अपमानजनक पोस्‍ट दिखने पर क्‍या करें दलित? यह है शिकायत का सही कानूनी रास्‍ता

Dalit Advocate Rajat Kalsan Blog

(ब्‍लॉग- रजत कल्‍सन)

सोशल मीडिया पर दलित समाज और उनके महापुरुषों, आरक्षण के खिलाफ अकसर अपमानजनक वीडियो और ऑडियो पोस्ट आपको देखने को मिलते हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की सख्‍त निगरानी न होने के चलते किसी भी व्‍यक्ति के द्वारा किसी के खिलाफ व्‍यक्तिगत/जातीय रूप से आपत्तिजनक टिप्‍पणी एवं समाज में वैमनस्‍य फैलाते ऐसे आपत्तिजनक टेकस्‍ट, वीडियो या ऑडियो पोस्‍ट डाल दिए जाते हैं और उन पर बामुश्किल कार्रवाई हो पाती है. ऐसे में एक सजग व्‍यक्ति होने के नाते हमारा फर्ज है कि हमें इनकी पहचान कर समय रहते उचित तरीके से इनकी कानूनन शिकायत करनी चाहिए, क्‍योंकि भारतीय संविधान और कानून की रस्सी बहुत मजबूत है. जरूरत है बस आपकी इच्छाशक्ति मजबूत होने की.

ऐसे आपत्तिजनक/अपमानजनक पोस्‍ट दिखने पर आप क्‍या करें?

1. आपत्तिजनक वीडियो या पोस्ट को डीवीडी में डाउनलोड करें या उसके स्क्रीनशॉट लें.
2. आपत्तिजनक वीडियो या पोस्ट में कही या लिखी गई बात को सफेद कागज पर लिखें.
3. सफेद कागज पर शिकायत लिखें और उसमें अपनी व आरोपी की जाति का उल्लेख करते हुए उसमें पोस्ट में लिखी गई अपमानजनक बातों को लिखे तथा जांच अधिकारी को बताएं कि उसने आपकी भावनाओं को किस तरह आहत किया.
4. वेबसाइट, सोशल मीडिया, तारीख, समय व जिनके साथ बैठ कर आपने यह पोस्ट देखी उनको गवाह के तौर पर शामिल करें.
5. अपना व गवाहों के जाति प्रमाण पत्र शिकायत के साथ संलग्न करें.
6. शिकायत के साथ डीवीडी, जाति प्रमाणपत्र, स्क्रीन शॉट, गवाहों की सूची साथ नजदीकी थाना प्रभारी को सौंपे तथा इसे रजिस्टर्ड डाक से अपने इलाके के एसएसपी/ डीसीपी को भेजें.
7. शिकायत सौंपने के बाद रसीद लेना न भूलें.

याद रहे कि एससी/एसटी एक्ट (SC/ST Act) की धारा 18A व रूल 5 के तहत शिकायत पर मुकदमा दर्ज करना जरूरी है तथा इन शिकायतों पर प्रारंभिक जांच नहीं होगी.

पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने की स्थिति में एससी/एसटी एक्ट की धारा 14 व 18A, रूल 5 के तहत हर जिले में Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के तहत स्थापित विशेष अदालत में मुकदमा दर्ज कराने के लिए याचिका दायर करें तथा आप एससी /एसटी एक्ट की धारा 4 के तहत उक्त थाना प्रभारी जिसने आपकी एफआईआर दर्ज करने से मना किया है उसके खिलाफ भी अलग से मुकदमा दर्ज कराने की कार्यवाही कर सकते हैं.

(रजन कल्‍सन जाने-माने वकील हैं एवं दलितों के कानूनी अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं)

 

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