Komal Ahirwar

further plan of Bhim Army and Azad Samaj Party on OBC reservation in Madhya Pradesh

OBC Reservation: मध्‍यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर अब भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी का अगला प्‍लान क्‍या है?

नई दिल्‍ली/भोपाल : मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) को लेकर आंदोलन में शामिल होने पहुंचे आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) को रविवार को भोपाल में हिरासत में लिए जाने और फि‍र देर रात रिहा किए जाने के बाद माहौल गर्म है. प्रदेश में संगठन और पार्टी के कार्यकर्ताओं-समर्थकों को बड़ी तादाद में पुलिस-प्रशासन द्वारा हिरासत में लेने, उनकी गाडि़यों पर हमला किए जाने के कई वीडियो सामने आए. इसके बाद ओबीसी आरक्षण को लेकर भीम आर्मी (Bhim Army) -असपा ने चुप नहीं बैठने को फैसला लिया है, बल्कि इस आंदोलन को व्‍यापक रूप से आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद एक बार फि‍र मध्‍य प्रदेश का दौरा कर सकते हैं.

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पार्टी-संगठन के एक-एक कार्यकर्ता की रिहाई को लेकर अड़े रहे चंद्रशेखर आजाद
आजाद समाज पार्टी के मध्‍यप्रदेश अध्‍यक्ष कोमल अहिरवार (Komal Ahirwar) ने दलित आवाज़ डॉट कॉम (dalitawaaz.com) से विशेष बातचीत में बताया कि OBC Reservation को लेकर आवाज़ उठाने के लिए आए पार्टी एवं संगठन प्रमुख चंद्रशेखर आजाद एवं उनके साथियों को भोपाल एयरपोर्ट पर उतरते ही भोपाल पुलिस एवं प्रशासन ने हिरासत में ले लिया. उन्‍हें पूरा दिन डिटेन रखा गया. इस दौरान उन्‍हें डिटेन करने वाले डीआईडी ने किसी का भी फोन नहीं उठाया. उन्‍होंने कहा कि इस दौरान चंद्रशेखर आजाद भी अड़े रहे कि जब तक प्रदेश में हिरासत में लिए गए भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के एक एक कार्यकर्ता को रिहा नहीं कर दिया जाएगा, वह वापस फ्लाइट में नहीं बैठेंगे. उन्‍होंने बताया कि जब यह स्‍पष्‍ट हो गया कि उनके एक-एक कार्यकर्ता को छोड़ दिया गया है, तभी रात को 10 बजे उन्‍हें हिरासत से छोड़ा गया और रात साढ़े 11 बजे की फ्लाइट से चंद्रशेखर आजाद दिल्‍ली रवाना हुए.

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22 कार्यकर्ताओं को भोपाल से उठाकर 87 किलोमीटर दूर ले जाया गया…
कोमल अहिरवार ने कहा कि रविवार को मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुलिस-प्रशासन ने दमनकारी नीतियां अपनाते हुए उन्‍हें भी दमोह स्थित उनके घर में नजरबंद कर दिया. उनके फोन भी बंद करा दिए गए और मजबूरी में उन्‍हें दूसरों के फोन से बात करनी पड़ी. उन्‍होंने बताया क‍ि कुछ जगह भी असपा और भीम आर्मी के सदस्‍यों के साथ पुलिस ने गलत बर्ताव दिखाया. उनका आरोप है कि गुना जिला थाना मकसूद उकवट चौकी के टीआई उनके करीब 22 कार्यकर्ताओं को भोपाल से उठाकर 87 किलोमीटर दूर ले गए और कहते रहे कि जब तक भोपाल से आदेश नहीं आएंगे तो वे उन्‍हें छोड़ेंगे नहीं. बाद में रात में नौ बजे इन लोगों को छोड़ा गया.

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पुलिस ने वाहनों को किया क्षतिग्रस्‍त..
उनका कहना है कि इस दौरान प्रदेश में जगह-जगह भीम आर्मी और आजाद समाज पाटी के लोगों के वाहनों को भी पुलिस द्वारा क्षतिग्रस्‍त किया गया, जिसके वीडियो भी पार्टी एवं संगठन कार्यकर्ताओं की ओर से बनाए गए, जोकि सोशल मीडिया पर वायरल भी हैं.

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अब आगे क्‍या है रणनीति?
कोमल अहिरवार ने बताया कि हमने फैसला लिया है क‍ि जब तक ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण (OBC Reservation) नहीं मिल जाएगा, तब तक ये लड़ाई जारी रहेगी. उन्‍होंने बताया क‍ि प्रदेश की टीम से हुई चर्चा के अनुसार, आगे की रणनीति के तहत साल 2023 तक पूरे मध्‍य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान जहां-जहां भी जाएंगे, वहां-वहां भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी उन्‍हें काला झंडा दिखाएगी और उनका पुतला दहन करेगी. उन्‍होंने यह भी कहा कि शिवराज सिंह चौहान को चप्‍पल-जूतों की माला भी पहनाई जाएगी.

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Bhopal Two Sanitation workers died while cleaning Sewer without security equipment

भोपाल : बिना सुरक्षा उपकरण सीवर टैंक में उतरे दो लोगों की मौत, अफसर बनना चाहता था मृतक युवक

पाल. मध्‍यप्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी में भोपाल (Bhopal) में 20 फीट गहरे सीवर की सफाई के दौरान दो लोग हादसे का शिकार हो गए. गुजरात की एक कंपनी के इंजीनियर दीपक सिंह और एक अन्य नाबालिग छात्र सीवर की जांच के ल‍िए उसमें उतरे थे, जिससे उनकी मौत (Two Sanitation workers died while cleaning the Sewer) हो गई. गंभीर बात यह है कि इस उनके पास सुरक्षा उपकरण भी नहीं थे, जबकि मनुअल स्‍केवेजिंग कानून (THE PROHIBITION OF EMPLOYMENT AS MANUAL SCAVENGERS AND THEIR REHABILITATION ACT, 2013) में इसका सख्‍त प्रावधान है कि बिना सुरक्षा एवं अन्‍य सहायक उपकरणों के किसी भी शख्‍स को गटर, सीवर आदि में उतारा नहीं जा सकता.

सरकार सीवर, सेप्टिक टैंक में सफाई करते लोगों की ‘अमानवीय मौत’ का आंकड़ा क्‍यों छिपा रही है?

सीवर सफाई का काम गुजरात की एक प्राइवेट कंपनी करा रही थी
भोपाल नगर निगम (Bhopal Municipal Corporation) के अंतर्गत जोन नंबर-1 के लाऊखेड़ी में एक निजी कंपनी सीवेज (Sewer Cleaning) का काम कर रही है. सीवेज लाइन अभी बंद है, लेकिन उसमें बारिश और घरों से निकलने वाला गंदा पानी भर गया. सोमवार को कंपनी के इंजीनियर दीपक सिंह और एक अन्य छात्र भारत जांच करने के लिए गए थे. ये दोनों काफी समय बाद तक बाहर नहीं निकले. इसके बाद उनकी तलाश शुरू की गई.

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दोपहर बाद मिले दोनों सफाई कर्मियों के शव
रिपोर्ट के मुताबिक, उनके काफी समय तक बाहर नहीं निकलने पर प्राइवेट कंपनी के अधिकारियों ने आनन-फानन में उनकी तलाश शुरू करवाई. काफी मशक्कत के बाद दोपहर बाद दोनों के शव निकाले गए. इस दौरान मौके पर इन दोनों लोगों के पास न तो कोई सफाई उपकरण थे और न ही उनके पास सुरक्षा के कोई उपकरण मौजूद थे.

दम घुटने की वजह से हुई मौत
रिपोर्ट कहती है कि दोनों जब बिना सुरक्षा उपकरण सीवर में उतरे थे, तो इतने गहरे सीवर में उतरने की वजह से दोनों को ऑक्सीजन की कमी हुई, जिससे उनका दम घुटने लगा और दोनों की मौत हो गई.

इंजीनियर के साथ जिस नाबालिग की मौत हुई वह अफसर बनना चाहता था. वह झाबुआ से कुछ किताबें खरीदने पिता के पास भोपाल आया. पिता पर आर्थिक बोझ ना पड़े, इसके लिए वो 13 दिसंबर को चैंबर के काम के लिए चला गया. वीडियो में रोते बिलखते पिता शैतान सिंह सिर्फ इतना कह पाए काम कर रहे थे. इस कंपनी में खाना खाकर सुपरवाइजर उसे लेकर गया.

देखें इस घटना का वीडियो…

जिम्मेदार अधिकारियों नहीं दिया कोई जवाब
हालांकि इस मामले में अभी तक भोपाल नगर निगम (Bhopal Municipal Corporation) का कोई बयान सामने नहीं आया है. संबंधित अधिकारी इस घटना में कोई भी जवाब देने के साथ अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं.

 

मंजीत नौटियाल प्रधानमंत्री से बोले, ये लाशें देख‍िए…
भीम आर्मी के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष मंजीत सिंह नौटियाल ने इस घटना पर नाराजगी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किए हैं. उन्‍होंने ट्विटर पर लिखा, पहले गटर में मारना दूसरी तरफ साथ में खाना. मोदी जी हमारे साथ खाना खाने से अच्छा आप हमारे सफाई कर्मचारियों को गटर में मरने से बचा लीजिये, ये काफी हैं. मध्यप्रदेश के भोपाल में सेफ्टी गियर्स के ना होने के चलते गटर में उतरने वाले 2 कर्मचारियों की मौत हो गई. यह लाशें @narendramodi देखो.

(Manual Scavenging) 

सफाई कर्मचारियों के हकों के लिए अदालत जाने वाले वकील अमित साहनी ने जताई नाराजगी
भोपाल में हुई इस घटना को लेकर वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी ने रोष जाहिर किया है. उन्‍होंने कहा कि इस धरती पर मैनुअल स्‍केवेजिंग से बड़ा मानवाधिकार का कोई उल्‍लंघन नहीं. भारत में जब मैला ढोने की प्रथा को अमानवीय करार देकर बंद किया गया, तो वो एक सराहनीय कदम था. इसके बाद भी दूरदराज के क्षेत्रों में यह प्रथा आज भी जारी है. किसी इंसान का मल में उतरकर मल की सफाई करने के इस काम के ज्‍यादा अमानवीय और मानवाधिकार का उल्‍लंघन करने का कृत्‍य कुछ और नहीं हो सकता. यह प्रथा आज भी भारतीय समाज पर कलंक है, जिसे आजादी के बाद भी खत्‍म नहीं किया जा सका. केंद्र, राज्‍य सरकारें और उनके संबंधित प्राधिकरण आज भी सफाई कर्मचारियों के हितों को लेकर आंखें मूंदे हुए हैं और कानूनी प्रावधानों के बावजूद बिना सुरक्षा और अन्‍य उपकरणों के सफाई कर्मचारियों को सीवर, नालों, गटर आदि में सफाई करने के लिए उतारा जाता है, जिससे दम घुटने और अन्‍य कारणों से उनकी मौत तक हो जाती है.

बता दें कि एडवोकेट अमित साहनी ने सीवर और सेप्टिक टैंकों की हाथ से सफाई करने के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए Manual Scavengers and their Rehabilitation Act, 2013 का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग को लेकर दिल्‍ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्‍होंने हाईकोर्ट में दायर आवेदन में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले (Ramdas Athawale) के राज्यसभा में दिए उस बयान का जिक्र किया गया था कि पिछले पांच साल में ‘‘मैनुअल स्कैवेंजिंग (Manual Scavenging) के कारण किसी की भी मौत नहीं हुई.’’ एप्‍लीकेशन में दावा किया गया है कि केंद्रीय राज्यमंत्री द्वारा संसद के ऊपरी सदन में दिया गया बयान ‘‘न केवल झूठा और गुमराह करने वाला है बल्कि यह हाथ से मैला ढोने के कारण जान गंवाने वाले लोगों, उनके परिवारों और अब भी यह काम कर रहे लोगों के प्रति असंवेदनशीलता और उदासीनता को दिखाता है.’’ आवेदन में आगे कहा गया है कि संबंधित मंत्रालय ने इस साल फरवरी में कहा था कि “पिछले पांच वर्षों के दौरान मैनुअल स्कैवेंजर्स के कारण 340 मौतें हुई हैं” जो उच्च सदन में मंत्री द्वारा दिए गए जवाब के विपरीत है.

हाईकोर्ट में (5 अगस्‍त 2021) को मामले की सुनवाई थी. हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने मामले की सुनवाई करते हुए एप्‍लीकेशन में उठाई गई मांग को स्‍वीकार कर लिया और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को मामले में पार्टी बनाने के आदेश दिए. साथ ही अदालत ने इस एप्‍लीकेशन पर भारत सरकार को 13 सितंबर 2021 तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा था. हालांकि अगली सुनवाई में अदालत में सरकार की तरफ से जवाब दायर अपना पल्‍ला झाड़ लिया गया.

Madhya Pradesh Rewa Dalit Raj Mistri hand cut by sword for demanding wages

Madhya Pradesh Rewa: मजदूरी मांगने पर दलित का हाथ तलवार से काटकर अलग किया

नई दिल्‍ली/भोपाल : मध्‍यप्रदेश में दलितों के हकों को उच्‍च जातियों द्वारा कुचलने और उनका लगातार उत्‍पीड़न करने (Madhya Pradesh Dalit Atrocities) के मामले रोज बढ़ रहे हैं. रीवा जिले (Rewa) में हुई एक दर्दनाक घटना में एक दलित राजमिस्‍त्री (Dalit Raj Mistri) को अपनी मजदूरी मांगने की सजा हाथ कटवाकर चुकानी पड़ी. आरोपी गणेश मिश्रा ने दलित राजमिस्‍त्री अशोक साकेत का तलवार से बायां हाथ काट दिया, जिससे उसका पंजा हाथ से अलग हो गया. पुलिस ने इस संबंध में आईपीसी की धारा 307 तथा एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST Act) के तहत केस दर्ज कर लिया है. बताया जा रहा है क‍ि गणेश मिश्रा समेत तीन आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली गई है.

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यह मामला बीते शनिवार यानि 20 नवंबर 2021 का है. एफआईआर के मुताबिक, रीवा (Rewa District) के सिरमौर (Sirmaur) स्थित पडरी गमिया टोला थाना (Padri Gamiya Tola Police Station) अंतर्गत सत्‍येंद्र साकेत ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि शनिवार को सुबह 11 बजे वह अपने खेत में पानी लगा रहा था. तभी उनके ठेकेदार अशोक साकेत का फोन आया और उन्‍होंने कहा कि गणेश मिश्रा के घर जो काम किया था, उसका पैसा लेने उसके घर चलना है. उन्‍होंने घर जाकर गणेश मिश्रा से मजदूरी मांगी तो मिश्रा बोला कि तुम्‍हारी मजदूरी 15000 रुपये हो रही है.

Madhya Pradesh : तेज रफ्तार ट्रक ने बुझा दिए दलित परिवार के तीन चिराग, आजाद समाज पार्टी ने दमोह प्रशासन को दी चेतावनी

प्राथमिकी के अनुसार, इतने में मिश्रा दूसरे मिस्‍त्री के पास फोन लगाकर बात करने लगा तो दलित राजमिस्‍त्री अशोक साकेत ने उससे कहा कि मेरी भी बात करा दीजिए. इससे वह आग बबूला हो गया तो जातिसूचक शब्‍द कहकर अंदर से तलवार ले आया. उन्‍होंने तलवार से अशोक पर वार किए, जिससे उसका बायां हाथ का पंजा कटकर अलग हो गया. हो हल्‍ला होने पर गणेश मिश्रा एवं अन्‍य मौके से भाग गए.

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इस बाबत आजाद समाज पार्टी के मध्‍यप्रदेश अध्‍यक्ष कोमल अहिरवार ने बताया क‍ि गणेश मिश्रा ने जान से मारने के इरादे से अशोक साकेत की गर्दन पर वार किए थे, लेकिन हाथ ऊपर कर लेने की वजह से उनकी गर्दन बच गई, पर हाथ कट गया. उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री शिवराज चौहान से आरोपियों पर सख्‍त कार्रवाई के साथ ही उनका घर गिराए जाने की मांग की है. आजाद समाज पार्टी के रीवा संभाग प्रभारी मधुकर सूर्यवंशी और असपा के सतना प्रभारी एडवोकेट ओपी वर्मा वहां पीडि़त से मुलाकात करने गए थे. उनका कहना है कि आरोपियों पर सख्‍त कार्रवाई न किए जाने पर इस बार गृह मंत्री और डीजीपी का रीवा में पुतला दहन कर आंदोलन किया जाएगा.

मध्‍यप्रदेश : रोज अश्‍लील टिप्‍पणियों से परेशान थी दलित किशोरी, की आत्‍महत्‍या

High speed truck killed 3 childs of Dalit family Azad Samaj Party warned Damoh administration

तेज रफ्तार ट्रक ने बुझा दिए दलित परिवार के तीन चिराग, आजाद समाज पार्टी ने दमोह प्रशासन को दी चेतावनी

नई दिल्‍ली/दमोह: बीते 4 दिन पूर्व मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बटियागढ़ थाना अंतर्गत ग्राम आंजनी की टपरियो में एक तेज रफ्तार ट्रक ने हंसते-खेलते दलित परिवार (Dalit Family) का जीवन तहस नहस कर दिया. इस तेज रफतार ट्रक की चपेट में आकर हरिराम अहिरवार के 2 पुत्र और एक पुत्री की मृत्‍यु हो गई. साथ ही हरिराम और उनकी पत्नी गंभीर हालत में आज भी दमोह चिकित्सालय में भर्ती हैं. हरिराम अहिरवार के परिवार से मिलने एवं उनकी समस्याओं को सुनने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) (Azad Samaj Party) के प्रदेश अध्यक्ष कोमल अहिरवार (Komal Ahirwar) अपनी टीम को लेकर मौके पर पहुंचे, जहां मृतकों के परिजनों ने उन्‍हें बताया क‍ि उनके बच्चों की जान बच जाती अगर समय पर एम्बुलेंस आ जाती. दो घंटे बाद एम्बुलेंस आई, जिसमे ऑक्सीजन नहीं थी.

कोमल अहिरवार ने बताया कि मृतक बच्‍चों के परिजनों ने उन्‍हें बताया क‍ि शासकीय चिकित्सालय बटियागढ़ में भी ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं थी, इस लापरवाही ने उनके बच्चों की जान ली है. अगर बटियागढ़ पुलिस और RTO विभाग ने इन ओवरलोड डंफरों पर निगरानी रखी होती एवं रोड ठेकेदार ने ग्राम में स्पीड ब्रेकर बनवाए होते तो मेरे तीनों बच्चों की जान बच जाती है. उन्‍होंने कहा कि इन से भी बड़े हत्यारे ग्राम के सरपंच सचिव हैं, जिन्होंने PM आवास योजना का लाभ सिर्फ इसलिए नही दिया क्योंकि हम गरीबी के कारण 20 हजार रुपए नहीं दे पाए थे. अगर मेरी टपरिया की जगह पक्का मकान होता तो मेरा परिवार की सुरक्षा यह घर कर देता पर ऐसा नहीं हो सका और मेरे परिवार के तीनों चिराग बुझ गए.

प्रदेश अध्यक्ष कोमल अहिरवार (Komal Ahirwar) उनकी व्यथा सुनकर भावुक हो गए एवं मृतकों के परिजनों से वादा किया कि मैं दमोह से लेकर दिल्ली तक भी जाना पड़ा तो भी जाऊंगा पर दोषियों को दंड दिलाकर ही रहूंगा. साथ दमोह प्रशासन को चेतावनी दी कि तीन दिन के अंदर सबसे पहले बटियागढ़ अस्पताल में घटना के समय डयूटी पर उपस्थित समस्त अधिकारी कर्मचारियों को निलंबित किया जाए एवं एम्बुलेंस के कर्मचारियों को निलंबित मुकदमा किया जाए.

उन्‍होंने कहा कि RTO विभाग तत्काल ओवरलोडिड ट्रकों को राज सास किया जाए एवं आंजनी ग्राम में ही नहीं प्रत्येक ग्राम में कम से कम 10 स्पीड ब्रेकर बनवाए जाएं. साथ PM आवास के अंतर्गत मकान बनवाने का कार्य शुरू किया जाए एवं 10-10 लाख रुपये राशि की मदद की जाए अन्यथा तीन दिवस बाद भीम आर्मी, आज़ाद समाज पार्टी ग्राम वासियों के साथ मिलकर पूरे 18 Km की सड़क पर अपने हाथों से सड़क खोदकर स्पीड ब्रेकर बनाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी दमोह प्रशासन की होगी.

मध्यप्रदेश आजाद समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के साथ मुख्य रूप से आजाद समाज पार्टी कांशीराम के संभाग उपाध्यक्ष विजय चौधरी, संभाग महासचिव वीरेश सेन, संभाग महासचिव अनुराग चौधरी, संभाग सचिव संदीप, जिला प्रभारी इमरान खान, पूर्व नगर अध्यक्ष यशवंत एवं पथरिया विधान सभा प्रभारी जान मोहम्मद खान एवं विधानसभा सचिव हाकम सिंह के साथ ग्रामवासी उपस्थित थे.