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युविका चौधरी के ‘भंगी’ वाले बयान पर बोले पति प्रिंस नरूला- ‘ये तो छोटी सी बात है’

नई दिल्ली. टीवी एक्ट्रेस युविका चौधरी (Yuvika Chaudhary) के ‘भंगी’ वाले बयान पर हंगामा मचा हुआ है. पिछले दिनों युविका ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने भंगी शब्द का इस्तेमाल किया था. अब इस मामले पर युविका के पति प्रिंस नरूला (Prince Narula) ने सफाई दी है. उन्होंने कहा है कि लोगों ने इस छोटी सी बात को बड़ा बना दिया है.

प्रिंस नरूला ने कहा- ‘आजकल लोग छोटी-छोटी बातों को बड़ा बना देते हैं. युविका को तो उस शब्द का मतलब तक नहीं पता था जिसका उसने इस्तेमाल किया था. क्योंकि हम कास्ट में विश्वास भी नहीं करते हैं.’ प्रिंस ने आगे कहा कि उसे उस शब्द का मतलब भी नहीं था फिर भी उसने माफी मांगी. उसे लगा गलत बोल दिया है तो उसने माफी मांगी.

युविका के खिलाफ दर्ज हुआ केस
आपको बता दें हाल ही में युविका चौधरी के खिलाफ हांसी में केस दर्ज हुआ है. युविका के खिलाफ अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है.

देखिए युविका चौधरी का वीडियो

सोशल मीडिया पर मांगी थी माफी
युविका का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें अरेस्ट करने की मांग उठ रही थी. यह वीडियो पोस्ट होते ही वायरल हो गया था. सोशल मीडिया पर अरेस्ट करने की मांग उठने के बाद युविका ने पोस्ट शेयर करके सभी से माफी मांगी थी. उन्होंने लिखा था- मुझे उस शब्द का मतलब नहीं पता था जिसका इस्तेमाल मैंने अपने लास्ट ब्लॉग में किया था. मैं किसी को दुख नहीं पहुंचाना चाहती थी और ना किसी को दुख पहुंचा सकती हूं. अगर किसी किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं आप सभी से माफी मांगती हूं. मैं आशा करती हूं और सभी मुझे समझेंगे.

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शर्मनाकः जाति के आधार पर कोरोना वैक्सीनेशन कैंप का आयोजन, तस्वीरें वायरल

नई दिल्ली. भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप (Coronavirus Second Wave) अब कुछ धीमा हुआ है. कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए विशेषज्ञ दो ही सुझाव दे रहे हैं एक मास्क और दूसरा वैक्सीनेशन. महामारी के खिलाफ जहां पूरा भारत एक साथ आगे आय़ा है. वहीं, कर्नाटक से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आयी है. यहां जाति के आधार पर टीकाकरण (Caste Based Vaccination) किया जा रहा है.

यहां ब्राह्मण समाज के लोगों के लिए अलग से वैक्सीनेशन कैंप (Vaccination Camp for Brahmins) का आयोजन किया है. दलित कांग्रेस और डॉ. चिगुरु प्रशांतो ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से शेयर की है. तस्वीरों में देखा जा सकता है कि ब्राह्मण समाज के लोग एक लाइन में खड़े होकर टीका लगवा रहे है.

पढ़ें : दबंगों के डर से भारी पुलिस फोर्स के बीच घोड़ी पर बैठा ‘दलित कांस्टेबल दूल्हा’

डॉ. चिगुरु प्रशांतो ने तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, ‘अब जाति आधारित टीकाकरण एक नया विषय है! कर्नाटक में भाजपा सरकार ने ब्राह्मणों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान का आयोजन किया है. ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार भारतीय संविधान में विश्वास नहीं करती है. वे मनुस्मृति मॉडल का पालन करते हैं!’ उन्होंने दावा किया है कि ये तस्वीरें बेंगलुरू के मल्लेश्वरम की है.

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सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें काफी वायरल हो रही हैं और लोग इसकी निंदा कर रहे हैं.

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रणदीप हुड्डा के ‘सेक्‍स‍िस्‍ट जोक’ पर भड़कीं ऋचा चड्ढा, कहा- ये ‘घिनौना’ मजाक है

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) पर सेक्सिस्ट जोक पर बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) चारों तरफ से घिर गए हैं. एक तरफ उनकी गिरफ्तारी की मांग उठ रही है तो दूसरी तरह एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा (Richa Chadha) ने इस बयान को लेकर रणदीप हुड्डा पर निशाना साधा है और उनके मजाक को निंदनीय और जातिवादी बताया है.

रणदीप के वायरल वीडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल से शेयर करते हुए यूजर्स ने ऋचा चड्ढा, तापसी पन्नू, स्वरा भास्कर और कोंकोना सेन शर्मा को टैग किया था और उनसे प्रतिक्रिया देने के लिए कहा था. इसके पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ऋचा ने लिखा, “यह एक घिनौना ‘मजाक’ है. यह मूर्खतापूर्ण, बेस्वाद और कामुक है.”

हां यह जातिवादी भी है…
ऋचा ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, “हां, यह जातिवादी भी है. इसके अलावा, कृपया इसकी वजह भी बताएं कि आप केवल महिलाओं से अपने पुरुष सहयोगियों के लिए माफी मांगने के लिए क्यों कहते हैं, जबकि आप सेक्सिज्म पर बात करते हैं. मेरी सांस रोककर नहीं.”

जानिए क्या है पूरा मामला?
उल्लेखनीय है कि रणदीप हुड्डा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती का नाम लेते हुए आपत्तिजनक चुटकुला सुनाया है. रणदीप का ये वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है. ट्विटर पर #ArrestRandeepHood ट्रेंड कर रहा है. लोग इसे ‘सेक्सिस्ट’, ‘स्त्री विरोधी’ और ‘जाति सूचक’ कहकर कड़ी आपत्ति जता रहे हैं.

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Dalit Advocate Rajat Kalsan Blog

अपमानजनक पोस्‍ट दिखने पर क्‍या करें दलित? यह है शिकायत का सही कानूनी रास्‍ता

(ब्‍लॉग- रजत कल्‍सन)

सोशल मीडिया पर दलित समाज और उनके महापुरुषों, आरक्षण के खिलाफ अकसर अपमानजनक वीडियो और ऑडियो पोस्ट आपको देखने को मिलते हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की सख्‍त निगरानी न होने के चलते किसी भी व्‍यक्ति के द्वारा किसी के खिलाफ व्‍यक्तिगत/जातीय रूप से आपत्तिजनक टिप्‍पणी एवं समाज में वैमनस्‍य फैलाते ऐसे आपत्तिजनक टेकस्‍ट, वीडियो या ऑडियो पोस्‍ट डाल दिए जाते हैं और उन पर बामुश्किल कार्रवाई हो पाती है. ऐसे में एक सजग व्‍यक्ति होने के नाते हमारा फर्ज है कि हमें इनकी पहचान कर समय रहते उचित तरीके से इनकी कानूनन शिकायत करनी चाहिए, क्‍योंकि भारतीय संविधान और कानून की रस्सी बहुत मजबूत है. जरूरत है बस आपकी इच्छाशक्ति मजबूत होने की.

ऐसे आपत्तिजनक/अपमानजनक पोस्‍ट दिखने पर आप क्‍या करें?

1. आपत्तिजनक वीडियो या पोस्ट को डीवीडी में डाउनलोड करें या उसके स्क्रीनशॉट लें.
2. आपत्तिजनक वीडियो या पोस्ट में कही या लिखी गई बात को सफेद कागज पर लिखें.
3. सफेद कागज पर शिकायत लिखें और उसमें अपनी व आरोपी की जाति का उल्लेख करते हुए उसमें पोस्ट में लिखी गई अपमानजनक बातों को लिखे तथा जांच अधिकारी को बताएं कि उसने आपकी भावनाओं को किस तरह आहत किया.
4. वेबसाइट, सोशल मीडिया, तारीख, समय व जिनके साथ बैठ कर आपने यह पोस्ट देखी उनको गवाह के तौर पर शामिल करें.
5. अपना व गवाहों के जाति प्रमाण पत्र शिकायत के साथ संलग्न करें.
6. शिकायत के साथ डीवीडी, जाति प्रमाणपत्र, स्क्रीन शॉट, गवाहों की सूची साथ नजदीकी थाना प्रभारी को सौंपे तथा इसे रजिस्टर्ड डाक से अपने इलाके के एसएसपी/ डीसीपी को भेजें.
7. शिकायत सौंपने के बाद रसीद लेना न भूलें.

याद रहे कि एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) की धारा 18A व रूल 5 के तहत शिकायत पर मुकदमा दर्ज करना जरूरी है तथा इन शिकायतों पर प्रारंभिक जांच नहीं होगी.

पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने की स्थिति में एससी/एसटी एक्ट की धारा 14 व 18A, रूल 5 के तहत हर जिले में Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के तहत स्थापित विशेष अदालत में मुकदमा दर्ज कराने के लिए याचिका दायर करें तथा आप एससी /एसटी एक्ट की धारा 4 के तहत उक्त थाना प्रभारी जिसने आपकी एफआईआर दर्ज करने से मना किया है उसके खिलाफ भी अलग से मुकदमा दर्ज कराने की कार्यवाही कर सकते हैं.

(रजन कल्‍सन जाने-माने वकील हैं एवं दलितों के कानूनी अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं)