Suraj Kumar Bauddh

Suraj Kumar Bauddh Dalit Kavita Dalit Poem Unse keh do ki dare nhi hain hum

उनसे कह दो कि डरे नहीं है हम… हां, हारे हैं जरूर मगर मरे नहीं हैं हम

मगर मरे नहीं हैं हम।

उनसे कह दो कि डरे नहीं है हम,
हारे हैं जरूर मगर मरे नहीं हैं हम।

बहुत जुनून है मुझमें नाइंसाफी के खिलाफ,
सर फिरा है मगर सरफिरे नहीं हैं हम।

बहुत ऊंचा पहाड़ है, है फ़तह बहुत मुश्किल,
अभी से हार क्यों माने अगर चढ़े नहीं हैं हम।

वर्ण/जाति के बल पर उच्चता न दिखाओ,
हमारी जंग जारी है अभी ठहरे नहीं है हम।

द्रोणाचार्य अब अंगूठा नहीं फांसी मांगते हैं,
एकलव्य के वारिस हैं पर भोले नहीं हैं हम।

दो कौड़ी के दाम से मेरा जमीर मत खरीदो,
अमानत में खयानत कर बिके नहीं हैं हम।

एक रोहित की मौत से हमे खामोश मत समझो,
अब हजार रोहित निखरेंगे, बिखरे नहीं हैं हम।

जम्हूरियत में तानाशाही की चोट ठीक नहीं,
कल भी इंकलाबी थे, अभी सुधरे नहीं हैं हम।

उनसे कह दो कि डरे नहीं है हम,
हाँ, हारे हैं जरूर मगर मरे नहीं हैं हम।

– सूरज कुमार बौद्ध (Suraj Kumar Bauddh)

झाड़ू जलाते हुए, कलम उठाते हुए, हम शासक बनने की ओर अग्रसित हैं… पढ़ें, सूरज कुमार बौद्ध (Suraj Kumar Bauddh) की कविता

 

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लखबीर को आंदोलन खराब करने के लिए 30 हजार मिले: SKM | असपा बोली- मोर्चा जातीय कुंठा से ग्रस्त

नई दिल्‍ली : बीते 15 अक्टूबर को किसान आंदोलन (Kisan Andolan) विरोध स्‍थल पर मौजूद निहंग सिखों के एक समूह द्वारा सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर पंजाब (Punjab) के दलित मजदूर लखबीर सिंह (Dalit Lakhbir Singh Murder) की गई निर्मम हत्‍या के मामले में संयुक्‍त किसान मोर्चा (Samyukt Kisan Morcha) ने नया बयान जारी किया है. मोर्चे ने आरोप लगाया है कि लखबीर सिंह को किसी से तीस हजार रुपये मिले थे और यह आंदोलन को पटरी से उतारने के लिए दिए गए. मोर्चा के इस बयान पर आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) ने नाराजगी जताई है. पार्टी के प्रवक्‍ता सूरज कुमार बौद्ध ने इसे शर्मनाम बताते हुए कहा कि मोर्चा जातीय कुंठा से ग्रस्त नजर आता है.

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किसान आंदोलन (Kisan Andolan) का नेतृत्‍व कर रहे संयुक्‍त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को जारी अपने दैनिक प्रेस बुलेटिन में कहा कि ‘बीते 15 अक्टूबर को निहंग सिखों के एक समूह द्वारा सिंघु बॉर्डर पर लखबीर सिंह का एक ताजा वीडियो सामने आने के बाद, यह मालूम होता है कि लखबीर सिंह (Lakhbir Singh) को किसी से तीस हजार रुपये मिले थे, और यह आंदोलन को पटरी से उतारने के लिए दिए गए थे’.

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मोर्चा ने आगे कहा कि, ‘एसकेएम ने इस पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश से कराने की अपनी मांग दोहराई है ताकि हिंसक घटनाओं के पीछे की साजिश का पर्दाफाश हो सके’.

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वहीं, आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) ने मोर्चा के इस बयान पर गहरी नाराजगी जताई. पार्टी प्रवक्‍ता सूरज कुमार बौद्ध ने माइक्रो ब्‍लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, ‘पहले लखबीर को नृशंसता से मारा गया और फिर तलवार की नोक पर अधमरे पड़े इंसान से ₹30 हजार लेकर बेअदबी की बात उगलवाना शर्मनाक है’. उन्‍होंने आगे लिखा, ‘इससे भी शर्मनाक ‘ज़मीदार मोर्चा’ का बयान है, जिसमें वे इसे आधार बनाकर बयान जारी कर रहे हैं. मोर्चा जातीय कुंठा से ग्रस्त नजर आता है’.

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नई दिल्‍ली : सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन (Kisan Andolan) के बीच दलित मजदूर लखबीर सिंह (Dalit Lakhbir Singh) की निहंगों द्वारा की गई निर्मम हत्‍या के मामले में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने सीबीआई जांच (CBI Inquiry) की मांग उठाई है. भीम आर्मी (Bhim Army) के मुखिया और आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) ने इस बाबत पंजाब के मुख्‍यमंत्री चरणजीत सिंह चन्‍नी (Charanjit Singh Channi) को पत्र लिखा है और कहा है कि मामले में निष्‍पक्ष न्‍याय के लिए इसकी सीबीआई से जांच कराई जाए. इसके साथ ही पीडि़त परिवार को एक करोड़ का मुआवजा देने तथा उन्‍हें पुलिस प्रोटेक्‍शन दिए जाने की मांग की गई है.

सोमवार को पंजाब के तरणतारण जिला स्थित मृतक दलित लखबीर सिंह (Dalit Lakhbir Singh) के गांव पहुंचे चंद्रशेखर आजाद ने यहां लखबीर सिंह के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की. यहां काफी देर रहकर उन्‍होंने परिवार का दुख-दर्द सुना. साथ ही उनकी हरसंभव मदद करने का आश्‍वासन भी दिया. चंद्रशेखर आजाद ने गांववालों से भी बातचीत की, जिसके बाद उन्‍होंने पंजाब के सीएम चरणजीत चन्‍नी को पत्र लिखकर पीडि़त परिवार के लिए न्‍याय की मांग उठाई.

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उन्‍होंने पत्र में लिखा, बीते 14-15 अक्‍टूबर को सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर किसान आंदोलन (Kisan Andolan) के मंच के पास आपके राज्‍य के दलित मजदूर लखबीर सिंह की हत्‍या कर दी गई थी. उस पर आरोप लगाया जा रहा है कि उसने धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की थी. लखबीर के गांववालों और परिवारवालों से मुलाकात के बाद जो तथ्‍य सामने आए हैं, उससे इस मामले में संदेह पैदा हो रहा है. परिवार का साफ कहना है कि लखबीर ऐसा नहीं कर सकता. उन्‍होंने पत्र में आगे लिखा, मेरा तो ये भी मानना है कि अगर ये आरोप सही भी मान लिए जाएं तो किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है. ऐसे मामलों से निपटने के लिए देश में कानून है, कोर्ट है. अब स्थिति ये है कि परिवार लगातार अपमान झेल रहा है और साथ ही वे लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

 

उन्‍होंने पत्र में पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्‍नी (Punjab CM Charanjit Singh Channi) से आगे कहा कि लिहाजा, इस मामले की निष्‍पक्ष जांच के लिए केंद्र सरकार को लिखें. पीडि़त परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए. इसके साथ ही परिवार की सुरक्षा की जिम्‍मेदारी आपकी पुलिस ले और जरूरी हो तो परिवार को चंडीगढ़ में फ्लैट देकर शिफ्ट किया जाए.

वहीं, इस मामले को लेकर आजाद समाज पार्टी के प्रवक्‍ता सूरज कुमार बौद्ध (Suraj Kumar Bauddh) का कहना है कि अब हम इस पूरे प्रकरण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पत्र लिखेंगे. इस घटना का लेकर ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार को एक्‍शन लेना चाहिए, क्‍योंकि राज्‍य सरकार इस मामले में फेल साबित हो रही है. निहंगों ने इसे एक धार्मिक मसला बना दिया है, इसलिए कोई भी परिवार के साथ खड़ा नहीं हो रहा है. बीजेपी और कांग्रेस आगामी चुनाव के चलते कुछ करना नहीं चाह रही है और धार्मिक रंग होने के चलते शिअद इसमें कुछ करेगी नहीं. हम यह भी देख रहे हैं कि परिवार की आर्थिक मदद भी कैसे की जाए.

Bekdra Achuth Behen Suraj Kumar Boudh poem on casteist social system

‘बेकद्र अछूत बहन’: जातिवादी सामाजिक व्‍यवस्‍था पर गहरी चोट करती सूरज कुमार बौद्ध की कविता

नई दिल्‍ली : दक्षिण पश्चिम दिल्ली के कैंट इलाके में स्थित नांगल गांव (Nangal Village) में दलित बच्‍ची (Dalit Girl) से गैंगरेप, संदिग्‍ध मौत और बिना रजामंदी लाश जलाए जाने के मामले पर आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party) के प्रवक्‍ता सूरज कुमार बौद्ध (Suraj Kumar Bauddh) ने करूणा भरी एक कविता लिखी है. कविता का शीर्षक है ‘बेक़द्र अछूत बहन’. इस कविता में जहां जातिवादी सामाजिक व्‍यवस्‍था (Casteist Social System) पर गहरी चोट की गई है, वहीं उन नारीवादी संगठनों पर भी प्रहार है, जो ‘दलित बच्‍ची’ के साथ हुई इस घटना पर चुप्‍पी साधे बैठे हैं.

कविता इस जघन्‍य कांड में चुप बड़े ‘कॉपार्रेट मीडिया’ पर भी सवाल उठाती है, जिनके कैमरे और कलम शांत हैं और केस में उनकी कवरेज नदारद है.

इस कविता की यह पंक्तियां कीं ‘सब शांत हैं, कहीं कोई शोर नहीं, बोलेंगे तो धर्म नष्ट हो जाएगा, लड़ेंगे तो देवता नाराज हो जाएंगे, आप जानते हैं क्यों? क्योंकि अपराधी उनके अपने हैं’, अपने आप में काफी कुछ कह जाती है. यह पंक्तियां बताती हैं कि ब्राह्मणवादी संगठनों का रुंदन इस मामले पर इसलिए शांति है, क्‍योंकि वह जानते हैं कि केस के आरोपी कौन हैं.

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बेक़द्र अछूत बहन

फिर एक बेटी मर गई।
नहीं नहीं नहीं…
फिर एक बेटी मार दी गई,
हवस बुझाकर मार दी गई,
जलाकर मार दी गई।

कातिल कोई और नहीं
वही जातीय आतंकी हैं
जो हमारी बहन बेटियों पर
जातीय गुमान दिखाते हैं।

अब नहीं करेंगे शक्ति प्रदर्शन,
तमाम नारीवादी व उनके संगठन।
न महिला आयोग चुप्पी तोड़ेगी,
न अब मीडिया ट्रायल शुरू करेगी।

गली गली से मोमबत्तियां
अब नहीं निकाली जाएंगी,
अब सिविल सोसाइटी वाले
कहीं नजर नहीं आएंगे,
प्रगतिशील झुंड लापता हैं,
अदालतें स्वतः संज्ञान नहीं लेंगी।

सब शांत हैं। कहीं कोई शोर नहीं।
बोलेंगे तो धर्म नष्ट हो जाएगा,
लड़ेंगे तो देवता नाराज हो जाएंगे।

आप जानते हैं क्यों?
क्योंकि अपराधी उनके अपने हैं।
और पीड़िता बेक़द्र अछूत बहन!
लड़ती हुई, जलती हुई, मरती हुई।

– सूरज कुमार बौद्ध (Suraj Kumar Bauddh)