Dalit Kavita: भीड़ देख जोश उमड़ आता है हमारा, जय भीम के नारों से : अनिता भारती (Anita Bharti)

Kitni Ajeeb baat hai Dalit Kavit by Dalit women rights Writer Anita Bharti

कितनी अजीब बात है
जब हम सोचने लगते हैं
सिद्धान्त केवल कहने की बात हैं
चलने की नहीं

हम सत्य न्याय समता
लिख देना चाहते है किताबों में
होता है वह हमारे
भाषण का प्रिय विषय
पर उसे नहीं अपनाना
चाहते जीवन में

हम बार-बार कसम
खाते हैं अपने आदर्शों की
देते हैं दुहाई उनकी
भीड़ देख जोश
उमड़ आता है हमारा
जय भीम के नारों से
आंख भर आती है हमारी
गला अवरुद्ध हो जाता है
फफक कर रो उठते हैं हम

दुख तकलीफ उसकी याद कर
जो झेली थी भीम ने उस समय
पर हम आंख मींच लेते उससे
जो अन्याय हमारी आंखों
नीचे घट रहा है

अनिता भारती (Anita Bharti)

दलित स्त्री (Dalit Woman) के प्रश्नों पर निरंतर लेखन करने वालीं चर्चित कहानीकार आलोचक व कवयित्री अनिता भारती (Anita Bharti) दलित लेखक संघ (Dalit Lekhak Sangh) की अध्यक्ष हैं. उनका मानना है कि दलित स्त्री साहित्यकार (Dalit women litterateur) की भूमिका किसी भी सामान्य साहित्यकार से बहुत ही महत्वपूर्ण है. न्‍यूज18 हिंदी की वरिष्‍ठ पत्रकार पूजा प्रसाद (Pooja Prasad) से विशेष बातचीत में अनिता भारती कहती हैं कि ‘दलित लेखन (Dalit Writing) में अगर आप महिला मुद्दों पर बात करती हैं तो आप पर दोहरा हमला होता है. ऐसी महिला के तौर पर आपको स्थापित करने की कोशिश की जाती है जो परिवार को नहीं चाहती और जिम्मेदारियों से विमुख रहती हैं. आपके साहस को तोड़ने की पूरी कोशिश की जाती है. कहा यह जाता है कि महिला लेखिकाएं पुरुषों के खिलाफ हैं जबकि सच तो यह है कि वह पितृसत्ता के खिलाफ हैं. दलित लेखन में महिलाओं की संख्या (Number of women in Dalit writing) तो और ज्यादा कम है, उनके लेखन को तवज्जो नहीं दी जाती. देखा यह भी गया है कि साहित्य में सवर्ण स्त्रियों का वर्चस्व है और वह नारी होने के बावजूद गैर सवर्ण नारियों को इस दायरे में नहीं आने देना चाहती’.

अनिता भारती को 1994 में राधाकृष्णन शिक्षक पुरस्कार, 2007 में इन्दिरा गांधी शिक्षक सम्मान, 2008 में दिल्ली राज्य शिक्षक सम्मान, 2010 में दलितआदिवासी पत्रिका द्वारा विरसा मुंडा सम्मान, 2011 में दलित साहित्य एवं सांस्कृतिक अकादमी द्वारा वीरांगना झलकारी बाई सम्मान से नवाजा गया. वहीं, 2015 में रमणिका फाउंडेशन द्वारा सावित्रीबाई फुले सम्मान से सम्मानित किया गया और इसके बाद 2016 में स्त्रीकाल पत्रिका दवारा सावित्रीबाई फुले सम्मान से नवाजा गया. पिछले ही साल उन्हें पुरवैया संस्था द्वारा सावित्रीबाई फुले सम्मान से सम्मानित किया गया.

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