशन (ASIIM) योजना के दिशानिर्देशों के तहत 3 साल की अवधि के लिए होगी.

एवाईई लीग (AYEE Leauge) के विजेताओं के लिए पुरस्कार इस प्रकार हैं:
• नवोन्मेष के लिए खर्च को पूरा करने के लिए आंबेडकर सोशल इनोवेशन इनक्यूबेशन मिशन (ASIIM) के तहत 30 लाख रुपये तक की इक्विटी फंडिंग.
• मेंटरशिप और हैंडहोल्डिंग सपोर्ट.
• प्रमुख संस्थानों में कौशल विकास का अवसर.
• मेगा इवेंट – एवाईई लीग के विजेताओं को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले मेगा इवेंट में उनके अभिनव विचारों के लिए सम्मानित किया जाएगा.

सभी को इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लेने और पूरे भारत में अनुसूचित जाति के युवाओं (SC Youth) की बड़ी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए आमंत्रित करना चाहते हैं. आपकी भागीदारी कार्यक्रम को अत्यधिक महत्व देगी.

इस राष्ट्रीय आयोजन के बारे में अधिक जानकारी के लिए और ऑनलाइन आवेदन जमा करने के लिए वेबसाइट –https://www.ayel.in जाएं.

Dalit Business Woman Kalpana Saroj

दलित बिजनेसवुमेन कल्‍पना सरोज: 2 रुपये की नौकरी से लेकर 750 करोड़ ₹ टर्नओवर की कंपनी का सफर

देश में ऐसे कई दलित भी हैं, जिन्‍होंने संघर्षों का सामना कर सफलता की नई कहानी लिखी हैं. जीवन में कठिन संघर्ष हालातों को पार करने के बाद उन्‍होंने सुनहरे भविष्‍य की ओर कदम रखा और फर्श से अर्श तक का सफर तय किया और दूसरे दलितों के लिए आदर्श बन रहे हैं. इन्‍हीं में से एक नाम हैं कल्‍पना सरोज का. कल्‍पना ने जीवन में कठिन दौर देखा और आज वह एक सक्‍सेसफुल बिजनेसमैन हैं, जिनकी कंपनी का टर्नओवर करोड़ों का है. यहां तक की उन्‍हें पद्मश्री पुरस्‍कार भी मिल चुका है.

दलित बिजनेवुमेन कल्‍पना सरोज (Dalit Business Woman Kalpana Saroj)

पहले आपको बता दें कि कल्‍पना सरोज मुंबई स्थित कंपनी कमानी ट्यूब्‍स की चेयरपर्सन हैं. अब बात करते हैं उनकी जिंदगी की. कल्‍पना सरोज का जन्‍म महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव रोपरखेड़ा के गरीब दलित परिवार में हुआ. उनके पिताजी पुलिस में हवलदार थे.

कल्‍पना का ब्‍याह 12 साल की उम्र में ही हो गया. इसके बाद वह मुंबई के एक स्‍लम इलाके में रहने लगीं. उनके लिए शादी के बाद का जीवन बेहद कठिन था. ससुरालवाले उन्‍हें बहुत परेशान करते थे. इससे मजबूर होकर उन्‍हें अपने पिता के घर वापस लौटना पड़ा.

इसके बाद उन्‍होंने अपने चाचा के पास मुंबई जाने का फैसला किया. उन्‍हें सिलाई का काम आता था. इस वजह से उनके चाचा एक कपड़ा मिल में काम दिलाने ले गए, लेकिन हड़बड़ाहट में वह वहां सिलाई की मशीन नहीं चल पाई और मिल मालिक ने पहले तो काम देने से मना कर दिया, लेकिन बाद में रोजाना 2 रुपए के मेहनताने पर धागा काटने का काम दे दिया.

इसी बीच अचानक उनकी बहन बहुत बीमार रहने लगी. इलाज के लिए पैसे न होने की वजह से उनकी मौत हो गई. इसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वह अपनी गरीबी को खत्‍म कर देंगी. लिहाजा, पहले उन्‍होंने घर में कुछ सिलाई मशीनें लगाईं और बाद में कुछ पैसे जोड़कर एक छोटा सा फर्नीचर बिजनेस शुरू कर लिया. इस दौरान उन्‍होंने 1 लाख रुपये में एक विवादित प्‍लॉट खरीदा. इसकी कीमत बाद में 50 लाख रुपये हो गई. कल्पना ने इस पर कंस्ट्रक्शन कराने के लिए एक बिजनेसमैन से पार्टनरशिप की.

मुनाफे में से 65 फीसदी रकम कल्पना को मिली. इससे उन्होंने 4.5 करोड़ रूपए कमाए. बाद में वह कर्ज में डूबी कमानी ट्यूब्‍स से जुड़ीं. उन्‍होंने उसे प्रोफिटेबल कंपनी बना दिया. साल 2006 में वह इसकी मालिक बन गईं. आज उनकी कंपनी 750 करोड़ टर्नओवर की कंपनी बन गई है. उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें 2013 में पद्मश्री सम्मान भी दिया गया.