Mahadalit

अब UPSC के इंटरव्यू में दलित छात्रों के साथ हुआ भेदभाव!

नई दिल्ली. दलित छात्रों के साथ भेदभाव का मामला अब यूपीएससी के इंटरव्यू में भी सामने आया है. उद्योग जगत का संगठन दलित इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री सामाजिक संरचना (Dalit Indian Chamber of Commerce and Industry Social Structure) के आधार पर ऐसी व्यवस्था की सिफारिश की है, जिसमें अब छात्रों को अपना सरनेम हटाने या छुपाने का सुझाव दिया जाएगा.

लाइव हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर के अनुसार, संगठन की एक रिसर्च की मुताबिक यूपीएससी के छात्रों के साथ सरनेम होने के कारण भेदभाव हो रहा है. संगठन का कहना है कि जो दलित छात्र अपने नाम के साथ सरनेम लगाते हैं उनके साथ इंटरव्यू के दौरान भेदभाव होता है. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा गया है, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के निर्देश पर ये अध्ययन कराया जा रहा है. मामले से जुड़े अधिकारी के मुताबिक इस अध्ययन के आजादी के बाद हुए विकास के कामकाज में दलितों के प्रतिनिधित्व को लेकर आंकडे जुटाए जा रहे हैं.

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जाति छुपाने वाले छात्र ज्यादा हुए पास
संगठन ने अपनी रिसर्च का हवाला देते हुए कहा है कि जिन छात्रों ने यूपीएससी इंटरव्यू के दौरान अपनी जाति और धर्म से जुड़ी जानकारियां छुपाई हैं, वो ज्यादा पास हुए हैं.

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रिसर्च में कहा गया है कि सिविल सेवाओं की परीक्षाओं में प्री और मेन्स परीक्षा के दौरान उपनाम गुप्त रहता है लेकिन इंटरव्यू के दौरान ये पता चल जाता है जिससे दलितों से साथ भेदभाव होता है.

Bihar Lockdown Mahadalit Sirampur

बिहार: लॉकडाउन में JCB से तोड़े गए महादलितों के घर, बचा-खुचा चावल-गेंहू भी हुआ खराब

कोरोना वायरस (Covid 19) संकट और लॉकडाउन (Lockdown) के बीच जब गरीब-पिछड़ा वर्ग आर्थिक तंगी और भूख से जूझ रहा है, ऐसे में बिहार (Bihar) के फुलवारी शरीफ में प्रशासन ने महादलितों (Mahadalit) के घर तोड़ दिए. अब हालात यह हैं कि ये लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं.

प्रभात खबर के अनुसार, सोरमपुर पंचायत के सोरमपुर गांव में महादलित टोला पर जेसीबी चलाकर चाट में बसे कई घरों को तोड़ा गया. स्‍थानीय लोगों का कहना है कि वह यहां कई सालों से रह रहे हैं. उनका कहना है कि लॉकडाउन का फायदा उठाकर हमारे घरों को उजाड़ दिया गया.

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इसके बाद भाकपा माले के लोग मौके पर पहुंचे और इन लोगों की समस्‍याओं को सुना. यहां रहने वाले एक शख्‍स लक्ष्‍मण माझी ने बताया कि जेसीबी चलाकर उनकी झोपडि़यों को तोड़ डाला गया. इसमें उनकी कमाई का चावल और गेंहू भी रखा था, जो सब मिट्टी में मिल गया.

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लक्ष्‍मण माझी जैसे ही कई लोग हैं, जिनकी झोपडि़यों को जेसीबी से जमींदोज़ कर दिया गया. अब उनके सामने अपने बच्‍चों को लेकर खुले आसमान के नीचे जीने का संकट खड़ा हो गया है.

भाकपा माले ने मांग की है कि सरकार इन गरीबों को रहने के लिए सबसे पहले जमीन उपलब्‍ध कराकर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान उपलब्‍ध कराए.

उधर, फुलवारी सीओ का कहना है कि उन्‍हें इन लोगों के घर जेसीबी से गिराए जाने की कोई जानकारी ही नहीं है. सोरमपुर में तो नाले की उड़ाही की जा रही है.

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