छत्तीसगढ़ः दलित बस्ती में अभी से पानी की किल्लत, जाना पड़ रहा है मीलों दूर; गर्मी में क्या होगा

भोपाल. मध्यप्रदेश के अलीपुरा की दलित बस्तियों में मार्च के महीने में ही पीने के पानी के लिए संकट गहरा गया है. वार्ड नंबर 13,14,15 में नलजल योजना का कार्य नहीं होने से यहां रहने वाले दलितों (Water crises in Dalit colony) को मीलों दूर से पानी लाना पड़ रहा है.

दैनिक भास्कर पर प्रकाशित खबर के अनुसार, अलीपुरा के कस्बा के वार्ड नंबर 13, 14, 15 में पानी का इंतजाम न होने के कारण वहां रहने वाले दलित लोगों को आलीपुरा बदान, तालाब हैंडपंप, आलीपुरा तालाब, नृसिंह भगवान मंदिर हैण्डपंप या आलीपुरा पंचायत भवन के पास लगे हुए हैंडपंप से पानी लाने के लिए मजबूर हैं.

दूर से पानी भरकर लाती हैं पानी
बस्ती की ज्यादातर महिलाएं सिर पर भारी मटकों में पानी भरकर लाती हैं और तब पूरे परिवार को पिलाती हैं. वहां पर रहने वाले लोगों का कहना है कि ये समस्या सिर्फ इस साल की नहीं है बल्कि कई सालों से ऐसा ही चल रहा है. दलित युवा एवं महिलाओं ने अपनी समस्या ग्राम पंचायत और पीएचई विभाग को कई बार बताई है. हालांकि इसका कोई हल नहीं निकला है. क्षेत्र में हैंडपंप लगवाने का प्रस्वात लोगों द्वारा पीएचई विभाग को भी दिया. हालांकि अब तक विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की ही है.

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आठ माह पहले किया हैंडपंप का प्रस्ताव
वहीं, इस पूरे मामले पर गांव की सरपंच स्नेहलता सोनी का कहना है कि उन्होंने 8 महीने पहले बैठक में ही दलित बस्ती में हैंडपंप लगाने का प्रस्ताव पास किया था. प्रस्ताव को पीएचई को सौंप दिया था. उन्होंने कहा कि हमारे हाथ में जो था वो हमने कर दिया.

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हमें क्यों रखा गया वंचित
बस्ती में रहने वाली महिलाओं का कहना है कि जब सरकार द्वारा गांव में नलजल योजना आई है तो हमारे क्षेत्र को क्यों इससे वंचित रखा गया. मीलों दूर से पानी लाने वाली महिलाओं का कहना है कि जब चुनाव होते हैं तो नेता बड़े-बड़े वादे करके लोगों को प्रभावित करते हैं और वोट बंटोर कर चले जाते हैं. हालांकि जब वादे पूरा करने का वक्त आता है तो राजनेता पीछे हट जाते हैं.

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