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दलितों को भिखारी कहने वाली तृणमूल कांग्रेस पर चुप्पी क्यों?

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कोलकाता. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में चार चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद राज्य में दलित राजनीति गर्मा गई है. तृणमूल कांग्रेस के नेता द्वारा अनुसूचित जाति के लोगों को भिखारी कहे जाने के बाद से सरगमियां बढ गई हैं. बीजेपी ने आरोप लगया है कि तृणमूल कांग्रेस एक नहीं कई बार दलित और निचले तबके के लोगों को अपमानित करती चुकी है. बीजेपी महासचिव दुष्यंत गौतम के नेतृत्व में पार्टी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने अनुसूचित जाति आयोग का दरवाजा खटखटाया और एक ज्ञापन सौंपकर टीएमसी नेता सुजाता मंडल खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

बीजेपी का कहना है कि टीएमसी नेता ने जो शब्द कहे हैं वो बहुत ही अपमानजनक है. पिछले दिनों TMC की सुजाता मंडल ने कहा था, ‘अनुसूचित जाति स्वभाव से भिखारी है. अनुसूचित जाति के लोग हमारी कल्याणकारी नीतियों की वजह से बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं.’

निर्वाचन आयोग में भी शिकायत
इससे पहले बीजेपी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को इस मामले की शिकायत निर्वाचन आयोग से भी की थी. पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से कहा था कि ये टिप्पणियां आदर्श आचार संहिता, भारतीय दंड संहिता एवं अनुसूचित जाति एवं जनजाति (उत्पीड़न रोकथाम) अधिनियम का उल्लंघन हैं.

इन सभी पहलूओं के सामने आने के बाद सवाल उठता है कि आखिरकार अब तक कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया. मंच पर कोई राजनेता किसी जाति विशेष पर अपमानजनक टिप्पणी कैसे कर सकता है.

आजादी को इतने साल बीत गए हैं, लेकिन स्थितियों में बदलाव नहीं आ रहा है. एक राजनेता का खुले मंच पर इस तरह का बयान देना लोकतांत्रिक देश में शर्मनाक है. आखिरकार कब तक समुदाय विशेष को अपमानित किया जाएगा और इस पर प्रशासनिक कार्रवाई कब तक चुप्पी साधे रहेगी.

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